ख़तना की शिकार महिलाओं की मदद करता एक डॉक्टर

  • 25 जुलाई 2013
एक जोड़ा

बार्सिलोना में एक डॉक्टर बचपन में जननांग विकृति (ख़तना) की शिकार अफ्रीकी मूल की महिलाओं को सर्जरी की सेवाएं दे रहा है.

हालाँकि कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि संभवतः यह ऑपरेशन नाकाम रहेंगे और इनसे एफजीएम (महिला जननांग विकृति या ख़तना) किए जाने के खिलाफ़ चल रहे अभियान पर भी असर हो सकता है.

वेनकुने के ऑपरेशन में अभी तीन सप्ताह हैं लेकिन वे अभी से ही डरी हुई हैं.

वे कहती हैं, "सर्जरी चाहे जैसी भी हो डर तो लगता ही है लेकिन ये और भी गंभीर मामला हैं क्योंकि इससे जीवन पर व्यापक प्रभाव होता है. यह सोचना मुश्किल है कि जो अंग आपसे सालों पहले छीन लिया गया उसे वापस भी पाया जा सकता है. मुझे इस बात का अंदाज़ा भी नहीं है कि जो बदलाव होने जा रहा है उसका सामने मैं कैसे करूंगी. "

यादें

वेनकुनो का जन्म बुर्किनो फासो में हुआ था और वे पिछले दस साल से स्पेन में रह रहीं हैं. वे लगभग 40 साल की हैं और चार बच्चों की माँ हैं. वे महिला अधिकार कार्यकर्ता भी हैं. उनके साथ पाँच साल की उम्र में जो हुआ था उसकी यादें अब भी ताज़ा हैं.

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वे कहती हैं, "वो घटना मेरे दिमाग़ में फिल्म की तरह चलती है. जब भी मैं अपने गाँव जाती हूँ मुझे नदी के किनारे स्थित वो स्थान याद आता है जहाँ मेरे शरीर के साथ खिलवाड़ हुआ था. मुझे वो घर भी याद आता है जहाँ मुझे ले जाया गया था. अगर आपके साथ ऐसा बुरा व्यवहार हुआ हो तो आप इसे अपने दिमाग़ से नहीं निकाल सकते."

वे सोचती हैं कि सर्जरी से कम से कम मनोवैज्ञानिक तौर पर उबरने में उन्हें मदद मिलेगी.

डॉ. बर्री निजी संस्थान इंस्टीट्यूटो यूनिवर्सिटारियो डेक्सस हॉस्पिटल में गाईनेकोलॉजी (प्रसूतिशास्त्र) टीम के मुखिया हैं और अब तक 40 से अधिक महिलाओं का ऑपरेशन कर चुके हैं.

ऑपरेशन के दौरान महिला की दबी हुई क्लाइटोरिस के उस हिस्से को फिर से बाहर निकाला जाता है जो एफजीएम के दौरान बच गया था. डॉ. बर्री बताते हैं हैं कि इस ऑपरेशन का मक़सद क्लाइटोरल एनाटॉमी और उसके कार्यों को फिर से वापस लौटाना है.

जटिल प्रक्रिया

Image caption डॉ. बर्री मानते हैं कि सर्जरी का मनोवैज्ञानिक असर भी होता है.

वे कहती हैं, "हम दागे हुए उत्तकों को हटा देते हैं और क्लाइटोरिस के दबे हुए हिस्से को फिर से उभार देते हैं. यह बहुत जटिल प्रक्रिया नहीं है." सर्जरी की इस प्रक्रिया की शुरुआत फ्रैंच सर्जन डॉ. पियरे फोल्डस द्वारा की गई थी और डॉ. बर्री ने पैरिस में अध्ययन के दौरान इसे सीखा.

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रोज़ा की सर्जरी भी उसी दिन होनी है जिस दिन वेनकुने की सर्जरी है. 20 साल की रोजा मूल रूप से गिनी बिसाऊ की रहने वाली हैं और पिछले आठ साल से यूरोप में रह रही हैं. वे अपने स्पैनिश ब्वॉयफ्रैंड के साथ रहती हैं. स्वभाव से बेहद जिंदादिल रोज़ा भी अपनी हालत से ख़ासी परेशान हैं.

