लिंग बदलने वाले कैसे बदलते हैं नाम

ब्रैडले मैनिंग

गोपनीय अमरीकी दस्तावेज़ों को विकीलीक्स नामक वेबसाइट को सौंपने के लिए दोषी करार दिए गए अमरीकी सैनिक ब्रैडले मैनिंग हार्मोन चिकित्सा कराकर एक महिला की तरह जीना चाहते हैं. टॉम गेगन इसकी पड़ताल कर रहे हैं कि लिंग परिवर्तन कराने वाले लोग किस तरह चुनते हैं अपना नया नाम.

ज़्यादातर लोगों को अपना नाम रखने का मौका नहीं मिलता. आपका नाम आपके माता-पिता ही रखते हैं. आपको अपना नाम लाख नापसंद हो. आप इसे लेकर चाहे जितना जले-भुनें, अपने नाम के लिए आप बस अपने अभिभावकों को दोष दे सकते हैं.

बहुत से वयस्क विभिन्न कारणों से अपना नाम बदलते हैं लेकिन जो लोग लिंग परिवर्तन के कारण अपना नाम बदलते हैं उनके लिए तो यह उनके व्यक्तित्व परिवर्तन से जुड़ा गहरा मामला होता है. ऐसे लोगों के लिए नाम बदलने का महत्व काफ़ी अधिक होता है.

क्रिस्टा व्हीपल पहली बार में अपने लिए सही नाम नहीं चुन पाईं. उन्होंने पहले कैटलीन टायलर नाम चुना था. वो अपने जन्म के नाम बेंजामिन व्हीपल से छुटकारा चाहती थीं और यह भी चाहती थीं कि उनका नाम लोकप्रिय आम नामों में से एक हो.

क्रिस्टा कहती हैं, "मैंने अपने जन्म के समय से लेकर अब तक के लोकप्रिय नामों की खोज की. मुझे लगा कि अगर मेरा नाम हज़ारों, लाखों नामों में से एक होगा तो मेरे लिए पहचान छुपाना आसान रहेगा."

बेहतर नाम

Image caption मैनिंग ने कहा है वे औरत बनना चाहते हैं

यह नाम क्रिस्टा के लिए ऑनलाइन फ़ोरम और सोशल मीडिया में सेफ़्टी नेट की तरह काम करता था. उनके पुराने परिचित उन्हें अभी भी उसके बचपन के नाम से पुकारते हैं. लेकिन जब उसने हार्मोन थेरेपी करानी शुरू की और अपने मित्रों के इसके बारे में बताना शुरू किया तो उसी समय उसे अचानक ही अप्रत्याशित तरीके से ज़्यादा बेहतर नाम मिल गया.

क्रिस्टा कोलोराडो के जेंडर आइडेंटी सेंटर की अध्यक्ष हैं. क्रिस्टा बताती हैं, “वह वक़्त भी आ गया जब मुझे अपने पिता को इसके बारे में बताना था. लेकिन मेरी उम्मीद के उलट मेरे पिता ने न मुझे सहारा दिया बल्कि यह भी कहा कि अगर तुमने लड़की के रूप में जन्म लिया होता तो मैं तुम्हारा नाम क्रिस्टा रखता.”

क्रिस्टा कहती हैं कि इस नाम को पाकर उन्हें बहुत राहत मिली. मैं शारीरिक रूप में लड़की नहीं पैदा हुई लेकिन मुझे लगता है कि इस नाम पर मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है. हालाँकि उन्हें इस बात का दुख भी है कि यह नाम मुझे मेरे जन्म के 33 साल बाद मिला.

ब्रिटेन के जेंडर ट्रस्ट के जॉन किंग के अनुसार कई लोग बस अपनी अंतःप्रेरणा के आधार पर अपना नाम चुन लेते हैं. उन्हें पता होता है कि वो क्या बनना चाहते हैं, उन्हें किसके जैसा महसूस होता है. कुछ लोग इस बात को लेकर बहुत परेशान होते हैं कि उनके लिए सही नाम क्या होगा. जो लोग दूसरों को अपनी पहचान के बार में सीधा संदेश देना चाहते हैं वो स्त्री या पुरुष पहचान को पुख़्ता तरीके से ज़ाहिर करने वाले नाम रखते हैं.

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