खाद्य सुरक्षा बिल लोकसभा में पारित

  • 26 अगस्त 2013
सोनिया गांधी
Image caption खाद्य सुरक्षा यूपीए की महत्वकांक्षी योजना है

चुनावी साल में यूपीऐ सरकार का तुरुप का पत्ता माना जा रहा खाद्य सुरक्षा बिल कुछ संशोधनों के साथ लोक सभा में पारित हो गया है.इसे ध्वनिमत से पारित किया गया. अब ये राज्य सभा में जाएगा.

विधेयक पर चर्चा के दौरान लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज ने कहा कि ''मेरे सुझाए संशोधनों के साथ अगर बिल पारित किया जाता तो ये बिल बेहतर,ज़्यादा सशक्त और प्रभावी होता लेकिन लगता है सरकार इसे इसी रूप में पारित कराने पर अड़ी है तो हम इसी आधे-अधूरे बिल का समर्थन करते हैं.''

सदन से बाहर निकलकर बीजेपी नेता मुरली मनोहर जोशी ने कहा कि ''ये बिल बहुत ही जल्दबाज़ी में बनाया गया है औऱ बहुत क़मज़ोर है.''

इसके पहले दोपहर जब बहस आरंभ हुई तो यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी ने इसे हर हाल में लागू करने पर जोर दिया और उन्होंने इस बारे में विपक्ष की आपत्तियों को दरकिनार किया.

उन्होंने इसे सही से लागू करने के लिए जन वितरण प्रणाली को बेहतर बनाने पर भी जोर दिया.

लेकिन विपक्ष का कहना है कि इस बिल से गरीबों को कोई फायदा नहीं होगा बल्कि इसे सिर्फ चुनावी फायदे के लिए लाया जा रहा है.

यूपीए सरकार का बाहर से समर्थन कर रही समाजवादी पार्टी ने भी इस बिल को चुनावी फायदे का ज़रिया बताया और केंद्र सरकार पर राज्य सरकारों की अनदेखी का आरोप भी लगाया है.

प्रस्तावित खाद्य सुरक्षा कानून के तहत भारत के लगभग 80 करोड़ लोगों को सस्ते दामों पर अनाज उपलब्ध कराए जाने की योजना है.

‘किसानों का ध्यान रखेंगे’

यूपीए अध्यक्ष ने संसद में कहा, “कुछ लोग सवाल उठाते हैं कि क्या हमारे पास इसके लिए साधन है.. मैं कहना चाहती हूं कि इसके लिए साधन जुटाने होंगे. कुछ लोग सवाल उठाते हैं कि क्या ये किया जा सकता है.. मैं कहना चाहती हूं कि ये हमें करना ही है.”

उन्होंने इस बिल के संदर्भ में किसानों की अनदेखी के आरोपों को खारिज किया.

उन्होंने कहा, “कृषि और किसान हमारी नीतियों के प्रमुख अंग हैं, हमने उनकी ज़रूरतों को सदा सबसे ऊपर रखा है और आगे भी रखेंगे”

सोनिया गांधी ने माना कि जन वितरण प्रणआली (पीडीसी) में कई तरह की कमियां हैं जिन्हें दूर करने की जरूरत है ताकि सभी ज़रूरतमंदों तक इसका फायदा पहुंच सके.

कांग्रेस अध्यक्ष ने मिड डे मील योजना को भी एक बड़ी कामयाबी बताते हुए इसकी कमियों को दूर करने पर जोर दिया.

सोनिया गांधी ने खाद्य सुरक्षा कानून को ऐतिहासक अवसर करार दिया जिससे करोड़ों लोगों की परेशानी दूर की जा सकती है.

‘वोट सुरक्षा बिल’

लेकिन भाजपा ने इस बिल को सिर्फ चुनावी कदम करार दिया है.

Image caption मुरली मनमोहन जोशी ने बिल लाने में देरी का कारण पूछा है

भारतीय के वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी ने कहा, “ये खाद्य सुरक्षा बिल नहीं है, ये वोट सुरक्षा बिल है.”

उन्होंने कहा, “सरकार को इस बिल का खाका तैयार करने में चार साल लग गए. 2009 में जब यूपीए-2 सत्ता में आया तो खाद्य सुरक्षा विधेयक का वादा किया गया था. अब साढ़े चार साल बाद, अब जब वो जाने वाले हैं तो बिल लेकर आए हैं. हम पूछना चाहते हैं कि साढ़े चार साल में वो क्या करते रहे.”

उन्होंने यूपीए सरकार पर इस बिल के जरिए लोगों को मूर्ख बनाने का आरोप लगाया.

‘कौन देगा गारंटी’

Image caption मुलायम सिंह यादव ने बिल में कई खामियां गिनाईं

दूसरी तरफ मुलायम सिंह यादव ने बिल की कई खामियां गिनाईं. उन्होंने कहा कि जिन राज्यों सरकारों को ये कानून लागू करना है, उन्हीं से इस बारे में कोई राय नहीं ली गई.

मुलायम सिंह यादव ने कहा, “इससे राज्यों पर जो आर्थिक बोझ पड़ेगा, उसके लिए कौन जिम्मेदार है. उनकी मदद कौन करेगा, ये बिल में कहीं नहीं हैं

उन्होंने कहा कि खाद्य सुरक्षा बिल लाने से पहले देश के सभी मुख्यमंत्रियों की राय ली जानी चाहिए थी. उन्होंने कहा, “मुख्यमंत्रियों की उपेक्षा की गई. उनकी राय लेकर इस बिल को आना चाहिए, क्योंकि सारा बोझ उन्हीं पर पड़ेगा.”

उन्होंने मौजूदा बिल को किसान विरोधी बताते हुए कहा, “किसानों की उपज की खरीद की पक्की गांरटी बिल में कहीं नहीं की गई है. इससे किसान बर्बाद हो जाएंगे.”

समाजवादी पार्टी प्रमुख ने कहा कि बिल में संशोधन की जरूरत है और सभी मुख्यमंत्रियों से राय मशविरा करने के बाद ही इसे लागू किया जाना चाहिए.

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