फलस्तीनी क़ैदियों को रिहा करेगा इसरायल

इसरायल का कहना है कि वो कई फलस्तीनी क़ैदियों को रिहा करेगा. इसरायल ने ये कदम फलस्तीनियों के साथ शांति वार्ता दोबारा शुरु करने के समझौते के तहत उठाया है.

दोंनो पक्षों के बीच ये समझौता अमरीकी विदेश मंत्री जॉन कैरी की कोशिशों के चलते शुक्रवार को हुआ था. कैरी ने बताया था कि शुरुआती बातचीत एक सप्ताह में वॉशिंगटन में होगी.

इस बीच इसरायली प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतनयाहू ने फलस्तीनियों के साथ बातचीत की दोबारा शुरुआत को इसरायल के लिए ''महत्वपूर्ण'' बताया है.

उन्होंने अमरीकी विदेश मंत्री जॉन कैरी का बातचीत शुरु करवाने में उनकी ''अथक कोशिशों'' के लिए शुक्रिया किया. नेतनयाहू ने कहा कि वो उम्मीद कर रहे हैं कि बातचीत ''गंभीरता और ज़िम्मेदार तरीके'' से होगी.

'बड़े नाम शामिल'

इसरायल के अंतरराष्ट्रीय संबंधों के मंत्री युवाल स्टेनिट्ज़ का कहना था कि जिन क़ैदियों की रिहाई हो रही है उनमें ''दशकों से क़ैद कई बड़े नाम भी इसमें शामिल किए जाएंगे.'' उन्होंने कहा कि क़ैदियों की रिहाई चरणों में होगी.

स्टेनिट्ज़ ने इसरायल के सरकारी रेडियो को बताया कि ये समझौता प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतनयाहूकी बातचीत शुरु करने के लिए तय किए गए सिद्धांतों पर आधारित है.

अभी ये साफ़ नहीं हुआ है कि कुल कितने क़ैदियों की रिहाई होगी लेकिन एक फलस्तीनी अधिकारी का कहना था कि शुरु में कई महीनों की अवधि में 350 क़ैदियों को रिहा करने की बात हुई थी. इसमें क़रीब 100 ऐसे लोग भी शामिल हैं जो 1993 में ओस्लो शांति समझौते के समय से जेल में हैं.

इसरायली मानवाधिकार संगठन बी' त्सेलेम के मुताबिक इसरायली जेलों में 4,817 फलस्तीनी क़ैद हैं.

'शर्तें मंज़ूर नहीं'

युवाल स्टेनिट्ज़ ने कहा कि फलस्तीनियों ने ''गंभीर बातचीत'' के लिए कम से कम नौ महीने का समय देने की बात कही है.

लेकिन स्टेनिट्ज़ ने ये भी साफ़ किया कि इसरायल ने फलस्तीनियों की वार्ता शुरु करने के लिए शर्तें स्वीकार नहीं की हैं. इनमें पश्चिमी तट और पूर्व येरुश्लम में इसरायली बस्तियां बनाने का काम रोकना शामिल है.

उन्होंने कहा, "हम ऐसी किसी बातचीत में शामिल नहीं होंगे जो क्षेत्रीय सीमाएं परिभाषित करने या इसरायल से रियायत मांगने से शुरु हो या फिर बस्तियां बनाने पर रोक लगाती हो."

मिली-जुली प्रतिक्रिया

इसरायल और फलस्तीनियों के बीच सीधी वार्ता आखिरी बार साल 2010 में हुई थी लेकिन इसरायली बस्तियों के मुद्दे पर टूट गई थी.

अंतरराष्ट्रीय क़ानूनों के अंतर्गत ये बस्तियां ग़ैरक़ानूनी हैं लेकिन इसरायल इसे नहीं मानता.

एक बीबीसी संवाददाता के मुताबिक पहले ही की तरह अब भी दोंनो पक्षों के बीच सीमा, इसरायली बस्तियां और येरुश्लम के दर्जे जैसे मुख्य मुद्दों पर मतभेद हैं.

पश्चिमी तट के रमल्लाह शहर में फलस्तीनी क़ैदियों के मामले की समिति के प्रमुख अमीन शोमान ने इसरायल के फलस्तीनी क़ैदियों को रिहा करने के फैसले का स्वागत किया है.

उन्होंने कहा, "इस बातचीत की शुरुआत के लिए इसरायली जेलों में क़ैद बड़ी उम्र के क़ैदियों की रिहाई एक सकारात्मक बात है, इसलिए भी क्योंकि इसरायल के साथ बातचीत दोबारा शुरु करने के लिए ये हमेशा से ही फलस्तीनियों की शर्त थी."

लेकिन गज़ा पट्टी में सत्तारूढ़ हमास गुट ने शांति वार्ता दोबारा शुरु करने की पहल को खारिज कर दिया है.

संगठन के प्रवक्ता सामी अबू ज़ुहरी ने कहा, "महमूद अब्बास को फलस्तीनी लोगों के तरफ़ से बातचीत करने का अधिकार नहीं है."

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए यहां क्लिक करें. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

संबंधित समाचार