45 साल से अस्पताल में भर्ती....

  • 5 अगस्त 2013

ब्राज़ील के पाउलो हेनरीक़ मकादो ने अपनी लगभग पूरी ज़िंदगी अस्पताल में बिताई है.

बचपन में उन्हें पोलियो के कारण लकवा मार गया था और अब भी उन्हें सांस लेने के लिए 24 घंटे कृत्रिम उपकरण की ज़रूरत पड़ती है. बावजूद इसके उन्होंने कंप्यूटर एनिमेटर का प्रशिक्षण लिया है और अब वो अपनी ज़िदगी के बारे में एक टेलीविज़न सिरीज़ बना रहे हैं.

मकादो पिछले 45 सालों से अस्पताल में व्हीलचेयर पर पड़े हैं. उनका कहना है, "मेरे लिए यह अस्पताल ही मेरी दुनिया है. मेरे पास फुटबॉल और सामान्य खिलौनों से खेलने का विकल्प नहीं था लेकिन मैं अपनी कल्पनाशीलता का इस्तेमाल कर सकता था."

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उन्होंने दो साल की उम्र में अपनी मां को खो दिया था और फिर बचपन में उन्हें पोलियो हो गया.

अस्पताल में भर्ती होने के कुछ समय बाद ही उनकी नर्सिंग सहायक लिगिया मार्सिया फिज़ेटो ने वहाँ अपनी नौकरी शुरू की थी.

वो कहती हैं, "पोलियो से ग्रसित उन बच्चों को देखना बहुत बुरा अनुभव था. वे बिस्तर पर लेटे रहते थे और बहुत कम हरकत करते थे."

1970 के दशक में ब्राज़ील में पोलियो के शिकार बच्चों को एक विशेष उपकरण पर रखा जाता था और डॉक्टर ऐसे बच्चों को लेकर बहुत आशावान नहीं रहते थे. डॉक्टर मानते थे कि ये बच्चे दस साल से ज़्यादा ज़िंदा नहीं रहेंगे.

अपनी दुनिया

मकादो का चलना-फिरना सीमित था और उन्होंने अस्पताल में आसपास के दोस्तों में ही अपनी दुनिया खोज ली थी. उन्होंने कहा, "मेरे साथ एलियाना, पेड्रिन्हो, एंडरसन, क्लॉडिया, लूसियाना और तानिया थीं. वे सभी दस साल से ज़्यादा समय तक यहां रहे."

बचपन के भोलेपन में मकादो ने कभी नहीं सोचा था कि एक दिन वो सभी दोस्त जुदा हो जाएंगे. लेकिन 1992 तक कुछ बच्चों की तबियत बिगड़ती गई और एक के बाद एक मकादो के दोस्त बिछड़ते चले गए.

उन्होंने कहा, "वो मुश्किल समय था. हर एक दोस्त का जाना शरीर के किसी अंग के कट जाने के समान था. अब सिर्फ मैं और एलियाना रह गए थे."

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डॉक्टर भी इस बात को नहीं जानते हैं कि मकादो और एलियाना कैसे इतने लंबे समय तक बचे रहे हैं. मकादो हर दिन सुबह उठकर सबसे पहले वार्ड में अपनी पड़ोसन एलियाना ज़ागुई का चेहरा देखते हैं.

मकादो कहते हैं कि उनका रिश्ता अनूठा है. उन्होंने कहा, "कुछ लोग कहते हैं कि हम पति-पत्नी की तरह हैं लेकिन हम भाई और बहन की तरह हैं. हर दिन सुबह जब मैं उठता हूं तो इस बात को लेकर निश्चित होता हूं कि मेरी ताक़त एलियाना वहां मौजूद है. ये दोतरफा मामला है. मैं उन पर विश्वास करता हूं और वो मुझ पर विश्वास करती हैं."

झगड़ा

इसके बावजूद दोनों में हर दिन झगड़ा भी होता है. लेकिन मकादो इसे हंसी में उड़ाते हुए कहते हैं, "मुझे लगता है कि ये सामान्य बात है. बहन और भाई में या फिर किसी जोड़े में ऐसा होता है. लेकिन इससे किसी एक पक्ष की भावनाएं आहत नहीं होती हैं और अंत में हमारे बीच सुलह हो जाती है."

संक्रमण से बचने के लिए उन्हें अस्पताल में रहना पड़ता है. बाहर निकलना कम ही होता है. मकादो कहते हैं कि वो करीब 50 बार अस्पताल से बाहर निकले हैं.

