मिस्र: मुस्लिम ब्रदरहुड के बड़े नेता गिरफ़्तार

  • 5 जुलाई 2013

मिस्र की सेना ने मुस्लिम ब्रदरहुड को शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन की इजाज़त दे दी है. सेना ने कहा है कि वह शांतिपूर्वक विरोध-प्रदर्शन करने के अधिकार की रक्षा करेगी.

मुस्लिम ब्रदरहुड के शुक्रवार को शांतिपूर्वक विरोध-प्रदर्शन करने की संभावना है.

मिस्र की सेना ने राष्ट्रपति मोहम्मद मुर्सी को अपदस्थ करने के बाद मुस्लिम ब्रदरहुड के नेताओं के ख़िलाफ अभियान चलाया है.

मुस्लिम संगठन ब्रदरहुड के सदस्य पूर्व राष्ट्रपति मुर्सी इस समय सेना की हिरासत में हैं, ब्रदरहुड के वरिष्ठ नेताओं को भी पकड़ा जा रहा है. सैकड़ों मुस्लिम ब्रदरहुड के नेताओं के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी कर दिए गए हैं.

मुस्लिम ब्रदरहुड के प्रवक्ता गेहाद अल-हद्दाद ने बीबीसी को बताया कि अपदस्थ राष्ट्रपति को घर में ही नज़रबंद कर दिया गया है और “राष्ट्रपति की पूरी टीम” को कैद कर लिया गया है.

मुर्सी के वरिष्ठ साथी हद्दाद के पिता एसाम अल-हद्दाद और अभियान की राजनीतिक शाखा के प्रमुख साद अल-कतानी भी कैद लोगों में शामिल हैं.

(मिस्र में तख़्तापलट, मुर्सी नज़रबंद)

अंतरिम राष्ट्रपति अदली मंसूर

इस बीच, मिस्र के अंतरिम राष्ट्रपति अदली मंसूर ने देश में सभी समूहों से अपील की है कि वह देश की नई सरकार में शामिल हों.

मिस्र की संवैधानिक न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश अदली मंसूर ने शपथ ग्रहण के बाद मिस्री जनता से एक काफी लोकतंत्र का वादा किया, जिसमें पूर्व राष्ट्रपति मुर्सी के मुस्लिम ब्रदरहुड भी शामिल होगी.

अदली मंसूर ने सेना और मिस्र के लोगों की सराहना की और कहा कि “शासक की अराधना” का वक्त ख़त्म हो जाना चाहिए.

उन्होंने 'जनता की वास्तविक इच्छा 'के आधार पर चुनाव कराने का वादा किया.

लेकिन ब्रदरहुड और उसकी राजनीतिक इकाई फ्रीडम एंड जस्टिस पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि वो नई सत्ता के साथ काम नहीं करेंगे, लेकिन अपने समर्थकों को हथियार उठाने के लिए प्रोत्साहित भी नहीं करेंगे.

ब्रदरहुड का कहना है कि वो शुक्रवार को शांतिपूर्वक प्रदर्शन करेंगे.

अंतरराष्ट्रीय चिंताए

अमरीका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने मिस्र की सेना की ओर से सरकार को उखाड़ फेंकने और संविधान को निलंबित करने को बेहद गंभीरता से लिया है.

राष्ट्रपति ने कहा कि अमरीका मिस्र को दी जाने वाली सहायता पर पुनर्विचार करेगा.

राष्ट्रपति ओबामा ने जोर दिया है कि सेना मिस्र के लोगों का अधिकारों का सम्मान करे और सभी लोगों को अपनी बात कहने की स्वतंत्रता हो.

उधर ब्रिटेन के विदेश मंत्री विलियम हेग ने कहा कि ब्रिटेन सरकार मिस्र में सैन्य हस्तक्षेप का समर्थन नहीं करती है. विलियम हेग ने सैन्य तख्तापलट के ज़रिए राष्ट्रपति मुर्सी को उखाड़ फेंकने के कदम की निंदा नहीं की है.

मुस्लिम ब्रदरहुड ने मुर्सी सरकार की बर्खास्तगी को तख्ता पलट की संज्ञा दी है.

सेना का तख्तापलट

जैसे ही सेना में संविधान स्थगित करने और नए चुनाव करवाने की घोषणा की, मुर्सी विरोधी रात को ही काहिरा के तहरीर चौक पर पटाखे फोड़कर और कारों के हॉर्न बजा कर जश्न मनाने लगे.

राष्ट्रीय टेलीविज़न पर जारी अपने संदेश में सेना प्रमुख जनरल अब्देल फ़तह अल-सीसी ने कहा कि अंतरिम सरकार नए राष्ट्रपति का चुनाव होने तक काम करेगी.

जनरल सीसी ने कहा कि मिस्र के पहले स्वतंत्र रूप से चुने गए नेता “लोगों की आकांक्षाओं की पूर्ति करने में विफल रहे हैं.”

जनरल सीसी ने कहा कि सेना मिस्र के लोगों की पुकार को अनसुना नहीं कर सकती.

जनरल सीसी के संबोधन के तुरंत बाद सैन्य वाहन शहर भर में फैल गए थे. लेकिन बुधवार रात को ही मुर्सी समर्थकों और सुरक्षा बलों के बीच काहिरा और एलेक्ज़ेंड्रिया में संघर्ष शुरू हो गया, जिसमें कई लोग मारे गए.

हिंसक संघर्ष

रविवार से जारी तनाव के चलते अब तक करीब 50 लोगों की मौत हो चुकी है. देश के पहले लोकतान्त्रिक तरीके से चुने गए राष्ट्रपति मोहम्मद मुर्सी के खिलाफ नवम्बर 2012 से ही जनता में असंतोष बन रहा था.

इससे पहले मुर्सी को दी गई सेना की चेतावनी बुधवार दोपहर समाप्त हो गई थी. सेना ने कहा था कि मुर्सी 'लोगों की माँगें मानें' या सैन्य हस्तक्षेप के लिए तैयार रहें.

प्रदर्शनकारी राष्ट्रपति और मुस्लिम ब्रदरहुड पर देश पर इस्लामी कार्यक्रम थोपने और मिस्र की आर्थिक दिक्कतों को दूर कर पाने में विफल रहने का आरोप लगा रहे थे.

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