इसराइल-फ़लस्तीन वार्ता दोबारा शुरू होगी

पश्चिमी तट
Image caption पश्चिमी तट में यहूदी बस्तियाँ विवाद का बड़ा कारण है

इसराइली और फ़लस्तीनी वार्ताकर सोमवार को वाशिंगटन में दोबारा शांतिवार्ता शुरू करेंगे. अमरीकी विदेश मंत्रालय ने यह घोषणा की है.

यह वार्ता 2010 से बंद पड़ी थी. अमरीका के विदेश मंत्री जॉन केरी पिछले कई महीनों से कूटनीतिक प्रयासों में लगे थे.

अमरीका की ये घोषणा इसराइल की इस घोषणा के कुछ घंटों बाद आई है जिसमें इसराइली कैबिनेट ने फलस्तीनी क़ैदियों को रिहा करने को मंज़ूरी दे दी है.

अमरीकी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता जेन साकी ने कहा है कि शुरुआती बातचीत सोमवार को होगी और मंगलवार को जारी रहेगी.

उन्होंने बताया, "जॉन केरी ने इसराइली प्रधानमंत्री और फ़लस्तीनी राष्ट्रपति महमूद अब्बास को रविवार को फ़ोन किया था. दोनों इस बात पर सहमत थे कि इस बातचीत से ये तय करने का अवसर मिलेगा कि आने वाले महीनों में वार्ता को कैसे आगे बढ़ाया जाए."

इससे पहले ख़बर आई थी कि इसराइली कैबिनेट ने शांति प्रक्रिया शुरू करने के अमरीकी प्रयासों के तहत कई फ़लस्तीनी क़ैदियों को रिहा करने को मंज़ूरी दे दी है.

प्रधानमंत्री बेन्यामिन नेतान्याहू के इस विवादास्पद प्रस्ताव पर कैबिनेट बंटी हुई थी. 13 मंत्रियों ने प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया जबकि सात लोगों ने इसका विरोध किया.

कैबिनेट ने उस विधेयक को भी अपना समर्थन दिया जिसमें फ़लस्तीनियों के साथ किसी भी शांति समझौते के लिए जनमत संग्रह की शर्त रखी गई है.

'कड़े फ़ैसले'

अगर शांति वार्ता सही दिशा में आगे बढ़ती है तो लंबे समय से इसराइली जेलों में बंद 104 क़ैदियों को कई महीनों में चार चरणों में रिहा किया जाएगा.

फ़लस्तीनी क़ैदियों को रिहा करने के प्रस्ताव पर हुई वोटिंग में दो मंत्रियों ने हिस्सा नहीं लिया जबकि समाचार एजेंसी एपी को सूत्रों के हवाले से मिली ख़बर के मुताबिक़ प्रधानमंत्री लिकुड पार्टी के दो मंत्रियों ने प्रस्ताव के विपक्ष में मतदान किया.

जिन क़ैदियों को रिहा करने के प्रस्ताव को मंजू़री दी गई है उनमें से कुछ ऐसे चरमपंथी हमलों के दोषी हैं जिनमें इसराइली नागरिकों की जान गईं थीं और उन्हें 30 साल तक की सज़ा सुनाई गई है.

रविवार को हुई बैठक से ठीक पहले प्रधानमंत्री नेतान्याहू ने कहा, "ये क्षण मेरे लिए आसान नहीं है, ये कैबिनेट मंत्रियों के लिए भी आसान नहीं है और ख़ासतौर पर ये उन लोगों के परिवारों के लिए भी आसान नहीं है, जिन्होंने अपनों को खोया है. मगर कुछ मौके़ ऐसे होते हैं जब राष्ट्रहित के लिए कठिन फैसले लेने पड़ते हैं और ये ऐसा ही मौक़ा है."

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'राजनीतिक ग़लती'

बैठक से पहले उप रक्षा मंत्री डैनी डैनन ने इस प्रस्ताव की निंदा की और इसराइली रेडियो पर कहा, "ये एक राजनीतिक ग़लती है, ये एक नैतिक ग़लती है. हम चरमपंथियों को यही संदेश दे रहे हैं कि हम आख़िरकार उन्हें हीरो बनाकर छोड़ देते हैं."

मगर फ़लस्तीनी क़ैदियों के अधिकार के लिए संघर्ष करने वाले समूह के प्रमुख कडूरा फेयर्स ने कहा कि "जब तक क़ैदी रिहा नहीं हो जाते तब तक कोई वार्ता नहीं होगी."

Image caption फलस्तीनी राष्ट्रपति महमूद अब्बास ने भी किसी भी शांति समझौते पर जनमत संग्रह की बात कही है.

प्रधानमंत्री नेतान्याहू के दफ्तर से जारी बयान में कहा गया था कि, "ये ज़रूरी है कि ऐसे ऐतिहासिक फै़सलों पर देश के हर नागरिक को प्रत्यक्ष रूप से वोट करना चाहिए. वार्ता के बाद जो भी नतीजे निकलेंगे उस पर जनमत संग्रह कराया जाएगा."

फ़लस्तीनी इस बात पर बार-बार ज़ोर देते रहे हैं कि इसराइल 1967 से पूर्व की युद्धविराम रेखा को 'फ़लस्तीनी राज्य' की सीमा माने लेकिन नेतान्याहू की गठबंधन सरकार में शामिल दक्षिणपंथी सदस्य इसका विरोध करते रहे हैं.

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