चिकित्सा तकनीक में आए बदलावो के चलते अब भारी भरकम उपकरणों की जगह हल्की मशीनें आ गईं हैं और बढ़ती उम्र के कारण मकादो और एलियाना जोख़िम उठाने को तैयार हैं. यही वजह है कि हाल के वर्षों में उनका अस्पताल से बाहर निकलना बढ़ा है.

मकादो कहते हैं, "अस्पताल से बाहर घूमने के कुछ मौके यादगार बन गए हैं. पहली बार समुद्र देखना कुछ ऐसा ही अनुभव था. तब मैं 32 साल का था. मैंने कार का दरवाज़ा खोला और सामने समुद्र को देखा. मैंने सोचा वाह ये क्या है."

एलियाना ने भी पहली बार समुद देखा था. उन्होंने कहा, "मैंने तस्वीरों और फ़िल्मों में समुद्र तट देखा था और इस बारे में मेरे दिमाग में एक तस्वीर बनी थी. उन्होंने हमें वाहनों से बाहर उतारा. पाउलो व्हीलचेयर पर थे. उन्होंने मेरे बेड को बीच किनारे रेत में धकेल दिया."

पहली बार समुद्र के पानी को छूने के अहसास को याद करते हुए एलियाना कहती हैं, "हम ऐसे क्षणों का आनंद लेते हैं जिन्हें अधिकतर लोग हल्के में लेते हैं."

एलियाना लेखन कार्य करती हैं और उनकी किताब भी प्रकाशित हो चुकी है. साथ ही वो मुंह से कूंची पकड़कर पेंटिंग भी बनाती हैं.

छूट

मकादो और एलियाना लंबे समय से अस्पताल में हैं और यही वजह है कि अस्पताल ने उन्हें अपने ढंग से अपनी चीज़ों की रखने की छूट दे रखी है. कमरे में एलियाना की तरफ के हिस्से में खिलौने और किताबें हैं जबकि मकादो वाला हिस्सा फ़िल्मों से जुड़ी चीजों से भरा है. साथ ही उनके पास दो शक्तिशाली कम्प्यूटर भी हैं जिनके ज़रिए वो कम्प्यूटर एनिमेटर का प्रशिक्षण हासिल कर सकें.

मकादो ने एलियाना की लिखी एक किताब पर आधारित थ्री डी फ़िल्म बनाने का ज़िम्मा उठाया है जिसके लिए उन्होंने 65000 डॉलर का फंड भी ऑनलाइन कैंपेन से जुटा लिया है.

साथ ही वो एलियाना और अपने दोस्तों के साथ बिताए गए पलों को भी पर्दे पर उतारना चाहते हैं. उन्होंने कहा, "मैं इसे आकर्षक बनाना चाहता हूं जिसमें बच्चों की शरारतें भरी हों. मुझे लगता है कि मेरे पात्र वास्तविक हैं क्योंकि उन्हें एक ऐसे व्यक्ति ने गढ़ा है जो ख़ुद शारीरिक रूप से सक्षम नहीं है. मैं जानता हूं कि उन्हें किस तरह की परेशानी का सामना करना पड़ा है."

कार्टूनिस्ट ब्रुनो सजेसे पिछले दो सालों से मकादो को उनके प्रोजेक्ट में मदद कर रहे हैं. ब्रुनो ने कहा कि जब वो पहली बार अस्पताल आए थे तो मकादो और एलियाना के कमरे के शांतिपूर्ण माहौल को देखकर दंग रह गए थे.

उन्होंने कहा, "अस्पताल में मरीज़ गंभीर हालत में थे, उनके परिजन दुखी थे, डॉक्टर और नर्सें तेज़ी से इधर-उधर जा रहे थे. लेकिन जब मैं मकादो के कमरे में घुसा तो वहां की दुनिया ही अलग थी."

ब्रुनो ने कहा कि मकादो हमेशा चुटकुले सुनाते रहते हैं जिससे काम में मदद मिलती है. उन्होंने कहा, "हमारे बीच जो भी बातचीत होती है उसकी झलक मकादो के एनिमेशन में दिखती है. ये उनके चरित्र को परिलक्षित करता है."

नर्सिंग सहायक लिगिया मार्सिया फिज़ेटो मकादो की उपलब्धियों पर गर्व करती हैं. उन्होंने कहा, "फ़िल्म बनाकर वो अपने मकसद को पूरा कर रहे हैं. वो अद्भुत काम कर रहे हैं और मैं उन्हें लेकर खुश हूं."

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