अफ़ग़ानिस्तान की अगुवाई में ही वार्ता मंजूर: करज़ई

  • 19 जून 2013
Image caption अफगानिस्तान के राष्ट्रपति हामिद करजई को तालिबान के नए कार्यालय के नाम और उस पर अफगानिस्तान का झंडा लगाने पर आपत्ति है.

अफगानिस्तान के राष्ट्रपति हामिद करज़ई ने कहा है कि उनकी सरकार तब तक तालिबान के साथ शांति वार्ता में शामिल नहीं होगी, जबकि यह प्रक्रिया अफ़ग़ानिस्तान की अगुवाई में न हो.

इसके साथ ही क़तर में तालिबान दफ़्तर के नाम और वहां अफ़ग़ानिस्तान का झंडा लगाने से नाराज़ करज़ई सरकार ने अमरीका के साथ द्विपक्षीय सुरक्षा समझौते को लेकर बातचीत स्थगित कर दी है.

राष्ट्रपति हामिद करज़ई के प्रवक्ता के मुताबिक यह फ़ैसला तालिबान के साथ अमरीका की प्रस्तावित सीधी वार्ता में विसंगतियां देखते हुए उठाया गया है.

अमरीका और अफगानिस्तान 2014 में अमरीकी सेना की मौजूदगी का स्वरूप तय करने के लिए बातचीत कर रहे हैं.

काबुल में बीबीसी संवाददाता बिलाल सरवरी ने बताया है कि राष्ट्रपति हामिद करज़ई अमरीका के साथ दीर्घकालिक समझौते पर दस्तख़त नहीं करना चाहते क्योंकि उन्हें अफ़ग़ानिस्तान की संप्रभुता कमजोर होने का डर है.

अफगानिस्तान की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने बुधवार को इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि राष्ट्रपति करज़ई ने अमरीकी सरकार के साथ द्विपक्षीय सुरक्षा समझौता वार्ता का चौथे दौर स्थगित कर दिया है.

'अमरीका की कथनी और करनी में अंतर'

राष्ट्रपति के प्रवक्ता एमल फैजी ने कहा, “अफगानिस्तान में शांति वार्ता के संबंध में अमरीकी सरकार जो कहती है और जो करती है, उनमें विरोधाभास है.”

उन्होंने कहा कि वो क़तर की राजधानी दोहा में तालिबान के नए कार्यालय को दिए गए नाम से असहमत हैं.

फैजी ने कहा, “हम ‘इस्लामिक अमीरात ऑफ अफ़ग़ानिस्तान’ नाम का विरोध करते हैं क्योंकि ऐसी किसी चीज का अस्तित्व ही नहीं है.” उन्होंने बताया कि अमरीका राष्ट्रपति के रुख को जानता है.

अफ़ग़ान अधिकारियों ने बताया कि करज़ई ने नए भवन पर अफ़ग़ानिस्तान का झंडा फहराने पर भी आपत्ति जताई है.

अफ़ग़ानिस्तान का रुख ऐसे समय सामने आया है, जब एक दिन पहले अमरीका ने घोषणा की थी कि वह तालिबान के साथ सीधी शांति वार्ता शुरू करेगा.

'सुलह की कोशिश भी ज़रूरी कदम'

दूसरी ओर अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने कहा कि वाशिंगटन को अफ़ग़ान सरकार के साथ इस मनमुटाव का अनुमान था, लेकिन हमारा मानना है कि चरमपंथियों के साथ सुलह की कोशिश करना महत्वपूर्ण है.

बर्लिन में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान ओबामा ने कहा कि अफ़ग़ानिस्तान संकट को हल करने के लिए अमरीका को दो तरफ़ा सोच अख्तियार करनी पड़ी है.

ओबामा ने कहा, 'हमारा यकीन है कि ऐसे हालात में हमें किसी तरह का राजनीतिक हल निकालना ज़रूरी है. चाहे इसका नतीजा अच्छा निकले चाहे हमें 2014 के बाद भी लड़ाई लड़नी पड़े जैसा अंतरराष्ट्रीय फौजों के पहुंचने के बाद हुआ था.

अमरीकी राष्ट्रपति का कहना है कि जवाब सिर्फ अफ़ग़ानिस्तान सरकार ही दे सकती है. उन्होंने उम्मीद जताई कि राष्ट्रपति करज़ई भी सियासी ज़रूरतों को समझते हैं और इसे एक चुनौती की तरह देखना चाहिए कि लड़ाई के दौरान भी बातचीत को कैसे जारी रखा जाए.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहाँ क्लिक करें. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

संबंधित समाचार