किसी भी मुल्क में तख़्तापलट करने की विधि

किसी भी मुल्क में तख़्तापलट करने के कुछ कायदे होते हैं, तख़्तापलट की घोषणा करते वक़्त इन कायदों का आम तौर पर पालन किया जाता है.

सबसे पहले तो किसी सख़्त से जनरल को एकदम कड़क, कलफ़ लगी , इस्त्री की हुई वर्दी में आ कर बड़े अनिच्छुक भाव से इस बात की घोषणा करना होती है कि फ़ौज को देश को बचाने के लिए यह काम करने को मजबूर होना पड़ा है.

बीती तीन जुलाई को मिस्र में जनरल अल सीसी ने यही किया. जनरल सीसी ने भी उसी पटकथा का अनुसरण किया जो लगभग 40 सालों से चली आ रही है.

तख़्तापलट करने के लिए सबसे पहले कड़क फ़ौजी वर्दी के अलावा आम तौर पर जनरल अपनी छाती पर ढेर सारे मैडलों को लगा कर जाना पसंद करते हैं. इसके अलावा एक और चीज़ जो बेहद ज़रूरी होती है वो है एक ठोस बड़ी सी टेबल या फिर एक पॉडियम जिस पर खड़ा हो कर घोषणा की जाए.

घोषणा के वक्त धूप के चश्मे का होना लाजिमी नहीं है, आप लगा भी सकते हैं और छोड़ भी सकते हैं. लेकिन आप कैसे दिख रहे हैं इस बात पर ध्यान देना बेहद ज़रूरी है आखिरकार पूरी दुनिया आपको देखेगी और आपके देश के लोगों के मन में वो छवी अंकित हो जाएगी.

भाषण

Image caption मिस्र में जनरल अल-सीसी ने मुर्सी सरकार को अपदस्थ करने की घोषणा की

पहनावे के बाद सबसे अहम चीज़ है आपके अल्फ़ाज़ . तख़्तापलट की घोषणा के वक़्त देश को लगना चाहिए कि ऐसा केवल देशभक्ति के कारण किया जा रहा है. तख़्तापलट को कभी तख़्तापलट नहीं कहा जा सकता वरना आप गुंडे अपराधी लगेंगे.

जनरल आम तौर पर अपनी कार्रवाई को "हस्तक्षेप" कहते हैं.

12 अक्टूबर 1999 को पाकिस्तान के तत्कालीन सेनाध्यक्ष जनरल परवेज़ मुशर्रफ ने जब प्रधानमन्त्री नवाज़ शरीफ़ की सरकार को गिराया तो उन्होने भी लगभग इस पटकथा का पालन किया .

आम दिनों से हटकर उन्होंने देश को संबोधित करते वक़्त उस तरह के कपडे पहने थे जिन्हें सीमा पर तैनात सिपाही पहनते हैं. चश्मा पहने एक ठोस बड़ी सी टेबल के पीछे से बोलते हुए जनरल मुशर्रफ ने कहा, "आपकी फ़ौज ने कभी आपको निराश नहीं किया है, आपकी फ़ौज देश की संप्रभुता और अखंडता को बचाने के लिए अपने खून की अंतिम बूँद तक संघर्ष करेगी."

चिली में सितंबर 1973 में जनरल पिनोशे और उनके साथी जनरलों को तख़्तापलट के बाद संबोधन के ऊँचे मानदंड रचने का श्रेय जाता है. पिनोशे और उनके साथ तीन जनरल एक साथ अपनी वर्दियों में एक बड़ी सी टेबल के पीछे बैठ कर देश को अपने फ़ैसले के बारे में बाताया था.

Image caption चिली में जनरल पिनोशे और उनके साथी जनरलों ने देशभक्ति के नाम पर तख़्तापलट किया था

उन्होंने कहा " चिली की सेनाओं ने देशभक्ति के ज़ज्बे के साथ देश को अव्यवस्था से बचाने के लिए यह कार्रवाई की है."

अतिमहत्वपूर्ण शब्द

उनके दूसरे साथी गुस्तावो लेह ने "जनसमर्थन बलिदान और देशभक्ति जैसे शब्दों से लबरेज़ एक वक्तव्य" दिया. दुनिया भर में कई जनरलों ने आने वाले सालों में अपनी बात जनता को समझाने के लिए इस तरह के शब्दों का भरपूर सहारा लिया.

जिस तरह से चिली के जनरल देश को एकता का संदेश देने के लिए एक साथ दुनिया के सामने आये थे ठीक उसी तरह से मिस्र में जनरल सीसी ने राष्ट्रपति मुर्सी को हटाने की घोषणा की तो वो भी अकेले नहीं आये थे. उनके साथ उनके देश के कई नेता मौजूद थे.

