लद गए दफ़्तर में 'सेक्स और रोमांस' के दिन

सेक्स और ऑफिस

क्या दफ़्तरों में साथ साथ काम करने वाली महिलाओं और पुरुषों के बीच 1950 और 60 के दशक की उन्मुक्तता, चुहल, फ़्लर्ट, प्रेम और सेक्स का दौर अब समाप्त हो गया है?

इस मामले में अलग-अलग देशों में अलग अलग स्थितियाँ हैं पर दूसरे विश्वयुद्ध के बाद अमरीका के दफ़्तरों में तो पुरुष और महिला कर्मियों के बीच सेक्स के चर्चे और यहाँ तक कि यौन शोषण के मामले काफ़ी बढ़ गए थे.

वहाँ एक टीवी धारावाहिक मैड मैन चलता था जिसमें दिखाया गया था कि पचास और साठ के दशक में ऑफ़िसों में कैसी मस्ती होती थी. इस सीरियल में शराब, सिगरेट, रंग-बिरंगी ब्रा और सबसे ज्यादा सेक्स के क़िस्से होते थे.

हम उस दौर के ऑफिसों की तुलना आज के अपने ऑफिस से करें तो हमें निराशा ही हाथ लगेगी. आज ऑफिस में न तो हम शराब पी सकते हैं, न प्रेम का प्रदर्शन कर सकते हैं और न ही अपने सहकर्मियों के साथ फ्लर्ट कर सकते हैं.

अभी कुछ ही दिन पहले मेरे एक सहकर्मी को मेरी शर्ट पसंद आई लेकिन वो तत्काल ही मेरी शर्ट की तारीफ करने के लिए खेद प्रकट करने लगे !

पिछले साठ सालों में कार्यालयों में सेक्स को लेकर हमारा नजरिया बहुत ज्यादा बदल गया है. पहले हम इसे स्वीकार नहीं करते थे, फिर इसका मजा लेने लगे, फिर इसे खारिज करने लगे और अंततोगत्वा हमने इस पर पूरी पाबंदी लगा दी.

ऑफिस में कैसा व्यवहार करें इसे लेकर लोगों का नजरिया हमेशा बदलता रहा है. मैं यह नहीं समझ पाती कि हम इस विषय पर इतनी उहापोह में क्यों रहते हैं?

ऑफिस में किसी पुरुष के "गलती" करने की संभावना हमेशा बनी रहती है लेकिन मामला जब किसी महिला से जुड़ जाए तो गलती की संभावना बहुत ज्यादा बढ़ जाती है.

और इस गलती का सबसे आसान शिकार कौन होता है ? जाहिर है, बॉस की सेक्रेटरी.

'ऑफिस वाइफ'

बीसवीं सदी की शुरुआत तक सेक्रेटरी शब्द का एक खास अर्थ रूढ़ हो गया था. लड़कियाँ बड़ी होकर सेक्रेटरी बनना चाहती थी. लड़के सोचते थे कि वो किसी सेक्रेटरी से शादी करेंगे.

सेक्रेटरी के लिए वो लड़की सबसे आदर्श समझी जाती थी जो “ऑफिस वाइफ” बन सके. एक ऐसी सेक्रेटरी जो ऑफिस में वही जिम्मेदारियाँ निभा सके जो काम बीवी घर में निभाती है.

उस जमाने की सेक्रेटरी के लिए आवश्यक योग्याताओं का लिस्ट देखने पर ऐसा लगता है कि यह लिस्ट सफल वैवाहिक जीवन के नुस्खे की सूची हो !

सेक्रेटरी की नौकरी काफी मुश्किल भरी होती थी. सेक्रेटरी को न केवल अपने बॉस को खुश करना होता था बल्कि बॉस की बीबी को भी खुश रखना होता था.

‘सेक्स एंड दि ऑफिस’ की लेखिका जूली बेरेबिट्स्की कहती हैं, “असल तनाव तो बीवी और सेक्रेटरी के बीच ही होता था. बीवी सेक्रेटरी से जलती थी और सेक्रेटरी को लगता था कि बीवी बॉस के पैसा फालतू उड़ाती है.”

जूली बताती हैं, “ऑफिस वाइफ को बॉस की वाइफ के लिए जन्मदिन का तोहफा भी खरीदना होता था. असल सवाल तो यही होता था कि बॉस के लिए कौन ज़्यादा काम करता है, घर वाली वाइफ या ऑफिस वाली वाइफ.”