वे कहती हैं, "जब तक मेरा ब्वॉयफ्रैंड नहीं था तब तक मुझे पता भी नहीं था कि मुझमे क्या कमी हैं क्योंकि किसी ने कभी मुझे वहाँ छुआ ही नहीं था. हाँ मैं यह जरूर जानती थी कि मुझमे कुछ अलग है. मेरी बाकी दोस्तों के पास जो अंग था वह मेरे पास नहीं था."

वे कहती हैं, "मुझे इस बारे में कोई फर्क नहीं पड़ता था, लेकिन अब मेरा ब्वॉयफ्रैंड है जो क्लाइटोरिस के बारे में बात करता है. वो जब मुझे वहाँ छूता है तो मैं बहुत संवेदनशील हो जाती हूँ. यह सब बहुत दर्दनाक़ भी होता है क्योंकि मुझे बचपन में अपने साथ हुई घटना की याद आ जाती है. मैं उस वक्त पाँच या छह साल की थी जब मेरी दादी और उनकी कुछ दोस्तों ने मेरा ख़तना किया था. कुछ धुंधली तस्वीरें आज भी मेरे ज़हन में ताज़ा हैं. किसी ने मेरे हाथ पकड़े हुए हैं और किसी ने मेरी टांगों को जकड़ा हुआ है."

रोज़ा को उम्मीद है कि ऑपरेशन के बाद उनके ब्वॉयफ्रैंड के छूने से होने वाले अहसास बदल जाएगा. लेकिन वे इससे भी ज्यादा चाहती हैं. वे चाहती हैं कि वे भी दुनिया की बाकी महिलाओं की तरह हो जाएं.

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डॉ. बर्री कहते हैं कि अक़सर उनकी मरीज उनसे कहती हैं कि इस प्रक्रिया का नतीज़ा सिर्फ भौतिक ही नहीं बल्कि मनोवैज्ञानिक भी होता है. सर्जरी के बाद महिलाओं को लगता है कि अब वे बाकी महिलाओं से अलग नहीं है.

यह इन महिलाओं के लिए एक जटिल प्रक्रिया भी हैं क्योंकि सर्जरी करवाकर वे अपने समुदाय की मान्यताओं के खिलाफ़ जा रही हैं.

और यही वजह है कि डॉ. बर्री के पास गिने-चुने मरीज ही आते हैं. वे कहते हैं, "हमारे पास वही महिलाएं आती हैं जो अपने समुदाय के नियमों को तोड़ देती हैं. सबसे पहले आने वाली मरीज तो बेहद डरी हुईं थी, उन्हें लग रहा था कि सर्जरी करवा कर वे कुछ गैरक़ानूनी काम कर रही हैं."

समर्थन

रोज़ा और वेनकुने को उनके साथी का समर्थन प्राप्त हैं. लेकिन इस सर्जरी के बारे में उन्होंने अपने एक-दो बेहद करीबी लोगों को ही बताया है.

एफजीएम के खिलाफ़ अभियान चला रहे कार्यकर्ताओं को चिंता है कि इस तरह के ऑपरेशन से अफ्रीकी समुदायों में संदेश जाएगा कि सर्जरी के जरिए ख़तना के प्रभाव को खत्म किया जा सकता है. हालाँकि डॉ. बर्री इससे इत्तेफ़ाक नहीं रखते.

जहां होता है सामूहिक ख़तना

वे तर्क देते हैं, "सर्जरी का विकल्प देना और इसके बारे में बात करने इसे रोकने का एक अच्छा जरिया है." वे कहते हैं, "हम कभी-कभी महिला संगठनों और एनजीओ से मिलते हैं और इस बारे में प्रेजेंटेशन देते हैं. हम अपने मरीजों के परिजनों से बात भी करते हैं. उन्हें ख़तना से महिलाओं पर होने वाले प्रभावों के बारे में जानकर हैरत होती है. जब परिजनों तक जानकारी पहुँचती है तो वे अपनी बेटियों का ख़तना नहीं करवाते. "

अस्पताल में भर्ती होने के दिन रोजा और वेनकुने बहुत सहमी हुई थी. खुद को हिम्मत देने के लिए वेनकुने तो अपनी बाइबल भी साथ लाईं थी.

