मिस्र: अमरीका ने की मुर्सी को रिहा किए जाने की मांग

मुर्सी पोस्टर
Image caption दोनों पक्षों ने विरोध प्रदर्शन जारी रखा है.

अमरीका ने मिस्र की फ़ौज से कहा है कि वो राष्ट्रपति मोहम्मद मुर्सी को रिहा करे. इससे पहले जर्मनी ने भी इसी तरह की मांग की थी.

राष्ट्रपति को फ़ौज ने चंद दिनों पहले ही सत्ता से बेदख़ल कर दिया था. मुस्लिम ब्रदरहुड से तालुक्क़ रखने वाले मोहम्मद मुर्सी ने मुल्क में हुई क्रांति के बाद हुए चुनाव में जीत हासिल की थी.

फ़ौज ने कहा था कि उन्हें एक सुरक्षित जगह पर रखा गया है.

इस बीच मुल्क में शुक्रवार को भी मुर्सी समर्थकों और विरोधियों का प्रदर्शन जारी रहा. हाल के दिनों में हुए इसी तरह के प्रदर्शनों में दसियों लोगों की जाने जा चुकी हैं.

मौतें और प्रदर्शन

ऐसे ही एक हादसे में 50 से अधिक मुर्सी समर्थक सुरक्षा बलों की गोलियों का शिकार हो गए थे.

रमज़ान महीने के पहले जुमे को भी मुर्सी के लाखों सर्मथक राजधानी क़ाहिरा के पूर्वी इलाक़े में जमा हुए. वो मुर्सी को राष्ट्रपति पद पर बहाल किए जाने की मांग कर रहे थे.

दूसरी तरफ़ मुर्सी विरोधी तहरीर चौराहे पर जमा हुए. हालांकि उनकी तादाद बहुत कम थी.

विश्लेषकों का कहना है कि हालांकि मु्स्लिम ब्रदरहुड ने सत्ता में रहते हुए मुल्क के एक तबक़े को अलग-थलग कर दिया था, लेकिन मिस्र के नागरिकों का एक तबक़ा राजनीति में फ़ौज के दख़ल को लेकर असहज है.

उनका कहना है कि इन हालात में एक मध्यम मार्ग ढ़ूढ़ने की कोशिश हो रही है.

'गिरफ्तारियों पर रोक लगे'

जर्मनी ने कहा है कि दोनों पक्ष हिंसा से बचें लेकिन साथ ही संदेश दिया है कि अंतरराष्ट्रीय संस्था जैसे रेड क्रास को मुर्सी से मिलने की इजाज़त दी जानी चाहिए.

अमरीका के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने भी मुर्सी को रिहा किए जाने की बात कही है.

अमरीका ने गुरूवार को ये मांग की थी कि मुस्लिम ब्रदरहुड के नेताओं और सदस्यों की जिस तरह से गिरफ़्तारियां हो रही हैं उसपर रोक लगनी चाहिए.

संयुक्त राष्ट्र अध्यक्ष बान की मून ने सचेत किया है कि किसी भी दल को राजनीतिक प्रक्रिया से अलग न किया जाए.

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