अमरीकी सैन्य बेड़ा सीरिया की ओर रवाना

अमरीकी युद्धपोत
Image caption अमरीकी रक्षा मंत्री चक हेगल ने सीरिया में संभावित सैन्य दखल पर पूरा ब्योरा नहीं दिया.

संयुक्त राष्ट्र की शीर्ष निरस्त्रीकरण अधिकारी एंजेला केन दमिश्क पहुंच गई हैं. वहां वे सीरियाई सरकार पर दबाव बनाएंगी कि राष्ट्रपति बशर अल असद की सरकार संयुक्त राष्ट्र जांचकर्ताओं को उस इलाके में जाने दे जहां कुछ दिन पहले कथित रूप से रासायनिक हथियारों से संदिग्ध हमला हुआ था.

सीरियाई सरकार पर आरोप है कि उसने घाउटा में नागरिकों के खिलाफ़ रासायनिक हथियारों का इस्तेमाल किया लेकिन सरकार ने इस आरोप से इनकार किया है.

उधर सीरिया में संघर्ष के मद्देनज़र अमरीका उस क्षेत्र में अपना दख़ल और बढ़ा रहा है. अमरीकी रक्षा अधिकारियों ने बताया है कि अमरीका ने अपना चौथा सैन्य बेड़ा पूर्वी भूमध्यसागर में भेज दिया है.

सीरिया की ओर अमरीकी बेड़ा

अमरीकी रक्षा मंत्री चक हेगल ने बताया कि सीरिया में संघर्ष के बारे में अमरीका के राष्ट्रपति ओबामा विभिन्न विकल्पों पर विचार कर रहे हैं. इसके मद्देनज़र अमरीका ने पूर्वी भूमध्यसागर में अपनी नौसेना की मौजूदगी को मज़बूत कर रही है.

अमरीका के रक्षा मंत्री चक हेगल के मुताबिक राष्ट्रपति के किसी भी विकल्प को चुनने के हालात में अमरीकी रक्षा मंत्रालय पेंटागन उस क्षेत्र में अपना दख़ल मज़बूत कर रहा है.

हेगल ने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि सीरिया में संघर्ष जैसे हालात हैं.

शुक्रवार को अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने कहा था कि ऐसे आरोप गंभीर चिंता का विषय हैं कि सीरियाई सरकार ने रासायनिक हथियारों का कथित रूप से इस्तेमाल किया है.

वहीं दूसरी ओर सीरियाई सरकार के मुख्य सहयोगी देश रूस ने कहा है कि ऐसे सबूत सामने आ रहे हैं कि दमिश्क में सीरियाई विद्रोहियों ने ही रासायनिक हमला किया था.

सीरिया के विपक्षी कार्यकर्ताओं ने दावा किया था कि बुधवार को दमिश्क के सीमावर्ती इलाके में सरकार ने रासायनिक हथियारों से हमला कराय़ा जिसमें सैकड़ों लोग मारे गए.

दमिश्क के नज़दीक हुए कथित रासायनिक हमले के बाद संयुक्त राष्ट्र (यूएन) समेत कई अन्य देशों ने सीरिया में दख़ल की मांग को तेज़ कर दी थी. इसके बावजूद सीरियाई सरकार की ओर ऐसे संकेत नहीं मिले हैं कि वह इस हमले के कथित दावे की जांच करने के लिए संयुक्त राष्ट्र की टीम को इजाज़त देगी.

आकस्मिक स्थिति

Image caption विद्रोही यह आरोप लगा रहे हैं कि सीरियाई सरकार ने रासायनिक हथियारों का इस्तेमाल किया है.

विद्रोहियो ने इस हमले में घायल लोगों को अस्पताल में भर्ती कराए जाने का एक वीडियो यूट्यूब पर अपलोड किया है. वीडियो में कई बच्चों समेत पीड़ितों को दर्द से तड़पते हुए दिखाया गया है. कुछ लोगों को सांस लेने में दिक्क़त आ रही है.

हालांकि इस वीडियो की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं हो पाई है.

अमरीकी रक्षा मंत्री चक हेगल के मुताबिक राष्ट्रपति ओबामा ने कहा था कि अमरीका पर सीरिया में हस्तक्षेप करने का दबाव बढ़ रहा है, ऐसे में पेंटागन को भी मुस्तैद होना चाहिए.

उन्होंने कहा, "अमरीका के रक्षा मंत्रालय पेंटागन की ज़िम्मेदारी है कि सभी तरह की आकस्मिक स्थिति बनने पर राष्ट्रपति को विकल्प मुहैया कराए. इनमें सैन्य बलों की स्थिति तय करने से लेकर कई विकल्प होते हैं, जिनमें से कोई भी विकल्प राष्ट्रपति चुन सकते हैं."

मलेशिया की यात्रा पर जाते वक़्त हेगल ने संवाददाताओं से यह बताया.

अमरीकी रक्षा अधिकारियों ने पहले कहा कि अमरीका का क्रूज़ मिसाइल से लैस चौथा युद्धपोत पूर्वी भूमध्यसागर की ओर बढ़ रहा है.

जांच का दबाव

Image caption सीरिया में पिछले 28 महीनों से जारी लड़ाई में एक लाख से अधिक लोग मारे जा चुके हैं

संयुक्त राष्ट्र संघ महासचिव बान की मून के एक प्रवक्ता ने गुरुवार को कहा था कि उन्होंने सीरिया में हुए कथित हमले की 'बिना कोई देर किए जांच' करने की माँग की है.

प्रवक्ता के अनुसार महासचिव ने संयुक्त राष्ट्र की निरस्त्रीकरण प्रमुख एंजेला केन को दमिश्क भेजने का मन बनाया ताकि सीरिया पर इस जांच के लिए दबाव बनाया जा सके.

संयुक्त राष्ट्र के अलावा तुर्की, फ्रांस और ब्रिटेन ने भी ऐसी ही माँग की.

वहीं फ्रांस के विदेश मंत्री लॉरोंग फेबियूस ने कहा था कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को नागरिकों पर किए गए रासायनिक हथियारों के हमले का पूरी शक्ति से जवाब देना चाहिए.

अमरीकी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता जेन साकी का कहना था कि अमरीका रासायनिक हमले के तथ्यों की जांच कर रहा है.

वहीं सीरिया के क़रीबी समझे जाने वाले रूस का कहना है कि विद्रोही हमले की बात कर पश्चिमी मुल्कों से सैन्य सहायता हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं.

सीरिया के राष्ट्रपति बशर अल-असद के क़रीबी समझे जाने वाले मुल्क रूस ने आग्रह किया है कि वो हमले की जांच में संयुक्त राष्ट्र टीम की मदद करें.

सीरिया में पिछले 28 महीनों से जारी लड़ाई में एक लाख से अधिक लोग मारे जा चुके हैं जबकि लाखों बेघर हो गए हैं.

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