'तीसरे विश्व युद्ध' के लिए महारानी का भाषण

ब्रिटेन की महारानी
Image caption तीसरे विश्व युद्ध की आशंका के वक्त ब्रिटिश महारानी देने वाली थी भाषण

ब्रिटेन की महारानी का एक ऐसा भाषण सामने आया है जो उन्होंने तीसरा विश्व युद्ध शुरू होने की आशंका के मद्देनजर तैयार किया था.

अमेरिका और सोवियत संघ के बीच शीत युद्ध चरम पर पहुंचने के कारण 1980 के दशक में महारानी को तीसरे विश्व युद्ध की आशंका सताने लगी थी.

उस वक्त की परिस्थिति को देखते हुए वह ब्रिटेन के लोगों से यह कहने वाली थी कि अगर तीसरा विश्व युद्ध होता है और परमाणु हमले किए जाते हैं तो वे ईश्वर की प्रार्थना करें और एकजुट बने रहें.

साल 1983 के दस्तावेजों से ये बातें सामने आई हैं.

एक कृत्रिम युद्धाभ्यास के दौरान काल्पनिक प्रसारण के लिए तैयार महारानी के भाषण की इस स्क्रीप्ट में ब्रितानी राजशाही ने उस वक्त के खतरे को इतिहास का सबसे बड़ा खतरा करार दिया था.

'युद्ध का पागलपन'

इसमें उस वक्त रॉयल नेवी का हिस्सा रहे महारानी के बेटे राजकुमार एंड्रू की भी चर्चा है. ब्रिटेन में 30 साल पुराने दस्तावेजों को सार्वजनिक करने का नियम है और इसी नियम के तहत इन्हें सार्वजनिक किया गया है.

वैसे ये सभी बातें काल्पनिक हैं. अगर इस भाषण को शुक्रवार, 4 मार्च 1983 को प्रसारित किया जाता तो महारानी अपने भाषण में तीसरे विश्व युद्ध के खतरे से निपटने के लिए तैयार रहने को कहतीं.

Image caption स्क्रिप्ट में राजकुमार एंड्रू का भी ज़िक्र किया गया है

भाषण के इस आलेख में लिखा गया है, ‘‘एक बार फिर युद्ध का पागलपन दुनिया पर छाने लगा है और हमारे बहादुर देश को इससे होने वाली कठिनाइयों से निपटने के लिए निश्चित तौर पर तैयार रहना होगा.’’

इस स्क्रीप्ट में लिखे गए एक पर्सनल नोट में कहा गया है, ‘‘मैंने अपने पति के साथ इन परिस्थितियों से निपटने के लिए देश की सेवा में लगे लोगों के परिवार वालों की पीड़ा के बारे में चर्चा की है. मेरा बेटा एंड्रू इस वक्त अपनी यूनिट के साथ तैनात है और हम लगातार उनकी और उनके साथ तैनात अन्य लोगों की सुरक्षा के लिए प्रार्थना कर रहे हैं.’’

'युद्ध के बादल'

काल्पनिक युद्धाभ्यास में सोवियत संघ का प्रतिनिधित्व करने वाले ऑरेंज ब्लॉक और उसके वारसा संधि के साझेदारों ने ब्रिटेन पर एक रासायनिक हमला कर दिया था.

इसके जवाब में नाटो का प्रतिनिधित्व करने वाली ब्लू फोर्सेज ने सीमित परमाणु हमले किए, जिससे ऑरेंज सेना शांति के लिए तैयार हो जाती है.

दरअसल, सोवियत संघ के एक दक्षिण कोरियाई विमान को मार गिराए जाने के बाद दुनिया पर तीसरे विश्वयुद्ध के बादल मंडराने लगे थे. इस घटना में विमान में सवार 269 लोगों की मौत हो गई थी.

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