मिस्र: मुर्सी को सेना की समय सीमा ख़त्म हुई

मिश्र
Image caption देर रात आवाम से शांति की अपील करते हुए राष्ट्रपति मुर्सी ने कहा कि वे मिश्र के लिए अपनी जान दे सकते हैं.

मिस्र में मौजूदा राजनीतिक संकट के समाधान के लिए राष्ट्रपति मोहम्मद मुर्सी और विपक्ष को दी गई सेना की समय सीमा समाप्त हो गई है.

राष्ट्रपति के हज़ारों विरोधी और समर्थक एक बार फिर काहिरा और अन्य जगहों पर प्रदर्शन कर रहे हैं.

सेना ने चेतावनी दी थी कि मुर्सी को 'लोगों की माँग माननी चाहिए' या फिर सैन्य हस्तक्षेप के लिए तैयार रहें. मुर्सी ने वो चेतावनी ख़ारिज कर दी है.

उनका कहना है कि वह मिस्र के वैध नेता हैं और उन्हें इस्तीफ़ा देने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता.

देश भर में रात भर विरोध प्रदर्शन और झड़पें होती रहीं. काहिरा विश्वविद्यालय में हुए प्रदर्शन में कम से कम 16 मुर्सी समर्थकों के मारे जाने की ख़बर है.

उनके विरोधियों का कहना है कि वह और उनकी मुस्लिम ब्रदरहुड पार्टी देश पर एक इस्लामी एजेंडा थोप रहे हैं, जिसके चलते उन्हें इस्तीफ़ा दे देना चाहिए.

वहीं मुस्लिम ब्रदरहुड का कहना है कि सेना की कार्रवाई तख़्ता पलट जैसी है.

मंगलवार शाम को टीवी से प्रसारित हुए एक भाषण में मुर्सी ने कहा कि वह सांविधानिक वैधता बचाने के लिए अपनी ज़िंदग़ी भी दे देंगे. साथ ही उन्होंने इस असंतोष की वजह सत्ता से हटाए गए नेता होस्नी मुबारक शासन के बचे-खुचे हिस्से और भ्रष्टाचार बताई है.

'आतंकवादी और मूर्ख'

मंगलवार को जारी एक बयान में सेना ने संकल्प लिया कि "किसी आतंकवादी, चरमपंथी या मूर्ख से मिस्र और उसके लोगों को बचाने के लिए हम अपना ख़ून भी बहा देंगे."

मिस्र में लगातार तीसरे दिन भी प्रदर्शन जारी हैं और हज़ारों लोग तहरीर चौक पर जमा हैं. राष्ट्रपति मोहम्मद मुर्सी को सत्ता से हटाने की मांग ज़ोर पकड़ रही है. इस बीच सत्ताधारी और विपक्ष के गुटों के बीच झड़पों में सात लोगों के मारे जाने की खबर है.

विपक्ष ने मुर्सी को पद से हटने के लिए जो समयसीमा तय की थी, वो पूरी हो चुकी है. राष्ट्रपति मुर्सी का कहना है कि उन्होंने विपक्ष के समूहों को विचार-विमर्श के लिए बुलाया था लेकिन उन्होंने सहयोग नहीं दिया. राष्ट्रपति के समर्थकों का कहना है कि मिस्र में मुद्दों के समाधान और स्थिरता के लिए राष्ट्रपति मुर्सी को अपना कार्यकाल पूरा करना चाहिए.

सेना का 'रोडमैप तैयार'

Image caption काहिरा और पूरे मिश्र में विरोध करने वालों की संख्या पहले कभी इतनी नहीं थी.

आंदोलनकारियों ने राष्ट्रपति मुर्सी को स्थानीय समय के अनुसार मंगलवार शाम पांच बजे तक की मोहलत दी थी और कहा था कि अगर मुर्सी सत्ता से न हटे तो उनके खिलाफ सविनय अवज्ञा आंदोलन होगा. ये चेतावनी सोमवार को जारी की गई थी.

इस बीच सेना ने बीबीसी को बताया है कि उसने देश के भविष्य का ख़ाका तैयार कर लिया है.

भविष्य के 'रोडमैप' के तहत जल्द ही राष्ट्रपति चुनाव कराना प्रमुखता होगी. इसके अलावा नए संविधान को निलंबित कर संसद को भंग कर दिया जाएगा.

मुर्सी से हटने की मांग

Image caption तहरीर स्क्वेयर पर जमा प्रदर्शनकारी मुर्सी के इस्तीफ़े की मांग कर रहे हैं.

