सीरिया में 'रासायनिक हमले' की तुरंत जाँच हो:यूएन

बान की मून
Image caption संयुक्त राष्ट्र संघ के महासचिव बान की मून एंजेला केन को दमिश्क भेज रहे हैं.

दमिश्क के नज़दीक हुए कथित रासायनिक हमले के बाद संयुक्त राष्ट्र संघ समेत कई अन्य देशों ने सीरिया में दख़ल की मांग को तेज़ कर दी है.

संयुक्त राष्ट्र संघ के महासचिव बान की मून के एक प्रवक्ता ने गुरुवार को कहा कि उन्होंने सीरिया में हुए कथित हमले की "बिना कोई देर किए जांच" करने की माँग की है.

प्रवक्ता के अनुसार महासचिव संयुक्त राष्ट्र की निरस्त्रीकरण प्रमुख एंजेला केन को दमिश्क भेज रहे हैं ताकि सीरिया पर इस जांच के लिए दबाव बनाया जा सके.

संयुक्त राष्ट्र के अतिरिक्त तुर्की, फ्रांस और ब्रिटेन ने भी इस आशय की माँग की है.

फ्रांस के विदेश मंत्री लॉरोंग फेबियूस ने कहा है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को नागरिकों पर किए गए रासायनिक हथियारों के हमले का पूरी शक्ति से जवाब देना चाहिए.

उन्होंने कहा, "अगर ये साबित हो जाता है, तो हमारा रूख़ होगा कि इसकी प्रतिक्रिया होनी चाहिए. उस प्रतिक्रिया का क्या मतलब होगा, ये नहीं कि हम वहां सेना भेजें. ये प्रतिक्रिया होगी जिसमें ताक़त का इस्तेमाल किया जाएगा."

बँटा मत

Image caption दमिश्क के पास हुए हमले में सैकड़ों लोगों के मारे जाने की बात कही जा रही है.

लॉरेोंग फेबियूस ने ये बात एक फ्रांसीसी टीवी चैनल को दिए गए इंटरव्यू में कही.

हालांकि विपक्षी दल के एक फ्रांसीसी सांसद जाक़ मियार ने कहा है कि सीरिया में सैनिक कार्रवाई से किसी तरह की भलाई के बजाए ज़्यादा नुक़सान होगा.

इस बीच संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून ने सीरिया की सरकार से औपचारिक तौर पर मांग की है कि अंतरराष्ट्रीय संस्था के दल को बुधवार को दमिश्क में हुए हमले की जगह पर जाने की इजाज़त दी जानी चाहिए.

विपक्षी कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया था कि बशर अल-असद की सेना ने दमिश्क के बाहरी इलाक़े में रासायनिक हथियारों से हमला किया था जिसमें बच्चों और औरतों समेत सैकड़ों लोगों की मौत हो गई थी.

जांच दल

Image caption सीरिया में पहले भी रासायनिक हमलों के आरोप लगते रहे हैं.

संयुक्त राष्ट्र का एक दल सीरिया में जांच के लिए गया हुआ है लेकिन उसे जिन तीन जगहों पर जांच करने की इजाज़त मिली है उसमें दमिश्क शामिल नहीं है.

अमरीकी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता जेन साकी का कहना था कि अमरीका रासायनिक हमले के तथ्यों की जांच कर रहा है.

सीरिया के क़रीबी समझे जाने वाले रूस का कहना है कि विद्रोही हमले की बात कर पश्चिमी मुल्कों से सैन्य सहायता हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं.

सीरिया में पिछले 28 महीनों से जारी लड़ाई में एक लाख से अधिक लोग मारे जा चुके हैं जबकि लाखों बेघर हो गए हैं.

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