सीरियाई बागियों को 'तुरंत मदद' देने पर सहमति

'फ्रेंड्स ऑफ़ सीरिया' समूह के विदेश मंत्री सीरियाई विद्रोहियों को तुरंत मदद देने पर सहमत हो गए हैं.

सीरियाई विद्रोहियों का समर्थन कर रहे इस समूह की बैठक क़तर की राजधानी दोहा में हो रही है. क़तर के प्रधानमंत्री हमद बिन जासिम बिन जबार अल-थानी ने कहा, "शांति का लक्ष्य हासिल करने का एकमात्र तरीका शायद हथियार मुहैया कराना ही हो."

इस समूह ने सीरियाई सरकार की ओर से ईरानी और हिज़बुल्लाह लड़ाकों के इस्तेमाल की भी निंदा की.

फ्रेंड्स ऑफ़ सीरिया में अमरीका, ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी के साथ सउदी अरब, तुर्की, मिस्र और जॉर्डन शामिल हैं.

सीरिया में दो साल से ज़्यादा समय से चल रहे गृह युद्ध में अबतक 90,000 से ज़्यादा लोग मारे जा चुके हैं.

सीरियाई सरकार का कहना है कि वो विदेशी समर्थन प्राप्त 'आतंकवादियों' से लड़ रही है.

'तुरंत मदद'

फ्रेंड्स ऑफ़ सीरिया समूह के एक साझा वक्तव्य में कहा गया है कि "उसका हर सदस्य देश अपने तरीके से विपक्ष को सीरियाई सरकार और उसके सहयोगियों के क्रूर हमलों का जवाब देने के लिए ज़मीनी स्तर पर सभी ज़रूरी सामान और उपकरण तुरंत मुहैया कराने के लिए तैयार था."

ये मदद पश्चिमी देशों द्वारा समर्थित विद्रोही सैन्य कमांड के ज़रिए भेजी जाएगी.

इस समूह ने सीरिया से लेबनानी गुट हिज़बुल्लाह और ईरानी लड़ाकों के भी तुरंत हटने की मांग की है.

पिछले हफ्ते ही अमरीका ने सीरियाई विद्रोहियों को "सीधे सैन्य मदद" देने की घोषणा की. इस घोषणा के बाद फ्रेंड्स ऑफ़ सीरिया की ये पहली बैठक खासी अहम मानी जा रही है.

अमरीका का कहना है कि उसने ये फैसला सीरियाई सरकार द्वारा छोटे स्तर पर रासायनिक हथियारों के इस्तेमाल का सबूत मिलने के बाद लिया.

फ्रेंड्स ऑफ सीरिया का गठन संयुक्त राष्ट्र में सीरिया संबंधी प्रस्तावों को चीन और रूस द्वारा रोके जाने के बाद किया गया था.

शनिवार को क़तर के प्रधानमंत्री ने कहा, "संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सहमति न बन पाना हमें आगे बढ़ने से नहीं रोक पाएगा."

उन्होंने कहा कि विद्रोहियों के लिए सिर्फ़ नैतिक समर्थन ही काफ़ी नहीं है. प्रधानमंत्री अल-थानी ने आगे कहा, "ज़मीनी स्तर पर एक संतुलन बनाना ज़रूरी है ताकि सीरियाई सरकार के साथ बातचीत के दरवाज़े खुले रहें."

लेकिन समूह के वक्तव्य में समर्थन के बारे में विस्तृत जानकारी नहीं दी गई है.

शांति सम्मेलन की कोशिशें

Image caption सीरिया में विद्रोहियों का कहना है कि उन्होंने एलैप्पो शहर में नई कार्यवाई शुरु की है.

उधर अमरीकी विदेश मंत्री जॉन कैरी ने फिर दोहराया कि सीरियाई सरकार ने रासायनिक हथियारों का इस्तेमाल कर 'लक्ष्मणरेखा' पार की है.

लेकिन उन्होंने ये भी कहा कि विद्रोहियों को सैन्य मदद देने का फैसला सीरिया के मामले का "सैन्य हल ढूंढने के लिए नहीं" बल्कि संघर्ष ख़त्म करने के लिए बातचीत में विद्रोहियों को ज़्यादा ताक़त देने के लिए लिया गया था.

जॉन कैरी ने ये भी कहा कि फ्रेड्स ऑफ सीरिया अब भी जिनेवा में सीरियाई सरकार और विपक्ष के बीच शांति सम्मेलन कराने की कोशिश कर रहा है.

लेकिन उन्होंने कहा कि सीरिया के राष्ट्रपति बशर अल असद ने शांति सम्मेलन कराने की कोशिशों का जवाब ईरानी और हिज़बुल्लाह लड़ाकों को युद्ध में उतार कर दिया. कैरी ने कहा, "ये बहुत ही ख़तरनाक कदम है. हिज़बुल्लाह को न सिर्फ़ ईरान का समर्थन है बल्कि वो एक आंतकवादी संगठन भी है."

वहीं ब्रिटेन के विदेश मंत्री विलियम हेग ने कहा, "हम इस बारे में बात करते रहे हैं कि विपक्ष की कैसे मदद की जा सकती है, हम कैसे ज़िंदगियां बचा सकते हैं. ये करने का अलग-अलग देशों का अलग-अलग तरीका होगा. सीरिया में निर्दोष लोगों की जान बचाने के लिए जितना हो सके सहयोग और तालमेल करना है."

मगर विलियम हेग ने फिर से साफ़ किया कि विद्रोहियों को हथियार देने के बारे में ब्रितानी सरकार ने कोई फैसला नहीं लिया है.

नए हथियार

हाल के दिनों में सीरिया गृह युद्ध में विद्रोहियों को काफ़ी नुकसान हुआ है. लेकिन शुक्रवार को उन्होंने कहा कि उन्हें नए हथियार मिले हैं जिनसे गृह युद्ध में "बदलाव" आ सकते हैं.

विद्रोही गुट फ्री सीरियन आर्मी के एक प्रवक्ता ने कहा कि ये हथियार अमरीका ने नहीं दिए हैं.

प्रवक्ता ने एएफपी समाचार एजेंसी को बताया, "हमें नए तरह के हथियार मिले हैं जिनमें वो हथियार भी हैं जिनकी हमने मांग की थी और हम मानते हैं कि इनसे लड़ाई की दिशा बदल जाएगी."

वहीं ख़बरों के मुताबिक शनिवार को सीरियाई सुरक्षाबलों ने राजधानी दमिश्क के उत्तर में विद्रोहियों के ठिकानों पर हमले तेज़ कर दिए.

विपक्ष का समर्थन कर रही संस्था 'सीरियन ऑब्ज़रवेट्री फॉर ह्यूमन राइट्स' ने कार्यकर्ताओं के हवाले से बताया कि कई इलाकों में भारी गोलीबारी हुई है.

लेकिन विद्रोहियों का कहना था कि उन्होंने भी सीरिया के सबसे बड़े शहर एलैप्पो में नए सिरे से हमला किया है. एलैप्पो विद्रोहियों का आखिरी गढ़ है. वे शहर के पश्चिम में सरकारी कब्ज़े वाले इलाकों पर कब्ज़ा करने की कोशिश कर रहे हैं.

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