बॉस की दीवानी

ऐसा भी नहीं है कि मर्द ही अपने सेक्रेटरी को फंसाने के फिराक में रहते थे. कई बार मामला इसके उलट भी होता था.

1930 के दशक में न्यूयॉर्क शहर में काम करने वाली एक सेक्रेटरी बताती हैं कि वो अपने बॉस को चूमने के लिए बेचैन रहती थी.

उसने लिखा है कि, “कई बार बॉस के नोट्स लेते समय कुछ खास शब्दों से मैं सिहर उठती थी. वो शब्द मुझे कामुक लगते थे, जैसे बॉल-बेयरिंग शब्द मुझे उत्तेजित करता था. मुझे मेरे बॉस अच्छे लगते थे. वो मुझे चूमते तो मुझे अच्छा लगता लेकिन वो मेरे पास ही नहीं आते थे.”

कोनी निकोलस 1940 के दशक में इंडियाना के एली लीली कंपनी में सेक्रेटरी थीं. उनका उनके बॉस के साथ लम्बा और गहरा अफेयर चला. लेकिन उनकी कहानी का दुखद अंत हुआ. उनके बॉस ने नई कम उम्र सेक्रेटरी के लिए उन्हें छोड़ दिया.

निकोलस को बॉस की यह बात नागवार गुजरी. उन्होंने बॉस को तीन गोली मारी और बॉस की सफेद कैडिलैक कार लेकर चलती बनीं. बाद में उन्होंने आत्महत्या की असफल कोशिश की. उनका यह सफर अंततः जेल में जाकर समाप्त हुआ.

आश्चर्यजनक तो यह है कि उस वक़्त इस मामले में वही हुआ जो आजकल होता है. कंपनी इस मामले के असल कारणों तक नहीं पहुँची. इस घटना के बाद कंपनी ने माना कि इस घटना के लिए सेक्स के बजाय सफेद कैडिलैक कार जिम्मेदार है. कंपनी का फरमान हुआ कि अब एली लीली में कोई भी सफेद कैडिलैक का प्रयोग नहीं करेगा. जिनके पास पहले से सफैद कैडिलैक कार है उन्हें उसे किसी और रंग में रंगवाना होगा !

बदलता नजरिया

1950 और 1960 के दशक तक इस मामले में लोगों का नजरिया बदलने लगा था. पहले शादी के बाद महिलाओं का करियर थम जाता था. अब शादी के बाद नौकरी न करने की परंपरा टूटने लगी थी. शादी के बाद भी करियर बनाने की संभावनाएँ बढ़ने लगी थीं.

विज्ञापन और प्रकाशन जगत में महिलाएँ सेक्रेटरी से ऊपर के पदों पर भी काम करने लगी थीं. रोना जैफ अपने आत्मकथात्मक उपन्यास “दि बेस्ट ऑफ एवरीथिंग” में 1950 के दशक में न्यूयॉर्क में सेक्रेटरी के रूप में काम करने के अपने अनुभव के बारे में बताया है.

जैफ लिखती हैं कि शाम पाँच बजे के बाद शराब का दौर शुरू हो ही जाता था और यह दुविधा अक्सर बनी रहती थी कि जब आपका बॉस आपके घुटने पर हाथ रखेगा तो क्या आप यह चाहेंगे कि वह अपना हाथ और ऊपर ले जाए या फिर आप अपना घुटना उसकी ठुड्ढी पर दे मारें.

कॉस्मोपोलिटन पत्रिका की पूर्व संपादक हेलेन गर्ली ब्राउन के पास जैफ की इस दुविधा का जवाब है.

सेक्स अपील

Image caption हेलेन की किताब ने अमरीका में धूम मचा दी थी.

हेलेन कहती हैं, “नौकरी में बेहतर अवसर पाने के लिए अपनी सेक्स अपील का प्रयोग मुझे जरा भी गलत नहीं लगता.”

हेलेन को मैडिसन एवेन्यू में कॉपी राइटर की शानदार नौकरी पाने से पहले 17 जगहों पर सेक्रेटरी की नौकरी करनी पड़ी थी.

