अमरीका मज़बूत, एशियाई अर्थव्यवस्थाएं धराशाई

  • 22 अगस्त 2013
रुपया

भारत ही नहीं एशिया की कई विकासशील अर्थव्यवस्थाएं इस आशंका से पतली हुई जा रही हैं कि अमरीका अपने बॉन्ड ख़रीद कार्यक्रम को कम करने वाला है.

इंडोनेशिया, थाइलैंड और फ़िलीपींस में शेयरों ने ग़ोता लगा लिया है. फ़िलीपींस का स्टॉक एक्सचेंज तो 6% तक गिर गया है.

भारत में रुपया डॉलर के मुकाबले 65 तक गिर गया तो इंडोनेशिया का रुपिया 2009 से अब तक के निम्नतम स्तर पर आ गया है.

अमरीकी केंद्रीय बैंक बाज़ार में तरलता बढ़ाने के लिए मौद्रिक प्रोत्साहन कार्यक्रम चला रहा है जिसके तहत धन का प्रवाह एशिया में हुआ है और इससे पिछले कुछ सालों में चीज़ों की कीमत बढ़ गई है.

न्यूनतम स्तर पर

अमरीकी केंद्रीय बैंक, फ़ेडरल रिज़र्व, की जुलाई बैठक के रिकॉर्ड (मिनट्स) से बुधवार को पता चला कि अधिकारी प्रतिमाह 55.50 खरब के बॉन्ड खरीद के कार्यक्रम को कम करने पर "सामान्यतः सहमत" थे.

हालांकि इन रिकॉर्ड्स से यह पता नहीं चला कि ख़रीद में कटौती कब शुरू की जाएगी लेकिन विश्लेषकों का कहना है कि यह तो तय है कि ख़रीद में कटौती की जाएगी.

मेलबोर्न के आईजी बाज़ार में बाज़ार रणनीतिकार स्टैन शामु कहते हैं, " ज़्यादातर विश्लेषकों का अनुमान है कि कटौती सितंबर में शुरू होगी या कम से कम सितंबर में इसकी घोषणा हो जाएगी और अक्तूबर-नवंबर में इसे लागू किया जाएगा."

इस ख़बर के बाद इंडोनेशिया का जकार्ता कंपोज़िट इंडेक्स 2.3% गिर गया, थाईलैंड का एसईटी 1.9% नीचे आया और मलेशिया का बुरसा 1.8%.

एशिया के उभरते बाज़ार, जो कभी दुनिया भर के निवेशकों के पसंदीदा हुआ करते थे- लगातार गिर रहे हैं.

Image caption विकासशील देशों की मुद्राएं और शेयर बाज़ार लगातार गिर रहे हैं.

भारत और इंडोनेशिया जैसे देश विकास दर में कमी के साथ ही चालू खाते के बढ़ते घाटे से भी जूझ रहे हैं.

इसके साथ ही वैश्विग मांग में कमी से निर्यात-आधारित थाईलैंड जैसी अर्थव्यवस्थाएं प्रभावित हुई हैं.

भारत की विकास दर 10 साल के न्यूनतम स्तर पर है जबकि इंडोनेशिया की विकास दर 2010 के बाद से गिरकर अप्रैल से जून की तिमाही में 6% पर आ गई है.

इसी हफ़्ते जारी आंकड़ों के अनुसार थाईलैंड की अर्थव्यवस्था अप्रैल से जून में लगातार दूसरी तिमाही में कमज़ोर रही है, जिससे तकनीकी रूप से यह मंदी की चपेट में आ गई है.

चिंता इस बात की है कि इन देशों में विकास दर अभी और गिर सकती है.

अमरीका के केंद्रीय बैंक के बॉन्ड खऱीद कम करने के अनुमान, जिसे पहले जून में करने के संकेत दिए गए थे, के चलते निवेशकों ने एशिया की इन अर्थव्यवस्थाओं से पैसा निकालना शुरू कर दिया है.

इस के चलते मुद्रा और शेयर बाज़ार दोनों बेहद अस्थिर हो गए.

मई के चरम से जकार्ता कंपोज़िट इंडेक्स 21% और थाईलैंड का एसईटी 19% गिर चुके हैं.

भारत का सेंसेक्स 12% नीचे गिरा है और फ़िलीपीन्स का शेयर बाज़ार 18% गिरा है.

अमरीकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया 16%, इंडोनेशियाई रुपिया 18% गिरा है तो फ़िलीपीन्स का पेसो और थाईलैंड का बहत 10% तक नीचे आया है.

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