एस्केलेटर पर क्या करें और क्या नहीं

न्यूयॉर्क के मेयर माइकल ब्लूमबर्ग हमेशा एस्केलेटर पर चलते हैं. उनका कहना है कि यह अच्छी कसरत है लेकिन कुछ शहर इसे हतोत्साहित करते हैं. एस्केलेटर पर चलने वालों को एक बात व्यवधान पैदा करती है वो हैं खड़े हुए लोग.

एस्केलेटर पर कुछ लोग चलते हैं तो कुछ खड़े रहते हैं. ब्लूमबर्ग चलने वालों में शामिल हैं.

ब्लूमबर्ग ने न्यूयॉर्क की इमारतों को सीढ़ियों के ज़्यादा अनुकूल बनाने की एक योजना की घोषणा करते हुए कहा कि उन्हें हमेशा एस्केलेटर पर चलना अच्छा लगता है.

लोगों में एस्केलेटर पर चलने की प्रवृत्ति भूमिगत स्टेशनों में ज़्यादा देखी जाती है. शॉपिंग सेंटरों में वे इस तरह की जल्दबाज़ी में नहीं दिखते.

एस्केलेटर पर चलने वालों की संख्या दुनियाभर में बहुत कम है. एक अध्ययन के मुताबिक़ लंदन में ट्यूब में सफर करने वाले क़रीब 25 प्रतिशत और शंघाई में तीन प्रतिशत लोग ही एस्केलेटर पर चलते हैं.

दाएं-बाएं का नियम

कुछ देशों में एस्केलेटर पर चलने को हतोत्साहित किया जाता है. टोरंटो सब-वे सिस्टम में लोगों को एस्केलेटर पर चलने के लिए उत्साहित करने वाले प्रचार को सुरक्षा विशेषज्ञों की सलाह पर हटा दिया गया.

टोक्यो की परिवहन प्रणाली पर भी ऐसा ही प्रतिबंध लगाने पर विचार किया गया, लेकिन इसे कभी लागू नहीं किया गया.

ब्रिटेन में 1970 के दशक में एक विज्ञापन फ़िल्म दिखाई जाती थी, जिसमें बच्चों की एक जोड़ी ब्लू वेलिंगटन जूतों को मशीन में फंसा दिखाया गया था. इसमें संदेश होता था, “खड़े रहिए, चलिए मत.”

यह संदेश कभी अपने उद्देश्य की पूर्ति नहीं कर सका. लंदन में 426 भूमिगत एस्केलेटर हैं. साथ ही ऐसे विज्ञापन चस्पा हैं, जो कहते हैं कि एस्केलेटर पर दाहिने खड़े रहिए और बाएं चलिए.

ग्रीनविच विश्वविद्यालय द्वारा 2011 में किए एक शोध के मुताबिक़ पैडिंगटन ट्यूब स्टेशन में 75 प्रतिशत लोग खड़े रहते हैं और दाएं-बाएं के नियम का क़रीब 90 प्रतिशत लोग पालन करते हैं.

मगर अलग-अलग जगहों पर लोगों की अलग-अलग प्रवृत्ति होती है. एडविन गैली की अगुवाई में शोधकर्ताओं की टीम ने पाया कि शंघाई में केवल 2.4 फीसदी लोग एस्केलेटर पर चलते हैं और वहां दाहिने-बाएं के नियम का कोई मतलब नहीं है.

रास्ता रोकते हैं खड़े लोग

गैली कहते हैं कि आमतौर पर व्यस्त एस्केलेटरों पर चलने के लिए एक लेन होती है. यह साफ़ नहीं है कि शंघाई में इसकी सांस्कृतिक वजह है या फिर कुछ लोग इसके आदी हो गए हैं.

दुनिया के अधिकांश एस्केलेटरों में खड़े होने और चलने के लिए ‘बाएं चलिए’ नियम होता है, जिससे रफ़्तार बढ़ती है. अपवाद के तौर पर ऑस्ट्रेलिया में लोग दाहिने तरफ चलते हैं.

गैली ने कहा कि ये दिलचस्प है कि कई देशों में लोग बाएं चलते हैं लेकिन निश्चित तौर पर कोई नहीं कह सकता कि ऐसा क्यों होता है.

उन्होंने कहा, “ये आकस्मिक प्रभाव हो सकता है या फिर नकल करना भी वजह हो सकती है. हो सकता है कि सड़क पर बाएं गाड़ी चलाने से इसका कोई लेना-देना हो. संभव है कि इसके पीछे कोई औचित्य हो.”

उन्होंने कहा कि ब्रितानी लोग बायीं तरफ ड्राइव करते हैं और एस्केलेटर पर भी बायीं तरफ चलते हैं, लेकिन उन देशों में जहां लोग दाहिने गाड़ी चलाते हैं वहां दाहिने खड़े रहने का औचित्य हो सकता है.

लेकिन एक बात जो सभी शहरों में समान दिखी, वह यह कि एस्केलेटर पर खड़े लोग पीछे वालों का रास्ता रोकते हैं.

दलील

गॉकर के लिए लिखने वाले और नियमित रूप से न्यूयॉर्क सबवे का इस्तेमाल करने वाले हेमिल्टन नोलन कहते हैं, “चलने में सक्षम लोग एस्केलेटर पर खड़े होकर पीछे से आने वाले लोगों का रास्ता रोकते हैं.”

उन्होंने कहा, “हो सकता है कि इनकी वजह से पीछे वालों की ट्रेन छूट जाए. ऐसे में लोगों को अगली ट्रेन का इंतज़ार करना पड़ेगा और उनका समय बर्बाद होगा. हममें से कोई भी व्यक्ति जीवन का एक क्षण भी नहीं गंवाना चाहता.”

लेकिन एस्केलेटर पर खड़े रहने वालों लोगों की अपनी दलील है. वो कहते हैं कि चलने वालों को संयम रखने की जरूरत है क्योंकि उनके लिए एस्केलेटर काम कर रही है.

एक फोरम पर एक व्यक्ति ने कहा, “अगर उन्हें इतनी जल्दी है तो वो सीढ़ियों का इस्तेमाल क्यों नहीं करते? अगर एस्केलेटर खचाखच भरी होती है, तब भी ऐसे लोग आगे निकलने की कोशिश करते हैं और ऐसा न कर पाने पर अपना रोना रोते हैं.”

एस्केलेटरों पर बहुत कम दुर्घटनाएं होती हैं. बीजिंग में 2011 में एस्केलेटर के अचानक दिशा बदलने से एक व्यक्ति की मौत हो गई थी और कई घायल हो गए थे. लोगों के कपड़े और बाल फंसने की भी कई घटनाएं हुई हैं, लेकिन इसमें हताहत होने के मामले न के बराबर हैं.

अगर आप एस्केलेटर से बचना चाहते हैं, तो आपको अमरीका के व्योमिंग प्रांत का रुख़ करना चाहिए जहां केवल दो एस्केलेटर हैं वो भी एक बैंक में.

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