ओत्तावियो क्वात्रोकी, बोफ़ोर्स और भारतीय राजनीति

ओत्तावियो क्वात्रोकी
Image caption ओत्तावियो क्वात्रोकी की 73 साल की उम्र में मृत्यु हो गई.

इतालवी व्यवसायी ओत्तावियो क्वात्रोकी का 73 साल की उम्र में निधन हो गया. भारतीय राजनीति के सबसे चर्चित विवादों में से एक कथित बोफ़ोर्स घोटाले में क्वात्रोकी का नाम बार बार लिया जाता रहा है.

1980 के दशक के आखिर वर्षों में जब ये कथित घोटाला सामने आया, उस समय राजीव गाँधी भारत के प्रधानमंत्री थे.

दरअसल राजीव गाँधी सरकार ने 1986 में स्वीडन की बोफ़ोर्स कंपनी को लगभग चार सौ हविट्ज़र तोपों का ऑर्डर दिया था.

क्वात्रोकी पर आरोप था कि वे बोफ़ोर्स तोप की ख़रीददारी में दी गई 64 करोड़ रुपए की कथित दलाली के मामले में शामिल थे.

उन पर आरोप था कि उन्होंने स्वीडन की हथियार बनाने वाली कंपनी बोफ़ोर्स से तोपों खरीदने के एवज़ में कई भारतीय राजनेताओं को घूस दी थी.

'राजीव से नज़दीकी'

एक इतालवी कंपनी के प्रतिनिधि के रूप में क्वात्रोकी 1993 तक दिल्ली में रहे.

1993 में सीबीआई ने उनसे पूछताछ करने की कोशिश की और उनका पासपोर्ट जब्त करने की माँग की.

जुलाई, 1993 में क्वात्रोकी भारत छोड़कर कुआलालम्पुर चले गए.

मार्च 1999 में क्वात्रोकी ने एक साक्षात्कार में कहा कि उन्होंने बोफोर्स से कोई पैसा नहीं लिया.

Image caption बोफ़ोर्स विवादों के बाद राजीव गाँधी को आम चुनाव में हार का सामना करना पड़ा था.

क्वात्रोकी खुद को भारत की घरेलू राजनीति का शिकार बताते रहे.

क्वात्रोकी के अनुसार उनका दोष सिर्फ इतना है कि वह भारत के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गाँधी और उनकी पत्नी और काँग्रेस पार्टी की मौजूदा अध्यक्ष सोनिया गाँधी के क़रीब रहे थे.

सीबीआई ने 1999 में पूर्व रक्षा सचिव एसके भटनागर, ओत्तावियो क्वात्रोकी, भारतीय व्यापारी विन चड्ढा और बोफोर्स के पूर्व प्रमुख मार्टिन आर्डबो और बोफोर्स कंपनी के ख़िलाफ़ आरोप दायर किया था. उस समय केन्द्र में भाजपा के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार थी.

केस वापस

सुप्रीम कोर्ट में 2007 में दायर याचिका में क्वात्रोकी के प्रत्यर्पण से जुड़े सभी दस्तावेज़ अदालत के सामने पेश करने संबंधी याचिका दायर की गई है.

अर्जेंटीना में इंटरपोल ने क्वात्रोकी को गिरफ़्तार कर लिया था लेकिन वहाँ की निचली अदालत ने उन्हें भारत प्रत्यर्पित करने की याचिका ख़ारिज कर दी थी

2009 में केंद्रीय जाँच ब्यूरो ने इंटरपोल से कहा है कि बोफ़ोर्स तोप मामले में अभियुक्त क्वात्रोकी का नाम रेड कॉर्नर नोटिस सूची से हटा लिया जाए. भारत के कहने पर ही उनका नाम रेड कॉर्नर सूची में डाला गया था.

घोटाले से ज़्यादा जांच पर खर्च

Image caption सीबीआई ने अदालत से क्वात्रोकी के मामले को बंद करने की मांग की थी.

2011 में दिल्ली की एक अदालत ने सीबीआई को बोफ़ोर्स मामले में क्वात्रोकी के ख़िलाफ़ मामला बंद करने की अनुमति दे दी.

सीबीआई ने अदालत से कहा था कि क्वात्रोकी के भारत प्रत्यर्पण की कोशिशें विफल रही हैं और इस मामले को बंद किया जाए.

तीस हज़ारी कोर्ट ने सीबीआई की मांग को मानते हुए कहा है कि इस मामले की जाँच में पहले ही 250 करोड़ रुपए ख़र्च हो चुके हैं. क्वात्रोकी आज तक भारत की किसी अदालत में पेश नहीं हुए हैं.

2011 में ही भारत की एक आयकर अदालत ने कहा था कि बोफ़ोर्स तोपों के सौदे में विन चड्डा और ओत्तावियो क्वात्रोकी को 41 करोड़ रुपए दिए गए थे और इस आमदनी पर उन्हें इस पर कर देना चाहिए था.

13 जुलाई, 2013 में ओत्तोवियो क्वात्रोकी की 73 की साल की उम्र में इटली के शहर मिलान में मौत हो गई है.

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