एक घंटे से भी कम समय में दोनों का ऑपरेशन हो गया और उन्हें अस्पताल के प्राइवेट रूम में एक रात गुजारनी पड़ी. अगले दिन दोनों को घर भेज दिया गया. डॉ. बर्री कहते हैं कि सामान्यतः ऑपरेशन के नतीजें अच्छे होते हैं.

वे कहते हैं, "लगभग 90 प्रतिशत महिलाओं का शारीरिक बदलाव बेहतर होता है लेकिन जिसे इस बारे में जानकारी न हो उसे ज्यादा फर्क नहीं आता. 70 प्रतिशत मरीजों को अहसास का अनुभव भी होने लगता हैं."

सात साल में हो गया ख़तना, फिर उठे सवाल

पिछले साल डॉ. पियरे फोल्डस और उनके सहयोगियों ने चिकित्सा पत्रिका लैनसेट में एक शोध प्रकाशित किया था. 11 साल के समय में उनकी टीम ने करीब तीन हजार महिलाओं का ऑपरेशन किया. एक साल क फॉलो अप कार्यक्रम में 866 या कुल मरीजों में से 29 प्रतिशत ने हिस्सा लिया. इनमें से 821 ने बताया कि उनमें सुधार हुआ या कम से कम दर्द और ज्यादा नहीं बढ़ा. 815 ने जननांग में आनंद का अनुभव किया जबकि 431 को ओर्गाज़्म (कामोत्तेजना) का अनुभव हुआ.

नतीजे

Image caption डॉ. बर्री मानते हैं कि सर्जरी से लोगों में जागरूकता भी आती है.

इस शोध के नतीजे सकारात्मक थे. लेकिन ब्रिटिश चिकित्सा विशेषज्ञों ने इस पर सवाल उठा दिए. लैनसेट को लिखे एक पत्र में गाईनोकोलॉजी, ओब्सटेटरिक्स और साइक्लॉजी के विशेषज्ञों ने कहा, "शोध में किए गए दावे शारीरिक रूप से संभव नहीं है. जब क्लाइटोरिस को हटा दिया जाता है तब इससे जुड़ी न्यूरोवस्कुलर (न्यूरो संवहनी) संरचना भी सुरक्षित नहीं रहती है. ऐसे में उन दावों में सच्चाई नहीं है जिनके मुताबिक दबे हुए हिस्सों को फिर से उभारकर अंग को वापस पाया जा सकता है. एफजीएम (ख़तना) के खिलाफ़ चल रहे अभियान को इसके दुष्भ्रावों को खत्म करने के दावों से नुकसान होगा."

डॉ. बर्री इस आलोचना से अधीर हो जाते हैं. वे कहते हैं, "मैंने ख़तना की शिकार ऐसी एक भी महिला नहीं देखी है जिसकी क्लाइटोरिस का कुछ हिस्सा बचा न हो. जब चिकित्सीय प्रक्रिया में भी संपूर्ण क्लाइटोरिस को हटाया जाता है, जैसा कि कैंसर के मामले में, तब भी यह एक मुश्किल काम होता है."

ख़तने का ख़ून मुँह से साफ़ करने पर विवाद

वे कहते हैं, "सामान्यतः खतना की शिकार महिलाओं में क्लाइटोरिस का भाग बचा रह जाता है ऐसे में निश्चित तौर पर उन्हें सर्जरी से फायदा होगा."

हालाँकि ऑपरेशन के दो सप्ताह बाद वेनकुने निराश थीं. वे कहती हैं, "दर्द के कारण मुझे बुरे अनुभव हो रहे हैं. ऐसा लग रहा जैसे मैं उस वक्त को दोबारा जी रही हूँ जब मेरा ख़तना किया गया था."

