नाव से आने वाले नहीं बस पाएंगे ऑस्ट्रेलिया में

ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री केविन रड ने नाव से आकर देश में शरण चाहने वालों के लिए कड़े प्रतिबंधों की घोषणा की है. इन प्रतिबंधों के बाद अब ऑस्ट्रेलिया में और अधिक लोग शरणार्थी का दर्जा नहीं हासिल कर सकेंगे.

पापुआ न्यू गिनी की सरकार के साथ हुए नए समझौते के तहत इन शरणार्थियों को वहाँ रहने की अनुमति दी जाएगी.

ऑस्ट्रेलिया में प्रवेश चाहने वालों की बढ़ती तादाद को देखते हुए सरकार को ये फ़ैसला करना पड़ा है.

प्रधानमंत्री केविन रड का कहना है, "अब से नाव के ज़रिए ऑस्ट्रेलिया आने वाले लोगों को ऑस्ट्रेलिया में शरणार्थी के रूप में बसने का कोई मौका नहीं नहीं दिया जाएगा. शरण की तलाश में आए लोगों को उनकी याचिका के विश्लेषण के लिए अब पापुआ न्यू गिनी में या फिर अन्यत्र कहीं और ले जाया जाएगा. यदि वे वास्तविक शरणार्थी पाए जाएंगे तो फिर उन्हें पापुआ न्यू गिनी में कहीं बसा दिया जाएगा."

पापुआ न्यू गिनी से समझौता

दरअसल नाव के जरिए आने वाले लोग ऑस्ट्रेलिया के बंदरगाहों में प्रवेश करते हैं और इसके बाद वहाँ शरणार्थी बन जाते हैं. अफ़ग़ानिस्तान, श्रीलंका, वियतनाम, बांग्लादेश और बर्मा से तमाम शरणार्थी ऑस्ट्रेलिया में आते रहे हैं.

पहली बार 1970 में ये मुद्दा गरमाया था, तब से लेकर आज तक समय-समय पर बार-बार ये मुद्दा उठता रहा है.

शरणार्थियों की समस्या से निपटने के लिए ऑस्ट्रेलिया ने पापुआ न्यू गिनी की सरकार के साथ समझौता किया है जिसके तहत जाँच पड़ताल के बाद इन शरणार्थियों को वहाँ रहने की अनुमति दी जाएगी.

पापुआ न्यू गिनी के प्रधानमंत्री पीटर ओ नील का कहना था, "मुझे लगता है कि अब जो पुनर्वास व्यवस्था बनाई जा रही है उससे नागरिकता की माँग करने वाले लोगों की याचिकाओं का सही से निस्तारण हो सकेगा. जो लोग इस क्षेत्र के देशों में वास्तविक शरण की तलाश करते हैं उनकी सुनवाई हो सकेगी. हम विश्वास करते हैं कि आने वाले सालों में जरूरतमंद शरणार्थी हमारे देश में और इस इलाके में बस सकेंगे."

नाव के जरिए आने वाले लोग ऑस्ट्रेलिया के बंदरगाहो में प्रवेश करते हैं और इसके बाद वहाँ शरणार्थी बन जाते हैं.

2001 में तत्कालीन प्रधानमंत्री जॉन हॉरर्वड ने नाव ने एक नीति बनाकर इन शरणार्थियों को वापस भेजे जाने या फिर दूसरी जगह भेजे जाने की वकालत की थी.

पैसिफिक सॉल्यूशन

इसे नीति को ‘पैसिफिक सॉल्यूशन’ के नाम से जाना जाता है.पैसिफिक सॉल्यूशन का समाधान विवादास्पद रहा था.

लेकिन 2008 में ऑस्ट्रेलिया की सरकार पर दवाब पड़ा और उसे इस नीति पर अपने कदम पीछे खींचने पड़े.

हालांकि शरणार्थियों की समस्या से निपटने के लिए और भी कई प्रयास किए जाते रहे हैं, लेकिन अभी तक इस बारे में अपेक्षित सफलताएं नहीं मिल सकी हैं.

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