लोकतंत्र के सिवा कोई रास्ता नहीं: नवाज़ शरीफ़

नवाज़ शरीफ़( फ़ाइल फ़ोटो)
Image caption नवाज़ शरीफ़ के सामने चुनौतियां भी बहुत हैं.

बुधवार को पाकिस्तान के राष्ट्रीय एसेंबली में नवाज़ शरीफ़ को दो-तिहाई बहुमत से प्रधानमंत्री चुना गया.

342 सदस्यों वाली एसेंबली में नवाज़ शरीफ़ को कुल 244 वोट मिले जबकि पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी(पीपीपी) के उम्मीदवार मख़्दूम अमीन फ़हीम को 42 वोट और इमरान ख़ान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ़ के जावेद हाशमी को कुल 31 वोट मिले.

ग़ौरतलब है कि प्रधानमंत्री चुने जाने के लिए नवाज़ शरीफ़ को सिर्फ़ 172 वोटों की ज़रूरत थी.

प्रधानमंत्री चुने जाने के बाद सांसदों और जनता का शुक्रिया अदा करते हुए नवाज़ शरीफ़ ने कहा कि जनता के दो-टूक फ़ैसले ने ये साबित कर दिया है कि वे लोकतंत्र पर पक्का विश्वास रखते हैं.

अपने पहले ही भाषण में नवाज़ शरीफ़ ने अमरीकियों से पाकिस्तान के क़बायली इलाक़ों में ड्रोन हमले बंद करने की अपील की.

ड्रोन हमलों के कारण पिछले कुछ वर्षों में पाकिस्तान और अमरीका के बीच रिश्तों में तनाव बना हुआ है.

लेकिन क्या अमरीका नवाज़ शरीफ़ की अपील पर ध्यान देगा, इस सवाल के जवाब में इस्लामाबाद स्थित बीबीसी उर्दू के पाकिस्तान संपादक हारून रशीद का कहना है कि नवाज़ शरीफ़ और अमरीका के बीच बहुत अच्छे संबंध रहे हैं इसलिए कुछ उम्मीद की जा सकती है.

हारून रशीद का कहना था, ''अमरीका की तरफ़ से भी ऐसे संकेत मिल रहे हैं. राष्ट्रपति ओबामा ने भी आतंकवाद निरोधी अपने पिछले भाषण में कहा था कि ड्रोन हमले अब कम होंगे. दोनों देश उसी दिशा में आगे बढ़ रहे हैं लेकिन अब देखना है कि दोनों देश कितना जल्द इसका हल निकाल पाते हैं.''

लोकतंत्र पर विश्वास

शरीफ़ ने कहा कि लोकतंत्र के रास्ते पर चलने के सिवा पाकिस्तान के पास दूसरा कोई रास्ता नहीं है.

पाकिस्तान के इतिहास में सैन्य शासकों के दौर पर हमला करते हुए शरीफ़ ने कहा कि जब भी लोकतंत्र से मुंह मोड़ा गया तब-तब पाकिस्तान में संविधान और क़ानून की सत्ता पर कड़ी चोट लगी.

उन्होंने कहा कि जब भी सैन्य शासन आया, पाकिस्तान का बहुत नुक़सान हुआ.

उनके अनुसार, ''सैन्य शासन के दौर में अतिवादी विचारधारा, अराजकता और अशांति को बढ़ावा मिला.''

नवाज़ शरीफ़ ने कहा कि सैन्य शासन के कारण ही पाकिस्तान के दो टुकड़े हुए. ग़ौरतलब है कि आज जिसे बांग्लादेश कहा जाता है वो दर असल पहले पाकिस्तान का ही हिस्सा था जिसे पूर्वी पाकिस्तान कहा जाता था लेकिन 1971 में वो हिस्सा पाकिस्तान से अलग हो गया और बांग्लादेश के नाम से एक स्वतंत्र देश का गठन हुआ.

'नई परंपरा'

Image caption नवाज़ के आने के बाद भारत से रिश्ते कैसे होंगे, इस पर भी सबकी निगाहें टिकी है.

लोगों को संबोधित करते हुए नवाज़ शरीफ़ ने कहा कि वो चांद-सितारे तोड़कर लाने का वादा तो नहीं करेंगे लेकिन इतना ज़रूर है कि जनता के विश्वास को किसी भी हालत में ठेस नहीं पहुंचाएंगे.

शरीफ़ ने कहा कि पिछले पांच साल में उनकी पार्टी ने विपक्ष के तौर पर एक सकारात्मक भूमिका निभाई थी और पाकिस्तान के इतिहास में एक नई परंपरा की शुरूआत की थी.

उन्होंने विश्वास दिलाया कि सत्ता में आने के बाद भी वो एक नई परंपरा की शुरूआत करेंगे और किसी भी पार्टी या राज्य के साथ किसी तरह का कोई भेदभाव नहीं बरता जाएगा.

भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ सख़्त रवैया अपनाने का वादा करते हुए शरीफ़ ने कहा कि भ्रष्टाचार में लिप्त पाए गए लोगों को बख़्शा नहीं जाएगा.

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