क्या मिस्र के राष्ट्रपति मुबारक जल्द रिहा हो पाएंगे?

होस्नी मुबारक़

मिस्र की एक अदालत अपदस्थ राष्ट्रपति होस्नी मुबारक को रिहा किए जाने की एक याचिका पर फ़ैसला सुनाने वाली है.

होस्नी मुबारक पर वर्ष 2011 के विद्रोह में प्रदर्शनकारियों की हत्या में शामिल होने के आरोप में मुक़दमा चल रहा है.

लेकिन मुबारक के वकीलों की उम्मीद है कि भ्रष्टाचार के आरोपों से बरी होने के बाद उन्हें रिहा कर दिया जाएगा.

उधर यूरोपीय संघ के विदेश मंत्री फ़ैसला करने वाले हैं कि क्या मिस्र को दिए जाने वाले अरबों यूरो के कर्ज़ में कटौती की जाए या नहीं.

यूरोपीय संघ ने पिछले महीने राष्ट्रपति मोहम्मद मोर्सी को सेना-समर्थित अंतरिम सरकार द्वारा अपदस्थ किए जाने के बाद इस्लामी दलों के कार्यकर्ताओं पर बल प्रयोग किए जाने की कड़ी आलोचना की है.

दूसरी ओर मिस्र के कॉप्टिक चर्च की एक वेबसाइट को हैक कर दिया गया है. इसके पीछे मोर्सी समर्थकोंका हाथ माना जा रहा है.

देरी

पच्चासी वर्षीय मुबारक को जून 2012 में दोषी करार दिया गया था. उन पर वर्ष 2011 में प्रदर्शनकारियों की हत्या की साज़िश रचने का आरोप लगाया गया था. उन्हें आजीवन कारावास की सज़ा दी गई थी.

जनवरी 2013 में उनकी सज़ा के विरोध में दायर की गई अपील को बरकरार रखा गया और मामले में दोबारा मुकदमा चलाने के आदेश दिए थे.

मुक़दमा मई में शुरू हुआ लेकिनमुबारक मुक़दमा शुरू होने से पहले दी जाने वाली अधिकतम कारावास की सज़ा भोग चुके हैं

मुबारक़ के वकील फ़रीद अल-दीब ने उम्मीद जताई कि उनके मुवक्क़िल को भ्रष्टाचार के एक आखिरी मामले में बरी किए जाने के बाद रिहा कर दिया जाएगा.

उधर माना जा रहा है कि सरकारी वकील इस अपील का विरोध करेंगे जिससे मुबारक की रिहाई में कुछ दिनों की देरी हो सकती है.

भ्रष्टाचार का मामला उन दावों से जुड़ा है जिनमें कहा गया था कि पूर्व राष्ट्रपति ने सरकारी प्रकाशक अल-अहराम से उपहार लिए थे.

सफ़ाई

Image caption पिछले हफ़्ते सुरक्षाबलों के बल प्रयोग करने पर कई सौ लोग मारे गए थे

संवाददाताओं का कहना है कि मुबारक के परिवार ने उन कथित उपहारों की कीमत वापस लौटा दी है जिससे मुबारक के वकीलों का विश्वास बढ़ा है कि उन्हें जल्द ही छोड़ दिया जाएगा.

फ़रीद अल-दीब ने रॉयटर्स टीवी से बातचीत में कहा, “मैं इस बारे में अपनी सफ़ाई पेश करूँगा, और अगर ख़ुदा ने चाहा, उन्हें अस्थायी नज़रबंदी में रखने का कोई कारण नहीं होगा.”

विश्लेषकों का कहना है अगरमुबारक को रिहा किया जाता है तो कई लोग इसे सेना द्वारा 2011 के विद्रोह के बाद उठाए कदमों को वापस लेने की शुरुआत के तौर पर देखेंगे.

मिस्र में आपातकाल की स्थिति है और सेना ने पूर्व राष्ट्रपति मोर्सी को अपदस्थ किए जाने के बाद इस्लामी पार्टियों के खिलाफ़ बल-प्रयोग किया है.

पिछले हफ़्ते सुरक्षाबलों के बल प्रयोग करने पर कई सौ लोग मारे गए थे.

इसकी दुनिया भर में आलोचना की गई थी.

मिस्र से रिश्तों को लेकर ब्रसेल्स में यूरोपीय संघ के विदेश मंत्रियों की बैठक होने वाली है.

यूरोपीय संघ ने कहा है कि वो मिस्र को पाँच अरब यूरो (करीब 425 अरब भारतीय रुपए) की आर्थिक सहायता देने पर पुनर्विचार कर रहा है.

अमरीका ने मिस्र के साथ पहले ही नौसेना अभ्यास को स्थगित कर दिया हैं. अमरीका पर दबाव है कि वो मिस्र को दी जाने वाली $1.3 अरब डॉलर (करीब 8.3 अरब रुपए) में कटौती करे.

मंगलवार को राष्ट्रपति ओबामा ने इस बारे में बैठक भी की लेकिन उसका कोई नतीजा नहीं निकला.

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