क्या अपनों के हत्यारे को आप कभी माफ़ करेंगे?

  • 22 अगस्त 2013

किसी हत्यारे की जेल से रिहाई पीड़ित परिवार के लिए दुखदायी हो सकती है. लेकिन अमरीका के बिल पेल्के के लिए उनकी दादी की हत्या के दोषियों की रिहाई का मामला पूरी तरह अलग था. पेल्के ने न केवल उन्हें माफ़ कर दिया बल्कि वो नई जिंदगी शुरू करने में उनकी मदद भी करना चाहते हैं.

लोग कैसे अपनों के ख़िलाफ ऐसे घिनौने अपराधों को अंजाम देने वालों को माफ कर देते हैं?

मई 1985 में उस दिन पेल्के अपनी महिला मित्र के घर पर थे जब उन्हें अपनी नानी की हत्या की सूचना मिली. घर में लूटपाट भी की गई थी.

उनकी 78 साल की नानी रूथ पेल्के बाइबिल टीचर थीं और चार लड़कियों ने उनकी हत्या कर दी थी. इनमें से तीन को 25 से 60 साल तक की सजा मिली जबकि चौथी लड़की पौला कूपर को 11 जुलाई 1986 को मौत की सजा सुनाई गई.

शुरुआत में पेल्के को लगा कि कूपर को मिली सजा सही है. लेकिन अपनी नानी की हत्या के 18 महीने बाद उन्होंने पुनर्विचार करना शुरू किया.

परेशान

पेल्के ये सोचकर परेशान होने लगे कि कूपर की मौत के बाद उनके परिवार पर क्या बीतेगी, खासकर उनके दादा पर जो हर अदालती कार्रवाई में शामिल होते थे.

जिस दिन पौला कूपर को अदालत ने मौत की सज़ा सुनाई, उनके दादा की आखों में आँसू थे.

Image caption पेल्के किशोरों को मौत की सजा दिए जाने के ख़िलाफ़ अभियान चला रहे हैं.

पेल्के ने कहा, "उत्तर पश्चिम इंडियाना में हर कोई कूपर को मरते हुए देखना चाहता था लेकिन नानी इससे कभी सहमत नहीं होतीं."

पेल्के को लगा कि ईसाई धर्म का सख़्ती से पालन करने वाली उनकी नानी भी कूपर के प्रति करुणा और दया का भाव रखतीं.

अनुमति

पेल्के के परिवार के कुछ सदस्य खासकर उनके पिता इससे सहमत नहीं थे. इस कारण सालों तक पिता-पुत्र के रिश्ते तल्ख़ बने रहे. बावजूद इससे पेल्के ने अपना मन नहीं बदला.

पेल्के को जेल में कूपर से मिलने में आठ साल लग गए. आख़िरकार 1994 में 'थैंक्सगिविंग डे' के दिन वो कूपर से मिल पाए.

उन्होंने कहा, "मैंने अंदर जाकर उन्हें (कूपर को) गले लगाया और उनकी आंखों में आंखें डालकर कहा, मैंने तुम्हें माफ कर दिया है."

पेल्के हर सप्ताह कूपर से पत्र व्यवहार करते थे और 15 बार उससे जेल में मिलने भी गए लेकिन उन्होंने कभी अपराध के बारे में नहीं पूछा."

फायदा

वर्जीनिया के ईस्टर्न मैनोनाइट विश्वविद्यालय में रेस्टोरेटिव जस्टिस के प्रोफेसर हॉवर्ड जेर का कहना है कि जुर्म करने वालों और पीड़ितों को साथ लाने से दोनों पक्षों को फायदा हो सकता है.

वो कहते हैं कि इससे अपराधियों को एहसास होगा कि उनके कृत्य से पीड़ित परिवार पर क्या गुजरी है. जेर को ऐसा ही एक वाकया याद है जब उन्होंने 18 साल की कम उम्र की 14 लड़कियों का बलात्कार करने वालों एक व्यक्ति को एक पीड़िता से मिलवाया था.

