पड़ोसी पाकिस्तान के मीडिया में मोदी राग

भारत की प्रमुख विपक्षी पार्टी भाजपा की चुनाव अभियान समिति के नवनियुक्त अध्यक्ष नरेंद्र मोदी न केवल देश के समाचार माध्यमों में सुर्खियों में छाए हुए हैं बल्कि पड़ोसी देश पाकिस्तान के अखबारों में भी उन्हें अच्छी कवरेज मिलती दिख रही है.

पाकिस्तान के एक प्रमुख दैनिक ‘द न्यूज़’ ने पणजी डेटलाइन से विवादास्पद विपक्षी राजनेता नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने की संभावनाओं को बल मिलने की खबर दी है.

अखबार लिखता है कि मोदी की पार्टी ने उन्हें अगले साल होने वाले आम चुनाव में पार्टी की कमान सौंपी है.

द न्यूज़ के मुताबिक मई 2014 में प्रस्तावित आम चुनाव के मद्देनजर तटवर्ती राज्य गोवा में पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की दो दिनों की बैठक आयोजित हुई जिसमें मोदी को ये जिम्मेदारी देने का फैसला किया गया.

मोदी की महत्वाकांक्षा

अखबार ने इस बात का जिक्र किया है कि पार्टी की इस बैठक का कुछ वरिष्ठ नेताओं ने ‘बहिष्कार’ किया.

बहिष्कार करने वाले नेताओं में 85 वर्षीय लाल कृष्ण आडवाणी भी थे जिन्होंने एक समय में नरेंद्र मोदी को संरक्षण दिया था.

बैठक में अपनी गैरहाजिरी को लेकर आडवाणी ने आधिकारिक तौर पर कहा कि तबियत खराब होने की वजह से वह नहीं आ सके.

अखबार के मुताबिक आडवाणी मोदी के कथित खराब बर्ताव की वजह से उनकी तरक्की की मुखालफत कर रहे हैं.

इस बैठक में भारतीय जनता पार्टी के तकरीबन 300 सदस्य भागीदारी कर रहे थे.

द न्यूज ने इस बात की ओर भी इशारा किया है कि दशक भर पहले गुजरात में हुए मुस्लिम विरोधी दंगों का जिन्न मोदी की महत्वाकांक्षा की राह में रोड़ा बन सकता है.

दक्षिणपंथी तौर तरीके

महीने भर तक चली अशांति के दौर में ज्यादातर मुसलमान मारे गए थे जिनकी संख्या तकरीबन दो हज़ार के करीब थी.

मोदी की काबीना के एक पूर्व मंत्री को इस सिलसिले में उम्र कैद की सज़ा भी सुनाई गई है.

हालांकि कई जाँचों में कट्टरपंथी माने जाने वाले इस राजनेता को निजी जिम्मेदारी से बरी किया जा चुका है.

पाकिस्तान के एक अन्य अखबार डॉन ने नई दिल्ली डेटलाइन से लिखा है कि भाजपा की चुनाव अभियान समिति की कमान मोदी को दिए जाने से इस बात की संभावना है कि 2014 के आम चुनाव में खुलेआम दक्षिणपंथी तौर तरीके से प्रचार किया जाएगा.

अखबार के मुताबिक वरिष्ठ नेता एलके आडवाणी की अगुवाई वाली धड़े की मुखालफत के बावजूद यह फैसला किया गया है.

पार्टी के इस फैसले को प्रधानमंत्री पद के लिए भाजपा के उम्मीदवार के तौर पर देखा जा रहा है.

राजनीतिक ध्रुवीकरण

मोदी को चुनाव अभियान समिति की कमान सौंपने के फैसले की घोषणा पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने एक संक्षिप्त से बयान से की.

घोषणा के वक्त उनके साथ लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज, अरुण जेतली, पार्टी के पूर्व अध्यक्ष वैंकेया नायडू और महासचिव अंनत कुमार भी थे.

डॉन लिखता है कि इस मसले पर मीडिया से कोई बातचीत नहीं की गई.

अखबार लिखता है कि राजनाथ सिंह ने बिना किसी तफसील में गए कहा, “जो कुछ तय किया गया है वह आम सहमति से तय किया गया है.”

खबर में इस बात का भी जिक्र किया गया है कि मोदी की नियुक्ति का फैसला आडवाणी के विरोध के बावजूद हुआ है और इसी वजह से वे बैठक से दूर रहे.

अखबार के मुताबिक भारत में गोधरा के बाद हुए 2002 के दंगों से ही नरेंद्र मोदी देश की सियासत के उन चेहरों में से गिने जाते हैं जिनके नाम पर राजनीतिक ध्रुवीकरण होता है.

टिप्पणी से इनकार

डॉन लिखता है कि मोदी ने एक ट्वीट में कहा कि उन्हें आडवाणी का आशीर्वाद हासिल है.

डॉन ने इस बात की ओर भी ध्यान दिलाया कि राजनाथ सिंह की घोषणा पर जब पत्रकारों ने सुषमा स्वराज की राय जाननी चाही तो उन्होंने किसी किस्म की टिप्पणी करने से इनकार कर दिया.

पाकिस्तान के अखबार डेली टाइम्स और पाकिस्तान टुडे ने अलग-अलग सुर्खिया लगाई हैं.

डेली टाइम्स लिखता है, “मोदी भाजपा की चुनाव अभियान समिति के प्रमुख बने”

जबकि पाकिस्तान टुडे ने सुर्खी लगाई है, “2014 के आम चुनाव में कांग्रेस को लगातार तीसरी जीत की उम्मीद”

अखबार के मुताबिक हिंदू राष्ट्रवादी और कट्टरपंथी नेता नरेंद्र मोदी ने ट्विटर पर लिखा है कि साल 2004 से सत्तासीन कांग्रेस पार्टी को हराने के लिए वे कोई कोर कसर नहीं छोड़ेंगे.

गठबंधन सरकार

अखबार के मुताबिक पार्टी की चुनाव अभियान समिति की कमान मिलने को भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार बनने की चाहत के करीब पहुंचने के तौर पर देखा जा रहा है.

अखबार के मुताबिक हालांकि इस बात को लेकर चिंताएं भी हैं कि गुजरात दंगों के दौरान वे मुसलमानों के खिलाफ हिंसा रोकने में नाकाम रहे थे.

मोदी ने अपनी छवि व्यापार जगत के समर्थक ऐसे सुधारवादी नेता के तौर पर बनाई है जो विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र का भविष्य बदलने का माद्दा रखते हैं.

कांग्रेस अगले आम चुनाव में लगातार तीसरी जीत की उम्मीद कर रही है लेकिन उसकी अगुवाई वाली गठबंधन सरकार धीमे आर्थिक विकास और भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरी हुई है.

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