सेक्स पहेली का जवाब खोजने वाली वैज्ञानिक का निधन

  • 28 जुलाई 2013
Image caption वर्जिनिया जॉन्सन के शोधों ने बदल दिया लोगों का जीवन

इंसान के सेक्स व्यवहार को लेकर मीडिया में ख़ूब चर्चा देखने को मिलती है. लोग भी इस मुद्दे पर ज़्यादा खुलेपन से बात करने लगे हैं पर आज से कुछ साल पहले तक बेडरूम के अंदर की बातें बाहर नहीं निकल पाती थीं.

सेक्सुअल समस्याएं कभी न सुलझने वाली पहेलियां थीं. इलाज के नाम पर लोग नीम-हकीमों के चक्कर में पड़कर पैसा और स्वास्थ्य दोनों नष्ट कर लेते थे. क्योंकि इस मसले पर कोई वैज्ञानिक शोध मौजूद नहीं था.

समाज में सेक्स रिश्तों को लेकर खुलेपन की शुरुआत हुई थी अमरीकी शोधकर्ता विलियम मास्टर्स और वर्जीनिया जॉन्सन के शोध से. 1950 के दशक में दोनों ने इंसानी रिश्तों और उसमें आने वाली मुश्किलों को समझना शुरू किया.

मास्टर्स-जॉन्सन का साथ

वर्जीनिया जॉन्सन ने इंसान के सेक्स रिश्तों को लेकर अपने प्रयोगों की शुरुआत 30 साल की उम्र में की. तब तक उनका दो बार तलाक हो चुका था. वह ख़ुद मां बन चुकी थीं और अपने परिवार के भरण-पोषण के लिए वाशिंगटन यूनिवर्सिटी में नौकरी तलाश रही थीं.

(किसने पैदा की सेक्स क्रांति)

यूनिवर्सिटी में उन्हें स्त्रीरोग विशेषज्ञ विलियम मास्टर्स की सहायिका के बतौर काम करने का मौका मिला. अपने प्रयोगों के दौरान दोनों एक-दूसरे के नजदीक आए और दोनों ने बाद में शादी कर ली.

जॉन्सन और मास्टर्स ने 1971 में शादी की थी मगर 20 साल बाद दोनों का तलाक भी हो गया. विलियम मास्टर्स का निधन 2001 में हुआ तो इस सप्ताह वर्जीनिया जॉन्सन की 88 साल की उम्र में मौत हो गई.

इंसानी सेक्सुअल बिहेवियर को लेकर दोनों की दो किताबें बेस्टसेलिंग लिस्ट में शामिल हैं. 1996 में प्रकाशित ह्मूमन सेक्सुअल रेस्पॉन्स और 1970 में छपी ह्यूमन सेक्सुअल इनएडक्यूएसी ने पहली बार पूरे तर्क के साथ सेक्स व्यवहार की पहेलियों को दुनिया के सामने रखा.

महिलाओं की चुप्पी को आवाज़

मनोचिकित्सक और 'द जॉय ऑफ सेक्स' के ताज़ा संस्करण की लेखिका सूसे क्यूलियम ने बीबीसी से डॉ. जॉन्सन के योगदान की चर्चा करते हुए बताया, “किन्से रिपोर्ट से पहले भी कई अध्ययन आए थे, लेकिन वर्जीनिया जॉन्सन पहली ऐसी महिला थीं, जिन्होंने इस विषय पर वैज्ञानिक अनुसंधानों के साथ अपनी बात रखी. उन्होंने विलियम मास्टर्स के शोध के दौरान महिलाओं का नज़रिया सामने रखा.”

(सेक्स से जा सकती है जान)

क्यूलियम के मुताबिक वर्जीनिया जॉन्सन ने सेक्सुअलिटी के मसले पर महिलाओं की चुप्पी को तोड़ा.

यह उस दौर की बात है, जब सेक्सुअल थेरेपी की बात लोग दबे-छिपे अंदाज़ में किया करते थे, लेकिन मास्टर्स और जॉन्सन के प्रयोगों ने इस थेरेपी को सम्मानजनक पहचान दिलाई.

लोगों का जीवन बदला

Image caption विलियम मास्टर्स और वर्जिनिया जॉन्सन ने सेक्स थेरेपी की शुरुआत की

इस वैज्ञानिक दंपत्ति ने अपने प्रयोग के दौरान करीब 700 लोगों की करीब दस हज़ार सेक्सुअल गतिविधियों का अध्ययन किया.

ब्रिटेन में सेक्स रिश्तों पर अध्ययन करने वाली संस्था रिलेट की मनोचिकित्सक पॉउला हल बताती हैं, “मास्टर्स और जॉन्सन का काम काफी अहम है. इन दोनों ने सेक्स और सेक्स संबंधों से जुड़ी बीमारियों को रहस्यमय नहीं रहने दिया.”

पाउला हल के मुताबिक दोनों के प्रयोगों ने आम लोगों को पहली बार बताया कि सेक्सुअल समस्याएं जीवन का हिस्सा हैं और उनका निदान संभव है.

मास्टर्स और जॉन्सन अपनी सेक्सुअल थेरेपी में पहले लोगों से सेक्सुअल संबंधों के बारे में पूछते थे ताकि ये पता चल सके कि ये कोई शारीरिक समस्या तो नहीं है.

क्रांतिकारी बदलाव

इसके बाद अलग-अलग लोगों की समस्याएं दूर करने के लिए वो ख़ासतौर पर डिज़ाइन थेरेपी का सहारा लेते थे. दोनों सेक्सुअल गतिविधियों के दौरान थेरेपी लेने वाले की हृदयगति, मस्तिष्क की सक्रियता और मेटाबॉलिज्म पर नज़र रखते थे.

(सेक्स से ज़्यादा फ़ेसबुक की चाहत)

इस थेरेपी की मदद से मास्टर्स और जॉन्सन ने हजारों लोगों की सेक्सुअल समस्याओं जिसमें शीघ्रपतन से लेकर नपुंसकता जैसी समस्याएं शामिल थीं, दूर कीं. इसके बाद नए नए शोधों के लिए दरवाज़े खुले.

मास्टर्स और जॉन्सन के साथ 1960 के दशक में अध्ययन और बाद में उनके इंस्टीट्यूट में रिसर्च और ट्रेनिंग की डायरेक्टर रहे रॉबर्ट कोलोडनी के मुताबिक इन दोनों के प्रयोगों ने लाखों लोगों का जीवन बदल दिया.

मास्टर्स और जॉन्सन के साथ करीब 14 किताबों के सहलेखक रहे कोलोडनी ने बीबीसी को वर्जीनिया जॉन्सन के बारे में बताया, “वह 20वीं सदी की कुछ अहम महिलाओं में एक थीं. दुनियाभर में लोग उन्हें और उनके काम को जानते थे.”

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