अमरीका जासूसों के टारगेट पर थे ‘फ्रांस और जर्मनी’

स्नोडेन
Image caption स्नोडेन के खुलासों ने अमरीका की नींद उड़ा दी है

जर्मन पत्रिका ‘डेयर श्पीगल’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक अमरीकी ख़ुफ़िया एजेंसियां यूरोपीय संघ के अहम दफ़्तरों की जासूसी कर रही थीं.

माना जा रहा है कि सीआईए के पूर्व कर्मचारी एडवर्ड स्नोडेन के हवाले से ये जानकारी लीक हुई है. स्नोडेन अभी अनरीका से फ़रार चल रहे हैं.

‘गार्डियन’ अख़बार के अनुसार अमरीका में फ्रांसीसी, जर्मन और इतालवी दूतावासों को टारगेट माना गया.

‘डेयर श्पीगल’ ने दावा किया है कि उसे ये दस्तावेज़ राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी (एनएसए) से हासिल हुए हैं. पत्रिका ने दस्तावेज़ के हवाले से कहा कि एनएसए ने वॉशिंगटन में यूरोपीय संघ के आंतरिक कम्प्यूटर नेटवर्क और न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र में स्थित ऑफिस की जासूसी की थी.

दस्तावेज़ में ईयू को कथित रूप से ‘टारगेट’ बताया गया है.

जासूसी

दूसरी तरफ ‘गार्डियन’ ने लीक हुए एक दस्तावेज़ के हवाले से कहा है कि 38 दूतावासों और मिशनों की जासूसी की गई थी.

ब्रिटिश अख़बार के मुताबिक इनमें फ्रांस, इटली और ग्रीस सहित अमरीका के कई सहयोगी देशों जैसे जापान, मैक्सिको, दक्षिण कोरिया, भारत और तुर्की के दूतावास भी शामिल थे.

बीबीसी संवाददाता स्टीफन इवांस का कहना है कि ये साफ नहीं है कि अमरीकी ख़ुफ़िया एजेंसियों को क्या सूचना हाथ लगी लेकिन व्यापार और सैन्य मामलों में यूरोपीय संघ के देशों के रुख़ के बारे में मिली जानकारी उन लोगों के काम आ सकती है जो अमरीका और यूरोपीय सरकारों के बीच वार्ता में शामिल हैं.

उन्होंने कहा कि यूरोपीय संघ की चिंता उन दावों को लेकर है जिनमें कहा गया है कि अमरीकी सुरक्षा एजेंसियों ने ब्रसेल्स में संघ के मंत्रियों के फ़ोन टेप किए और इंटरनेट को हैक किया.

अमरीका के साथ व्यापारिक वार्ता में अहम भूमिका निभाने वाले यूरोपीय आयोग ने अमरीका से 'डेयर श्पीगल' की रिपोर्ट की जांच करने को कहा है.

सफ़ाई

कमीशन ने एक बयान में कहा, “हमने वॉशिंगटन और ब्रसेल्स में अमरीकी अधिकारियों से संपर्क किया है और मीडिया में आई रिपोर्ट के बारे में सफ़ाई मांगी है. उन्होंने कहा है कि वे इस रिपोर्ट की प्रामाणिकता की जांच कर रहे हैं और सारे तथ्य जुटाने के बाद वे हमसे संपर्क करेंगे.”

Image caption मार्टिन शुल्ट्ज ने कहा कि अमरीका को यूरोपीय संघ के साथ दुश्मनों जैसा व्यवहार नहीं करना चाहिए

अमरीकी सरकार ने इन आरोपों पर अभी तक कोई सार्वजनिक बयान नहीं दिया है.

फ्रांस और जर्मनी ने भी इस बारे में अमरीकी सरकार से सफाई मांगी है.

फ्रांस के विदेश मंत्री लौरें फेबिया ने कहा कि अगर डेर स्पीगल में किए गए दावे सही हैं तो अमरीका की ऐसी गतिविधि कतई स्वीकार्य नहीं है.

शीत युद्ध की याद

जर्मनी की क़ानून मंत्री सबाइने लियूथेसर श्नारेनबर्गर ने कहा कि अमरीका का कथित व्यवहार शीत युद्ध की याद दिलाता है.

श्नारेनबर्गर के हवाले से समाचार एजेंसी एपी ने कहा, “अगर मीडिया रिपोर्ट सही है तो ये व्यवहार शीत युद्ध के दौरान दुश्मनों द्वारा की जाने वाली हरकतों की याद दिलाता है.”

उन्होंने कहा, “ये बात समझ से परे है कि अमरीका में हमारे साथी यूरोपीय लोगों को दुश्मन मानते हैं.”

इस बीच यूरोपीय संसद के अध्यक्ष मार्टिन शूल्ट्ज़ ने कहा कि वो इन आरोपों से बेहद चिंतित और सदमे में हैं. उन्होंने कहा कि इस तरह की हरकतों से यूरोपीय संघ और अमरीका के रिश्ते प्रभावित हो सकते हैं.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉइड ऐप के लिए आप यहाँ क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फेसबुक या ट्विटर पर भी फॉलो कर सकते हैं)

संबंधित समाचार