प्रदर्शनों के बाद तुर्की जाने से बच रहे भारतीय

Image caption भारत से हर महीने करीब 8000 लोग तुर्की जाते हैं.

तुर्की में पिछले चार दिनों से चल रहे प्रदर्शन धीरे-धीरे उग्र होते जा रहे है. इस्तांबुल के ऐतिहासिक गेज़ी पार्क को लेकर शुरू हुआ प्रदर्शन कम से कम 67 शहरों में फैल गया है और 1700 लोगों की गिरफ्तारियां हो चुकी हैं.

मुल्क की मौजूदा स्थिति से पर्यटन को भी खासा नुकसान हो रहा है. भारत में भी तुर्की एक लोकप्रिय पर्यटन स्थल के रूप में देखा जाता है. तुर्की टूरिज़्म के आंकड़ों के अनुसार भारत से हर साल करीब एक लाख लोग तुर्की घूमने आते हैं.

तुर्की के पर्यटन को भारत में बढ़ावा देने के लिए कई कोशिशें की गई और वो काफ़ी हद तक सफल भी रही थी. भारतीयों के बीच इस्तांबुल के अलावा कुसाडासी, अंतल्या और कैपाडोसिया काफी लोकप्रिय स्थल माने जाते हैं.

तुर्की टूर की मांग 'घटी'

हालांकि अब तुर्की का टूर प्लान करने वाली भारतीय ट्रैवेल एजेंसियों के अनुसार तुर्की में हो रहे प्रदर्शनों के बाद वहां के टूर पैकेजों की मांग में भारी गिरावट आई है.

टूर प्लानर कौशिक गुप्ता ने कहा, “तुर्की सबसे ज्यादा लोकप्रिय पर्यटन स्थलों में से एक है लेकिन जब से वहां विरोध प्रदर्शन और हिंसा शुरू हुई है तब से लोग वहां जाने से कतरा रहे हैं. मांग में कम से कम 60 फ़ीसदी की गिराव आई है. करीब तुर्की की जगह अब भारत के पर्यटक दुबई, मध्यपूर्व और चीन तक जाने के लिए तैयार हैं.”

पर्यटन से जुड़े लोगों का मानना है कि जब भी किसी देश में प्रदर्शन-हिंसा की खबरें आती है, चाहे वो सच हो या अफ़वाह वहां के पर्यटन उद्योग का सबसे ज्यादा नुकसान होता है.

तुर्की में शांति के लिए वहां के कई नेताओं के अपील के बाद भी मुल्क के हालातों में कोई खास सुधार नहीं हुआ है.

प्रदर्शनों के बाद

Image caption तुर्की के पर्यटन को भारत में बढ़ावा देने के लिए कई कोशिशें की गई और वो काफ़ी हद तक सफल भी रही थी

प्रदर्शनों के दौरान तकसीम चौक में मौजूद रहे भारतीय नाहरिक ज़ायद और नासिर ने बीबीसी को बताया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन उस समय हिंसक हो गया जब प्रदर्शनकारियों में शामिल लोग उग्र हो उठे और सरकार विरोधी नारे लगाने लगे.

तुर्की में मौजूद नासिर ने कहा, “ये प्रदर्शन शुरु तो एक पार्क के पुनर्विकास को लेकर हुए थे और काफी शांतिपूर्ण थे. लेकिन बाद में प्रदर्शन हिंसक हो गए. दरअसल पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को भगाने के लिए आँसू गैस छोड़ी. इसके बाद प्रदर्शनकारी भी भड़क गए. अब ये प्रदर्शन तुर्की के कई शहरों में फैल गए.”

वहीं मौजूद एक और भारतीय ज़ायद कहते हैं, “हमने भारत में भी अन्ना हज़ारे वाला आंदोलन देखा है. लेकिन तुर्की में चल रहे आंदोलन में एक फर्क ये है कि लोग ज़्यादा अनुशासित हैं, जाने से पहले हमने देखा कि लोग वहाँ सफाई कर रहे हैं, उनके लिए लोग मुफ्त खाना लेकर आए हुए थे.”

तुर्की में मौजूदा हालात के बीच एक तरफ जहां वहां के पर्यटन उद्योग का नुकसान हो रहा है वहीं पर्यटक छुट्टियां मनाने के लिए और भी ठिकाने तलाश रहे हैं.

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