मिस्र: झड़पों में 100 से ज़्यादा की मौत

मिस्र

मिस्र में सत्ता से बेदखल हुए राष्ट्रपति मोहम्मद मुर्सी के समर्थकों और विरोधियों के बीच काहिरा में हुई हिंसक झड़पों में 100 से अधिक लोगों के मारे जाने की ख़बर है.

मुर्सी समर्थकों और विरोधियों का प्रदर्शन देश के अलग-अलग हिस्सों में रात भर जारी रहा.

घटनास्थल पर बने अस्थायी अस्पताल के डॉक्टर ने बीबीसी को बताया कि मृतकों के अलावा 1000 से ज़्यादा लोग घायल हो गए हैं. हालांकि अभी यह साफ़ नहीं हुआ है कि ताज़ा झड़पें क्या सुरक्षा बलों की तरफ़ से इलाक़ा खाली कराने की कोशिश में हुई हैं.

बीबीसी संवाददाता के अनुसार ऑटोमेटिक बंदूक़ों की आवाज अभी भी सुनी जा सकती है. इलाक़े में आंसू गैस के गोलों का भारी मात्रा में प्रयोग किया गया है.

मुस्लिम ब्रदरहुड के प्रवक्ता जेहद अल-हद्दाद ने समाचार एजेंसी रॉयटर को बताया, “वे लोगों को घायल करने के लिए नहीं बल्कि मारने के लिए गोली चला रहे हैं.”

अलेक्जेंड्रिया में भी झड़पें

मिस्र के एक अन्य शहर अलेक्जेंड्रिया में भी झड़पों की खबर आई है, जहां दो धड़ों के बीच हुई झड़प में कम से कम 10 लोग मारे गए हैं.

सेना प्रमुख जनरल अब्दुल फतह अल सीसी ने सड़कों पर जमा लोगों से सेना को समर्थन देने की अपील की है.

बीबीसी संवाददाता क्वेंटिन समरविले के अनुसार हिंसा की ताज़ा घटनाएं मस्जिद रब्बा अल अदाविया के आसपास हो रही हैं. सड़कों पर ख़ून धब्बे नजर आ रहे हैं.

मिस्र में सेना की ओर से नामित गृहमंत्री मोहम्मद इब्राहीम ने शनिवार को कहा कि स्थानीय नागरिकों ने छावनी के बारे में शिकायतें की हैं. “एक महीने से जारी मुर्सी समर्थकों के धरने को जल्द से जल्द और क़ानूनी तरीके से समाप्त करवाया जाएगा.”

मिस्र में लोकतांत्रिक रूप से चुने गए पहले राष्ट्रपति मुहम्मद मुर्सी को 3 जुलाई को सत्ता से बाहर कर दिया गया था. मुर्सी के खिलाफ हुए हिंसक प्रदर्शनों में कई दर्जन लोगों की मौत हो गई थी.

मुर्सी से होगी पूछताछ

मुर्सी के ऊपर फ़लस्तीनी संगठन हमास के साथ मिलकर षड्यंत्र रचने का आरोप लगाया गया है. हमास संगठन का फ़लस्तीन के गाज़ा पट्टी इलाक़े में शासन है. हमास का मुस्लिम ब्रदरहुड से गहरा संबंध रहा है.

मुर्सी पर आरोप है कि उन्होंने 2011 में जेलों पर हमले करने का षड्यंत्र किया था जिसके परिणामस्वरूप तात्कालिक राष्ट्रपति होस्नी मुबारक को सत्ता से बेदखल होना पड़ा था. जनवरी, 2011 में काहिरा की जेल पर हुए हमले में मुहम्मद मुर्सी समेत मुस्लिम ब्रदरहुड के कई नेताओं को आज़ाद करा लिया गया था.

एक न्यायिक आदेश के अनुसार मुहम्मद मुर्सी से पहले पन्द्रह दिनों तक पूछताछ होगी. न्यायालय का यह बयान मुर्सी को सत्ता से बेदख़ल किए जाने के बाद पहला आधिकारिक बयान है.

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