मिस्र: पूर्व राष्ट्रपति मुबारक की रिहाई के आदेश

  • 21 अगस्त 2013
Image caption अदालत ने मिस्र के पूर्व राष्ट्रपति होस्नी मुबारक को बुधवार को रिहा करने का आदेश दिया.

मिस्र की एक अदालत ने पूर्व राष्ट्रपति होस्नी मुबारक को सशर्त रिहा किए जाने का हुक्म दिया है.

पूर्व राष्ट्रपति ने उनके खिलाफ़ चल रहे भ्रष्टाचार के मामले में अपील की थी. अदालत ने ये फ़ैसला उसी मामले में सुनाया है.

हालांकि ये साफ़ नहीं है कि उन्हें कब रिहा किया जाएगा क्योंकि सरकारी वकील इस मामले में फ़ैसले के खिलाफ़ अपील कर सकते हैं.

दूसरी ओर मुबारक के वकीलों का कहना है कि उन्हें गुरूवार को भी जेल से रिहा किया जा सकता है.

उनके वकील फरीद अल-दीब ने बताया कि, "संभव है कि कल" उनकी रिहाई हो जाए. मुबारक के वकीलों का कहना है कि वो मुक़दमा शुरू होने से पहले की लंबी अवधि क़ैद में बिता चुके हैं.

बदलाव के संकेत

Image caption मिस्र में अपदस्थ राष्ट्रपति मोहम्मद मोर्सी की रिहाई के लिए उग्र प्रदर्शन जारी हैं.

बीबीसी संवाददाता का कहना है कि जिन लोगों ने मुबारक को सत्ता से उखाड़ फेंकने के लिए आंदोलन में हिस्सा लिया था, उनके लिए ये एक तरह का सांकेतिक धक्का है.

मुबारक ने 2011 में उन्हें सत्ता से बेदख़ल करने के लिए हुए विद्रोह के दौरान प्रदर्शनकारियों को मारने में मिलीभगत के आरोपों से मुक्त किए जाने की अपील भी की है.

मिस्र के इस 85 वर्षीय पूर्व राष्ट्रपति को पिछले साल आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई गई थी, लेकिन बाद में उनकी अपील पर दोबारा सुनवाई का आदेश दिया गया था.

इस मामले के दोबारा सुनवाई मई में शुरू हुई, लेकिन मुबारक इस मामले में सुनवाई से पहले अधिकतम जितनी सज़ा दी जा सकती थी, उसे अधिक वक्त वह पहले ही कैद में गुज़ार चुके हैं.

मुबारक के वकीलों और न्यायिक सूत्रों ने बताया कि अदालत ने बुधवार को मुबारक की रिहाई के आदेश दिए.

नए आरोप

Image caption होस्नी मुबारक की रिहाई होती है तो इससे सेना को मजबूती मिलेना का अनुमान है.

अदालत ने यह फ़ैसला उन आरोपों की सुनवाई के दौरान दिया, जिनमें कहा गया था कि पूर्व राष्ट्रपति ने सरकारी प्रकाशक अल-अहराम से उपहार लिए थे.

अभी तक यह साफ़ नहीं है कि क्या वह जेल से तत्काल रिहा हो जाएंगे, क्योंकि उन्हें कैद में रखने के इरादे से सरकारी वकीलों ने उन पर कुछ नए आरोप लगाए हैं.

विश्लेषकों का कहना है कि अगर मुबारक रिहा होते हैं तो कई लोग इसे सैन्य शासन की वापसी के रूप में देखेंगे.

मिस्र इस समय आपातकालीन स्थिति से गुजर रहा है और राष्ट्रपति मोहम्मद मोर्सी को सेना के हाथों अपदस्थ किए जाने का विरोध कर रहे प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग में काफ़ी लोगों की जान जा चुकी है.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए यहां क्लिक करें. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

संबंधित समाचार