सऊदी अरब: फ़ेसबुक ने सात लोगों को पहुंचाया जेल

फ़ेसबुक
Image caption इसके पहले दो महिलाओं को एक महिला की मदद करने के आरोप में गिरफ़्तार किया गया था

सऊदी अरब की एक अदालत ने फ़ेसबुक के ज़रिए लोगों को प्रदर्शन करने के लिए भड़काने के आरोप में सात कार्यकर्ताओं को पांच से दस साल तक की सजा सुनाई है.

मानवाधिकार संगठन ह्यूमन राइट्स वॉच के मुताबिक़ इन लोगों को पिछले साल सितंबर में गिरफ़्तार किया गया था और अप्रैल में इनके ख़िलाफ़ मुक़दमा शुरू हुआ था.

इन पर अपनी ऑनलाइन पोस्ट के जरिए लोगों को प्रदर्शन के लिए भड़काने का आरोप लगाया गया, हालांकि इन लोगों पर सीधे तौर पर प्रदर्शन में शामिल होने का आरोप नहीं था.

राजनीतिक असंतोष

इस फैसले को सऊदी अरब में राजनीतिक असंतोष के ख़िलाफ़ ताज़ा क़दम के रूप में देखा जा रहा है.

ह्यूमन राइट्स वॉच ने कहा है कि मुक़दमे की सुनवाई एक आतंकवाद विरोधी अदालत में हुई.

इस मामले में सबसे अधिक दस साल की सज़ा उस व्यक्ति को दी गई है जिन्होंने फ़ेसबुक पर दो समूह बनाए थे. उन्होंने इसे विरोध करने की बेहतर तकनीक बताया था.

ह्यूमन राइट्स वॉच ने कहा है कि जिन लोगों को सज़ा सुनाई गई है, उन लोगों ने फ़ेसबुक पर शिया मौलवी तवाफ़िक अल अमर के समर्थन में पोस्ट लिखने की बात स्वीकार की है. तवाफ़िक अल आमेर को फ़रवरी 2011 में संवैधानिक राजशाही की मांग करने के बाद गिरफ़्तार कर लिया गया था.

उनकी गिरफ्तारी के बाद देश में सरकार विरोधी प्रदर्शन हुए. इससे पहले तेल संसाधनों से मालामाल सऊदी अरब के पूर्वी इलाकों में भी सरकार के ख़िलाफ़ आवाजें उठीं.

ह्यूमन राइट्स वॉच का कहना है कि फेसबुक के जरिए लोगों को उकसाने के आरोप में सातों कार्यकर्ताओं को 24 जून को सज़ा सुनाई गई.

मानवाधिकार संगठन के अनुसार जिन लोगों को सज़ा सुनाई गई है, उनमें से कुछ ने आरोप लगाया है कि उन्हें अपराध स्वीकार करने के लिए प्रताड़ित किया गया.

संवेदनशील मामला

Image caption शिया मौलवी तवाफ़िक अल आमेर को संवैधानिक राजतंत्र की मांग करने पर गिरफ़्तार कर लिया गया था

बीबीसी के मध्य-पूर्व के मामलों के संपादक सैबस्टियन अशर के अनुसार इस मामले के दो बिंदु महत्वपूर्ण हैं जिनके प्रति सऊदी अधिकारी बहुत संवेदनशील थे. एक तो ऑनलाइन राजनीतिक आलोचना और दूसरा देश के पूर्वी हिस्से में अल्पसंख्यक शियाओं का प्रदर्शन.

कई सऊदी मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को हाल में ही क़ैद किया गया है. इनमें एक महिला को अपने पति के ख़िलाफ़ भड़काने के आरोप में दो महिलाओं को जून के शुरू में जेल भेजा गया था. इन महिलाओं ने एक कनाडाई महिला की मदद करने की कोशिश की जिसने अपने सऊदी पति के खिलाफ उत्पीड़न की शिकायत दर्ज कराई थी.

ह्यूमन राइट्स वॉच ने यूरोपीय संघ से कहा है कि वो सऊदी अरब में सात लोगों को हुई सजाओं का विरोध करे. रविवार को यूरोपीय संघ और खाड़ी देशों की बैठक होने वाली है.

इस मानवाधिकार संगठन के मध्य-पूर्व मामलों के निदेशक जो स्ट्रोक ने कहा है,''फ़ेसबुक पर पोस्ट लिखने के आरोप में लोगों को कई साल के लिए जेल भेजने से यह संदेश मिलता है कि सऊदी अरब में बोलने का कोई सुरक्षित रास्ता नहीं है, यहाँ तक कि ऑनलाइन सोशल नेटवर्क पर भी नहीं.''

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