शादी बिना बच्चा, तो लगेगा जुर्माना!

  • 4 जून 2013
चीन की बिन ब्याही माँओं के खिलाफ कानून
Image caption केंद्रीय चीन में एक ऐसे क़ानून पर विचार हो रहा है जिसमें बिन ब्याही माँओं पर जुर्माने का प्रावधान है.

बिन ब्याही माँओं पर जुर्माने को लेकर मध्य चीन में एक क़ानून पर बहस छिड़ी हुई है.

इसमें बिन ब्याही माँओं के साथ-साथ उन माँओं पर जुर्माना लगाने का प्रावधान होगा जिन्हें किसी शादीशुदा मर्द से बच्चे हुए और उन्हें इसकी पहले से जानकारी थी.

चीन के वूखान शहर के क़ानूनी मामलों से जुड़े दफ़्तर ने पॉपुलेशन एंड फैमिली प्लानिंग मैनेजमेंट के तहत प्रस्तावित क़ानून का मसौदा जारी किया है.

इसे लागू करने का मक़सद परिवार नियोजन बताया गया है, ताकि जन्म दर काबू में रखी जा सके.

प्रशासन ने शुक्रवार को क़ानून का ड्राफ्ट जारी किया. इस बारे में आम जनता से 7 जून तक सुझाव मांगे हैं. अगर क़ानून लागू हुआ तो ये 2010 में बने इसी तरह के नियमों की जगह लेगा.

आय का दोगुना जुर्माना

क़ानून के ड्राफ्ट में कहा गया है कि एक बिन ब्याही माँ को पिछले साल की अपनी औसत आय के दोगुने के बराबर जुर्माना देना होगा.

चीन के परिवार नियोजन क़ानून के मुताबिक क़ानून का उल्लंघन करने वालों को ‘सामाजिक क्षतिपूर्ति शुल्क’ देना होता है. अगर वो सरकारी कर्मचारी हैं तो उन्हें प्रशासनिक दंड भी भुगतना पड़ता है.

पिछले कुछ साल से ये जुर्माना बढ़कर पिछले साल की औसत आय से तीन गुना तक हो गया है.

वूखान के एक स्वास्थ्य और परिवार कल्याण आयोग के एक अधिकारी ने बताया कि राष्ट्रीय और खूबे प्रोविंस के क़ानूनों में भी किसी बिन ब्याही माँ को बच्चा पैदा करने की इजाज़त नहीं है.

हालांकि ऐसे मामलों में सज़ा का ज़िक्र उतना साफ नहीं है, जैसा प्रावधान वूखान के इस नए प्रस्तावित क़ानून में है.

अपना नाम ज़ाहिर न करने की शर्त पर इस अधिकारी ने बताया कि ‘वूखान का आयोग जनता के सुझावों का ख़्याल रखेगा. इसके बाद संशोधित क़ानून का ड्राफ्ट मंज़ूरी के लिए पीपुल्स कांग्रेस में रखा जाएगा.’

‘जुर्माना लगाने का क़ानून काफ़ी पुराना’

रेनमिन यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ सोश्योलॉजी एंड पॉपुलेशन स्टडीज़ के डायरेक्टर जॉई जॉनवू कहते हैं कि शादी के पंजीकरण के बिना बच्चे पैदा करने का रिवाज़ क़ानूनन मान्य नहीं है.

उन्होंने कहा, ‘बग़ैर शादी किए बच्चे पैदा करने पर जुर्माना लगाने का प्रावधान तो पूरे चीन में काफी समय से है.’

‘सामाजिक जटिलताओं का ध्यान नहीं रखा’

नानकाई यूनिवर्सिटी में पॉपुलेशन स्टडीज़ के प्रोफ़ेसर वुआन शिन ने बताया कि हालांकि ये क़ानून बग़ैर शादी किए बच्चे पैदा करने पर रोक लगाने के लिए है, लेकिन इसमें सामाजिक जटिलताओं का ध्यान नहीं रखा गया है. ऐसे में इसे लागू करना मुश्किल काम है.

उनका कहना है कि जैसे-जैसे चीनी समाज और खुलता जा रहा है, पारिवारिक विविधता भी बढ़ रही है और नई समस्याओं ने परिवार नियोजन को ज़्यादा जटिल बना दिया है.

वुआन कहते हैं कि ‘मिसाल के लिए पिछले कुछ सालों में ऐसे लोग बढ़े हैं, जो अकेले रहनापसंद करते हैं. अगर ये क़ानून लागू हुआ, तो ऐसे लोग क़ानूनन बच्चे पैदा नहीं कर पाएंगे, जो अजीब बात है.’

'टेस्ट ट्यूब बेबी पर भी जुर्माना?'

वो आगे कहते हैं कि ‘इसके अलावा आप ये कैसे तय कर सकते हैं कि किसी बिन ब्याही माँ को इसका इल्म है या नहीं कि उसके बच्चे का पिताशादीशुदा है या नहीं’

वुआन का मानना है कि इस क़ानून को लागू करने से पहले इस पर ज़्यादा तफ़्सील से बात करने की ज़रूरत है.

क़ानून को लेकर शहर के बुद्धिजीवियों और बाशिंदों में पहले से विवाद जारी है. वुहान यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर वांग चिऑन्ग कहते हैं कि ‘ये क़ानून एक मज़ाक है. अगर कोई महिला बग़ैर शादी किए टेस्ट ट्यूब बेबी पाने की इच्छा रखती है तो क्या उस पर भी जुर्माना लगाया जाएगा?’

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