रोबोट जो करें अरबों का कारोबार, दें करोड़ो के झटके

शेयर ट्रेडर
Image caption अब इन शेयर ट्रेडरों के दिन लदने वाले हैं.

“सीधी-सी बात है - मनुष्य गति में मशीनों का मुकाबला नहीं कर सकते”

ऐसा कहने वाले जॉन कोट्स 10 साल पहले वॉल स्ट्रीट पर शेयर की ख़रीद फ़रोख़्त करते थे. अब वो केम्ब्रिज विश्वविद्यालय में न्यूरो साइंटिस्ट हैं. कोट्स शेयर ट्रेडरों के हारमोंस का अध्ययन करते हैं.

वे कहते हैं, “मसलन अगर आप माउस से ‘बॉक्स’ पर क्लिक करके ट्रेड करते हैं तो आपका 'एक क्लिक या सौदा' सौ से 120 मिलीसैंकड्स में होगा. लेकिन मौजूदा मशीनें यही काम सैंकड के दस लाख-वें हिस्से में कर रही हैं. ”

ये ‘बॉक्स’ दरअसल रोबोट ट्रेडर हैं. ऐसे कंप्यूटर जो शेयर ख़रीदने या बेचने का फ़ैसला करते हैं और ये बॉक्स मनुष्य से हज़ारों गुणा तेज़ी से काम करते हैं.

दुनिया भर में ऐसी ट्रेडिंग का प्रचलन बढ़ रहा है. अब आपको कुछ शेयर बाज़ारों के बड़े से हॉल में चीखते-चिल्लाते, मोल-भाव करते ट्रेडर नहीं दिखते हैं.

अब न्यू यॉर्क स्टॉक एक्सचेंज यानि एनवाईएसई को ही लीजिए. इस एक्सचेंज का अधिकतर व्यापार वॉल स्ट्रीट पर नहीं बल्कि न्यू जर्सी में हो रहा है. वहां दस एकड़ में फ़ैला दफ़्तर कंप्यूटर सर्वरों की कतारों से अटा पड़ा है.

'बॉक्स' का दम

Image caption न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज ने मशीनों से ट्रेडिंग के लिए न्यू जर्सी में बनाया दफ़्तर.

कंप्यूटर के ज़रिए ट्रेडिंग एक ख़ुफ़िया दुनिया है.

ट्रेडिंग करने वाली कंपनियां अपनी रणनीति, कर्मचारियों और कंप्यूटर कोड की जी-जान से हिफ़ाज़त करती हैं.

क्योंकि इस बात का ख़तरा बना रहता है कि कोई विरोधी उनके जटिल लेकिन पूरी तरह से ऑटोमेट्ड ट्रेडिंग पैटर्न के सुरक्षा कवच को भेद कर उसकी नकल कर ले.

नीदरलैंड्स में आईएमसी नाम की ऐसी ही एक कंपनी के प्रमुख रेम्को लेंटरमैन इस सारे गोरखधंधे को आसान बनाने की फ़िराक में हैं.

ऐसी कंपनियां रोबोट ट्रडरों के बेचने और ख़रीदने के निर्णय पर आधारित फ़ैसलों के फलस्वरुप अपना मार्जिन बनाती हैं.

हर रोबोट ट्रेडर मशीन का अपना अलग जटिल सिस्टम होता है. चुनौती बस इतनी है कि जल्दी से ख़रीदने या बेचने के अवसर को चिन्हित कर बिजली की गति से फ़ैसला लिया जाए.

इस ताबड़तोड़ गति को ‘शून्य की ओर दौड़’ कहतें हैं. इस प्रणाली को बेहतर करने में ख़रबों डॉलर झोंके जा रहे हैं.

फ़्लैश क्रैश

Image caption शिकागो शेयर मार्केट में हो रही ट्रेडिंग मशीनों के आगे कितने दिन टिक पाएगी.

लेकिन इस कहानी का एक सियाह पहलू भी है. जहां मशीन है, वहां दुर्घटना भी संभव है.

पिछले साल अगस्त में वित्तीय संस्था नाइट कैपिटल में ऐसी ट्रेडिंग मशीन की चूक के कारण कंगाली की कगार पर पहुंच गई थी.

महज 45 मिनट में इस मशीन ने 44 करोड़ डॉलर के घाटे के सौदे किए. घबराए कर्मचारियों ने इसे आनन-फानन बंद कर दिया.

लेकिन सबसे अजीब दुर्घटना छह मई 2010 की दोपहर को हुई, जब न्यूयॉर्क एक्सचेंज का सारा सिस्टम ठप हो गया और फिर उसी गति दोबारा चालू हो गया.

नतीजा? कई कंपनियों के शेयरों के दाम शून्य के करीब पहुंच गए तो कईयों के एक लाख डॉलर पार.

अब ऐसी चूक किसी आदमी से होती तो उसका क्या होता? ख़ैर मशीन का कोई क्या बिगाड़ सकता है.

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