उन्होंने कहा, "पीड़िता ने उससे कहा, तुम ऐसा कैसे कर सकते हो? तुमने मुझसे मेरा बचपन छीन लिया. अपराधी ने कहा कि उसे पहली बार यह एहसास हुआ कि उसने क्या किया है. महिला ने उसे माफ तो नहीं किया लेकिन इसके बाद उसे राहत महसूस हुई."

बलात्कार

Image caption व्हाइट कहती हैं कि बेटी के हत्यारे को माफ़ करने से उन्हें सुकून मिला है.

नवंबर 1986 में 26 साल की कैथी व्हाइट का दो लड़कों ने अपहरण करने के बाद बलात्कार किया और फिर उनकी हत्या दी. तब दूसरे बच्चा उनके गर्भ में था. कैथी की मां लिंडा अपनी बेटी के एक हत्यारे से मिली और उसे माफ कर दिया लेकिन इस प्रक्रिया में उन्हें 15 साल लग गए.

व्हाइट ने कहा कि बेटी की हत्या के बाद उन पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा था और उनकी जिंदगी पटरी से उतर गई थी.

उन्होंने कहा, "किसी माता-पिता के लिए अपने बच्चों को खोना सबसे बड़ा दर्द होता है. लेकिन मैं जिंदगी भर रोना नहीं चाहती थी और इस बारे में सोचकर अपनी जिंदगी खराब नहीं करना चाहती थी."

उन्होंने अपनी पोती को काउंसलिंग के लिए ले जाना शुरू किया. इसी से उन्हें मनोविज्ञान का अध्ययन करने की प्रेरणा मिली.

सवाल

उन्होंने कहा कि लोगों को ढ़ाढस बंधाकर उन्हें सुकुन मिलता है. साल 1997 में व्हाइट ने जेल में पढ़ाना शुरू किया और फिर उन्होंने अपनी बेटी के एक हत्यारे गैरी ब्राउन से मिलने का फ़ैसला किया.

व्हाइट अपनी 18 साल की पोती के साथ 2001 में जेल में ब्राउन से मिली. ब्राउन आजकल प्रोबेशन पर जेल से बाहर है और व्हाइट के संपर्क में है.

व्हाइट के पास अब भी कई सवाल हैं जो वो ब्राउन से पूछना चाहती हैं.

लिंडा व्हाइट की तरह बिल पेल्के भी पौला कूपर के संपर्क में रहना चाहते हैं. कूपर को अच्छे व्यवहार के कारण जून में रिहा कर दिया गया.

अभियान

Image caption अपनी रिहाई से पहले पौला कूपर जेल में.

उनकी मौत की सज़ा माफ हो गई है और जेल की सज़ा भी कम कर दी गई. पेल्के ने उनकी रिहाई के लिए अभियान चलाया था.

पेल्के ने कहा, "मैं उनकी रिहाई से खुश हूं. मुझे सालों से इस दिन का इंतजार था. मैं जीवन में आगे बढ़ने में उनकी मदद करना चाहता हूं. उसने कभी सेलफोन और कम्प्यूटर नहीं देखा है. कभी किसी चेक पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं और किसी नौकरी के लिए आवेदन नहीं किया है. वह जिंदगी से डरी हुई हैं."

कूपर को अभी पेल्के से मिलने की इजाजत नहीं है. पेल्के ने कहा कि जब कूपर को उनसे मिलने की अनुमति मिलेगी तो वो उसे खाना खिलाने ले जाएंगे और उसके लिए खरीदारी करेंगे.

उन्होंने कहा, "अगर आप बदले की आग में जलते रहेंगे तो ये आपके लिए नासूर बन जाएगा और आप अपनी जिंदगी तबाह कर देंगे. मुझे लगता है कि मैंने सही फ़ैसला किया."

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