मिस्र: गतिरोध खत्म करने के लिए अमरीका ने दी दखल

  • 6 अगस्त 2013
Image caption मुस्लिम ब्रदरहुड पार्टी ने अमरीकी कोशिशों को नाकाफी बताया है

मिस्र में राजनीतिक संकट को दूर करने के लिए अंतरराष्ट्रीय राजनयिक प्रयास जारी हैं. इस बीच अमरीकी विदेश उप मंत्री विलियम बर्न्स ने जेल में मुस्लिम ब्रदरहुड के उप प्रमुख ख़ैरात अल-शातेर से मुलाकात की है.

वहीं अमरीकी सीनेटर जॉन मैक्केन और लिंडसे ग्राहम भी काहिरा पहुंच गए हैं और वो वहां दो दिन तक चलने वाली वार्ता में हिस्सा लेंगे.

गत तीन जुलाई को मोहम्मद मुर्सीको सत्ता से हटाए जाने के बाद से ही वहां बड़े पैमाने पर लोग प्रदर्शन कर रहे हैं.

मुर्सी को दोबारा राष्ट्रपति बनाने की मांग को लेकर हज़ारों लोग राजधानी काहिरा में प्रदर्शन कर रहे हैं. मुस्लिम ब्रदरहुड पार्टी के प्रवक्ता गेहाद अल हदाद का कहना है कि बातचीत में फिलहाल कोई प्रगति नहीं है.

"फिलहाल ऐसा नहीं लगता है कि कोई सकारात्मक हल निकल रहा है. हम इस बात पर ज़ोर दे रहे हैं कि कोई भी पहल या योजना संवैधानिक आधार पर तय की जाए. अभी तक एकमात्र सच्चाई जो हमें दिख रही है, वो ये कि हमसे ये कहा जा रहा है कि हम भी सैनिक विद्रोह की सच्चाई को स्वीकार कर लें."

अमरीकी प्रयास नाकाफी

अल हदाद संकट के समाधान के लिए अमरीकी प्रयासों से भी नाखुश हैं.

"उनकी प्रतिक्रिया बेहद नकारात्मक है. ऐसा लगता है कि वो ये समझते हैं कि ताकत ही लोगों की इच्छा को प्रेरित करती है. हम अपने सिद्धांतों पर कायम रहते हैं लेकिन वो परिस्थितियों के हिसाब से इस पर अमल करते हैं."

इस बीच ऐसी ख़बरें भी मिल रही हैं कि नई अंतरिम सरकार हिरासत में लिए गए मुस्लिम ब्रदरहुड के नेताओं को रिहा करने के लिए तैयार थी. साथ ही वो इस बात के लिए भी तैयार थी कि यदि वो अपना आंदोलन वापस लेते हैं तो उन्हें मंत्रिपरिषद में भी जगह दी जा सकती है.

हालांकि राष्ट्रपति के एक सलाहकार ने ऐसी किसी भी पेशकश से साफ इंकार किया है. वहीं मुर्सी के समर्थकों ने भी दोहराया है कि वो मुर्सी की वापसी से कम किसी चीज पर सहमत नहीं होंगे.

इस संघर्ष में कम से कम 100 मुर्सी समर्थकों की अब तक मौत हो चुकी है. मुर्सी को तो लोगों के कड़े विरोध के बाद रिहा कर दिया गया लेकिन उनके तमाम समर्थक अभी भी हिरासत में हैं.

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