मिस्र में हुई हिंसा पर कई देश नाराज़

मिस्र

मिस्र में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ़ की गई सैन्य कार्रवाई में सैकड़ों लोग मारे गए हैं और हज़ारों घायल हुए हैं. इन घटनाओं के बाद पूरे विश्व में तीव्र प्रतिक्रिया हुई है. कुछ देशों ने मिस्र की सैन्य कार्रवाई की निंदा की है जबकि कुछ अन्य देशों ने कहा है कि वो मिस्र की मजबूरी समझ सकते हैं.

संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने जताया अफसोस

संयुक्त राष्ट्र के महासचिव बान की मून के कार्यालय ने कहा कि उन्हें इस बात का गहरा अफ़सोस है कि मिस्र के अधिकारियों ने हिंसा का रास्ता चुना जबकि मिस्र की ज़्यादातर जनता शांतिपूर्वक अपने देश को समृद्धि और लोकतंत्र की राह पर आगे ले जाना चाहती है.

अमरीका ने कहा स्थिति निंदनीय है

अमरीका के विदेश मंत्री जॉन कैरी ने कहा है कि ये स्थिति “निंदनीय” है और मिस्र में चल रहे राजनीतिक समझौते के प्रयासों के लिए ये बड़ा झटका है.

कैरी ने कहा, “मिस्र के लोगों के लिए यह निर्णायक वक़्त है. हिंसा का रास्ता अस्थिरता, आर्थिक नुकसान और पीड़ा की तरफ़ ले जाता है.”

यूरोपीय संघ का कड़ा रुख

हालिया घटनाओं की कड़ी निंदा करते हुए यूरोपीय संघ की नीति प्रमुख कैथरीन ऐशटन ने कहा, “मिस्र की जनता और अंतरराष्टीय समुदाय के संयुक्त प्रयास से ही मिस्र सर्वसमावेशी लोकतंत्र की राह पर वापस आ सकता है.”

तुर्की, फ्रांस, डेनमार्क और ब्रिटेन का रुख

तुर्की के प्रधानमंत्री तैयब एर्दोगान ने इस “बेहद गंभीर नरसंहार” पर चर्चा के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की तत्काल बैठक कराने की मांग की है.

फ्रांस के राष्ट्रपति फ़्रांस्वा ओलांड ने मिस्र के राजदूत को पेरिस में मुलाकात के लिए बुलाया.

डेनमार्क ने मिस्र सरकार की दो परियोजनाओं को दी जा रही आर्थिक मदद को तत्काल रोक दिया. डेनमार्क ने कहा है कि वह यूरोपीय संघ से भी मिस्र को दी जाने आर्थिक मदद को बंद करने को कहेगा.

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री डेविड कैमरन ने कहा कि “हिंसा से किसी चीज का समाधान नहीं होता” और “सभी पक्षों को समझौता करने की जरूरत है.”

मिस्र सरकार की ज़रूरत

मिस्र में हुई ताज़ा घटनाओं पर प्रतिक्रिया देते हुए संयुक्त अरब अमीरात और बहरीन ने कहा है कि वो समझ सकते हैं कि व्यवस्था बनाए रखना मिस्र सरकार की जरूरत है.

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