वैसे जनरल पिनोशे ने आने वाले समय में अकेले ही अपने देश पर राज किया और उनके कार्यकाल में तीन हज़ार से ज़्यादा लोगों की हत्याएं हुईं .

Image caption पाकिस्तान में जनरल परवेज़ मुशर्रफ़ ने नवाज़ शरीफ़ सरकार को बर्खास्त कर दिया था

कई जनरल इस तरह की घोषणा अकेले 1999 में पाकिस्तान के जनरल परवेज़ मुशर्रफ, या 1980 में तुर्की के जनरल केनन एवरन.

इन दोनों जनरलों ने तख़्तापलट की बाकी पटकथा का ठीक ढंग से पालन किया था.

वैसे तख़्ता पलट की इस विधि का पालन करने का अर्थ यह नहीं तख़्तापलट सफल हो ही जाएगा.

असफ़ल तख़्तापलट

साल 1981 में स्पेन के सिविल गार्ड के अधिकारीयों ने देश की संसद पर कब्ज़ा कर लिया. उन्हें उम्मीद थी कि देश की अन्य सेनाएँ उनके समर्थन में उठ खड़ी होंगीं.

लेकिन ऐसा हुआ नहीं.

Image caption स्पेन के सिविल गार्ड के अधिकारियों ने संसद पर कब्ज़ा कर लिया था लेकिन तख़्ता पलट की उनकी कोशिश असफल रही

देश के सम्राट जुआन कार्लोस ने इस कोशिश को बेकार कर दिया. बहुत रात को अपनी सर्वोच्च सेनापति वाली फ़ौजी वर्दी में वो देश के सामने टीवी पर आए. कार्लोस ने कहा " राजशाही जो कि इस देश में स्थायित्व और एकता का प्रतीक है वो किसी कीमत पर इस तरह के किसी भी कदम को बर्दाश्त नहीं कर सकती जो कि जनता के द्वारा तय किए गए लोकतान्त्रिक रास्ते को रोकता हो."

सम्राट कार्लोस के इस कदम ने स्पेन में लोकतंत्र को बचा लिया. वैसे तीस साल बाद आज भी सम्राट का फ़ौजी वर्दी में दिया गया वो भाषण उनके पूरे कार्यकाल का सबसे निर्याणक चित्र बना हुआ है.

फ़रवरी 1992 में वेनेज़ुएला में लेफ्टिनेंट कर्नल ह्यूगो चावेज़ ने तख़्तापलट की असफल कोशिश की. चावेज़ ने लेकिन किसी तरह इस बात की घोषणा भी टीवी पर करने में सफलता पाई कि वो असफल रहे हैं. उन्होंने कहा " साथियों फ़िलवक्त हमारा प्रयास असफल रहा है. लेकिन आगे और मौके आएँगे जब देश की जनता का बेहतर भविष्य सुनिश्चित किया जा सकेगा".

वक्त का फेर

Image caption वेनेज़ुएला का राष्ट्रपति बनने से छह साल पहले ह्यूगो चावेज़ ने तख़्ता पलट की असफल कोशिश की थी

यह भाषण उनके बहुत काम आया और छह साल बाद वो देश के राष्ट्रपति चुने गए. चावेज़ 2013 में अपने मौत तक देश के राष्ट्रपति बने रहे.

तख़्तापलट के बाद जो लोग अपदस्थ होते हैं उनका इतिहास भी अलग अलग रहा है . जैसे मिस्र के राष्ट्रपति मुर्सी ने अपनी गिरफ्तारी के बाद एक संदेश भेजने में कामयाब रहे जिसमें उन्होंने फौजी कारवाई की निंदा की . वो सन्देश जल्द ही हर तरफ से गायब हो गया.

ठीक इसी तरह से पाकिस्तान में वक़्त का पहिया पलटा और नवाज़ शरीफ़ देश के फिर प्रधानमंत्री बने गए वहीँ मुशर्रफ जेल में हैं.

चिली में जनरल पिनोशे द्वारा हटाये गए सल्वाडोर एलेन्द, ने अपने आप को हटाये जाने की घोषणा करते हुए कहा था " मुझे चिली के भविष्य पर भरोसा है, कोई और लोग आ कर देश की तारिख में लगे इस काले दाग को धोएँगे, रस्ते फिर खुलेंगे और आज़ाद लोग एक अच्छे समाज को बनाने के लिए फिर चल पड़ेंगे."

इस भाषण के बाद वो मार दिए गए लेकिन उनके शब्द आज भी चिली के राष्ट्रपति भवन के बाहर उनकी मूर्ती के नीचे खुदे हुए हैं .

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