जबकि रोज़ा में सुधार तेजी से हो रहा था. वे कहती हैं, "मैं बहुत ठीक हूं, शुरू में दर्द हुआ था लेकिन धीरे-धीरे मैं ठीक हो रही हूं. मुझे लगता है कि दुनिया को लोगों को पता चलना चाहिए की सबसे अच्छा सर्जन बार्सीलोना में है."

चार महीने बात रोज़ा खुश थी और सर्जरी के बाद के अपने सेक्स जीवन के बारे में बात करते वक्त मुस्कुरा रहीं थी.

वे कहती हैं, "मेरी संवेदनशीलता पूरी तरह से वापस नहीं आई है. लेकिन बुधवार को मुजे पहली बार ओगाज़्म का अनुभव हुआ. यह पहले से बहुत बेहतर था. अब मुझे महिला होने का अहसास होता है."

अहसास

हालाँकि उनके बॉयफ्रैंड को लगता है कि ऑपरेशन से रोज़ा को छुए जाने के बाद के अहसास में कोई फर्क नहीं आया है. वे कहते हैं, "उसे आज भी अपनी दादी का चेहरा याद आता है. ऐसी चीज़े आसानी से नहीं भुलाई जाती."

दूसरी ओर वेनकुने ऑपरेशन के बाद से ही संघर्ष कर रही हैं. उनकी सेहत में सुधार तेजी से नहीं हुआ है और ऑपरेशन के बारे में वे उलझन में हैं.

वे कहती हैं, "किसी भी चीज़ से ज्यादा, सेक्स से भी ज्यादा मैं अपने उस शरीर को वापस पाना चाहती थी जो बचपन में ख़तना से पहला मेरे पास था. अब मैं जब भी नहाती हूँ और अपने शरीर को देखती हूँ तो मुझे वह शरीर दिखाई नहीं देता. और इससे मुझे दुख होता है. और जब आप दुखी होते हैं तो सेक्स में भी आनंद नहीं आता."

ब्रिटेन में महिलाओं के ख़तने का छिपा संसार

लेकिन अपनी हालत के लिए वेनकुने डॉ. बर्री को जिम्मेदार नहीं मानती. अगली मुलाकात में डॉ. बर्री उन्हें यह भरोसा देंगे कि शारीरिक रूप से भी सबकुछ ठीक हो जाएगा.

वे कहते हैं, "उन्हें आश्वस्त होने की जरूरत है. गर्मियों के बाद जब मैं उन्हें देखूंगा तो वे आज से ज्यादा खुश होंगी."

प्रेरणा

तो क्या डॉ. बर्री इन महिलाओं के लिए जितना कर सकते हैं उससे ज्यादा वादे उनसे कर रहे हैं. वे कहते हैं कि ऐसा नहीं है.

"जब आप नतीजों को वैश्विक रूप में देखते हैं तो यह ख़तना की शिकार महिलाओं की सर्जरी करने के लिए हमें प्रेरित करते हैं. लेकिन यह भी सच है कि यह एक सर्जरी है. यह कार खरीदने जैसा नहीं हैं और जरूरी नहीं कि हर बार नतीजा 100 प्रतिशत हो."

सर्जरी भले ही कितनी भी कारगर क्यों न हो लेकिन यह रोजा और वेनकुने जैसी महिलाओं के लिए बीते वक्त को नहीं बदल सकती.

वेनुकने रोते हुए कहती हैं, "समाधान सिर्फ एक ही है कि ख़तना ही न किया जाए ताकि सर्जरी की जरूरत ही न पड़े. महिलाओं और लड़कियों के अधिकारों के लिए लड़ने की भी जरूरत है. मैं चाहती हूँ कि मैं पूरी दुनिया को एफजीएम से होने वाले नुकसान के बारे में बताऊं."

(इस रिपोर्ट में मरीजों के उनके आग्रह पर बदल दिए गए हैं.)

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