हेलेन ब्राउन की पहली किताब “सेक्स एंड दि सिंगल गर्ल” की पहले तीन हफ्ते में दो लाख से ज़्यादा प्रतियाँ बिकी थीं. 1962 में प्रकाशित उनकी इस किताब को लोगों को प्यार और नफरत दोनों का सामना करना पड़ा. इसके प्रकाशन के पचास साल बाद भी हेलेन की किताब पढ़ने वाले को प्रभावित करती है.

हेलेन ने अपने किताब में लिखा है, “मैनेजमेंट के जो लोग यह सोचते हैं कि ऑफिस में रोमांस से काम का नुकसान होता है ऐसे लोगों का दिमाग फिर गया है. अपने बॉस से प्यार करने वाली लड़की हफ्ते के सात दिन कड़ी मेहनत करने बाद भी चाहती है कि काश कि वो और ज़्यादा काम कर पाती. भले ही यह उस लड़की के लिए मुश्किल वाली बात हो लेकिन बिजनेस के लिए तो यह फायदे वाली बात होती है.”

हेलेन का लिखा पढ़कर मुझे कुछ ही दिन पहले एक अखबार के संपादक की कही बात याद आ गई. उन संपादक का कहना था कि जब उनके कर्मचारियों के बीच रोमांस चलता है तो उन्हें अच्छा लगता है क्योंकि ऐसे में कर्मचारी ज़्यादा मेहनत करते हैं.

नारीवादी आंदोलन

1970 के दशक में नारीवादी आंदोलन जोर पकड़ने लगे थे. 1977 में सेक्रेटरियों के एक समूह ने एक प्रतियोगिता आयोजित की. इस प्रतियोगिता का उद्देश्य यह पता करना था कि अमरीका में बॉस द्वारा सेक्रेटरी से की जानी वाले सबसे अपमानजनक मांग क्या है.

इस प्रतियोगिता के अंतिम चरण में पहुँची प्रतिभागियों ने बॉस की जिन माँगों को सबसे अपमानजनक माना था उनमें ऑफिस का सामान चुराकर बॉस के घर पहुँचाना, मूँछे बनाने के पहले, उसके दौरान और उसके बाद बॉस की तस्वीर खींचना, बॉस के नकली दांत साफ करना और बॉस की बीबी तथा नवजात बच्चे को अस्पताल से लेने जाना.

लेकिन अब महिलाएँ पुरुषों के समान काम करने लगी थीं. गैर-बराबरी का व्यवहार महिलाओं को अब स्वीकार नहीं था. 1975 में न्यूयॉर्क की एक अदलात में पहली बार “ यौन शोषण” शब्द सुना गया. छेड़छाड़ और कामुक टिप्पणियाँ अब अस्वीकार्य हो गईं.

“यौन शोषण” को कानूनी अपराध माना गया. कंपनियों ने अपने करार में इस बात का जिक्र करना शुरू कर दिया कि उनके कर्मचारी किसके साथ रोमांस कर सकते हैं और किसके साथ नहीं कर सकते हैं.

ज़्यादा फर्क नहीं

मैं खुद एक इंश्योरेंस कंपनी की तीन महिला बोर्ड ऑफ डाइरेक्टर्स में से एक हूँ. मुझे नहीं लगता है कि आज के ऑफिसों में कामुकता का माहौल कम हुआ है.

दूसरी तरफ पुरुषों से कामुकता के किस्से तो हम सुनते हैं लेकिन विभिन्न कंपनियो की महिला बॉस द्वारा अपने जूनियर पुरुष कर्मचारियों का किया जाना वाले शोषण के बारे में अभी भी कोई बात नहीं होती. महिला बॉसों से जुड़े किस्से तो कई हैं लेकिन असली कहानियाँ अभी सामने नहीं आती हैं.

लेकिन सेक्स और ऑफिस से जुड़े मामले में ऐसा ही होता रहा है. ऐसे मामले तब तक सामने नहीं आते जब तक कि कोई जूनियर कर्मचारी सीधे अपने बॉस के सिर में गोली मार दे या फिर कंपनी के ईमेल से कोई सामूहिक मेल लिख दे.

(यह लेख लेखिका लूसी केलावे के कार्यक्रम हिस्ट्री ऑफ ऑफिस लाइफ पर आधारित है. बीबीसी रेडियो 4 के लिए इस कार्यक्रम का निर्माण रसेल फिंच ने किया था.)

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