तहरीर चौक पर मौजूद मुर्सी विरोधी आंदोलनकारियों ने तुरंत सरकार को भंग करने की मांग की है. एक स्थानीय नागरिक अमानी गमील ने कहा, "हम सभी टूट चुके हैं. हमारी ज़िदगी नरक बन गई हैं. किसी को कोई सुरक्षा हासिल नहीं है. उनका हर चीज़ पर नियंत्रण है, हमारे काम पर, सड़कों पर, यातायात पर. उन्होंने हमें किनारे कर दिया है, हमें हमारा वतन वापस चाहिए."

इससे पहले मिस्र की फ़ौज ने कहा था कि अगर राजनीतिक नेतृत्व ने 'जनता की मांग' न मानी तो 48 घंटे बाद सेना खुद हस्तक्षेप करेगी और देश के भविष्य का ख़ाका तैयार करेगी.

राष्ट्रपति मुर्सी ने फ़ौज के इस अल्टीमेटम को ख़ारिज करते हुए कहा था कि इससे अनावश्यक भ्रम पैदा होगा. इस पर फ़ौज ने कहा था कि उनका उद्देश्य तख्तापलट नहीं बल्कि राजनीतिक दलों में पनपे तनाव को खत्म करना है.

मंगलवार को राष्ट्रपति मुर्सी ने सेना प्रमुख जनरल अब्देल फतह अल सीसी से भी मुलाकात की. इस दौरान प्रधानमंत्री भी मौजूद थे. मुलाकात का ब्यौरा जारी नहीं किया गया है.

इस बीच सरकारी समाचार एजेंसी मेना के मुताबिक विदेश मंत्री मोहम्मद कामेल अम्र ने इस्तीफ़ा दे दिया है. अगर उनका इस्तीफ़ा मंज़ूर हुआ तो वो पद छोड़ने वाले छठे मंत्री होंगे. उनके अलावा मंत्रिमंडल के प्रवक्ता के इस्तीफ़े की भी खबरें हैं.

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयुक्त ने राष्ट्रपति मुर्सी से अपील की है कि वह राजनीतिक संकट खत्म करने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर गंभीर बातचीत शुरू करें.

'तख़्तापलट बर्दाश्त नहीं'

उधर राष्ट्रपति समर्थकों का कहना है कि मुर्सी को केवल चुनाव के जरिए ही हटाया जा सकता है. प्रदर्शनकारी तमीम असनान के मुताबिक वो राष्ट्रपति पद की वैधानिकता में यकीन रखते हैं और सैन्य तख्तापलट बर्दाश्त नहीं करेंगे. अगर किसी को हटाना ज़रूरी है इसके लिए चुनाव का रास्ता ही इख्तियार किया जाना चाहिए.

Image caption 'रिबेल' आंदोलनकारियों का दावा है कि मुर्सी के खिलाफ अभियान के तहत एक याचिका पर 20 करोड़ लोगों ने हस्ताक्षर किया है.

राष्ट्रपति मुर्सी के विरोधियों का दावा है कि जल्द चुनाव की मांग की याचिका पर दो करोड़ बीस लाख लोगों ने हस्ताक्षर किए हैं.

तहरीर चौक पर मौजूद बीबीसी संवाददाता अलीम मक़बूल ने बताया है कि कई प्रदर्शनकारियों का मानना है कि राष्ट्रपति मुर्सी ने उन्हें धोखा दिया है.

वहीं, विपक्षी गुट नेशनल साल्वेशन फ़्रंट के प्रवक्ता खलील दाऊद ने चेतावनी दी है कि राष्ट्रपति के समर्थक हिंसा का सहारा न लें.

खलील दाऊद ने कहा है, "हम उन्हें हटाना नहीं चाहते और न ही हम सैन्य तख़्तापलट चाहते हैं. हम चाहते हैं कि दोबारा चुनाव कराए जाएं. अगर आप पूरे मिस्र के राष्ट्रपति बनना चाहते हैं तो आपको वादे निभाने होंगे केवल मुस्लिम ब्रदरहुड का राष्ट्रपति बनने से काम नहीं चलेगा."

मुर्सी ने रविवार को राष्ट्रपति पद पर एक साल पूरा कर लिया. और इसी के साथ काहिरा में प्रदर्शन शुरू हो गए थे और रविवार को राष्ट्रपति मुर्सी पार्टी की मुस्लिम ब्रदरहुड के मुख्यालय पर विरोधियों ने हमला किया था, जिसमें 8 लोगों की मौत हो गई थी.

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