सीरियाः दमिश्क़ में संयुक्त राष्ट्र दल मिला चश्मदीद गवाहों से

संयुक्त राष्ट्र का काफिला

सीरिया में हुए कथित रासायनिक हमले की जांच करने पहुंचे संयुक्त राष्ट्र के दल ने घटनास्थल पर तीन घंटे बिताए हैं.

संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून ने बताया है कि दल ने दो अस्पतालों का दौरा किया, चश्मदीद गवाहों, ज़िंदा बचे लोगों और डॉक्टरों से बातचीत की है और नमूने भी लिए हैं. उन्होने ख़तरनाक परिस्थितियों में काम करने के लिए टीम की प्रशंसा की है. ग़ौरतलब है कि संयुक्त राष्ट्र के इस जांच दल पर अज्ञात बंदूक़धारियों ने हमला किया था.

सरकार और विद्रोही एक दूसरे पर इस कथित गैस हमले का आरोप लगा रहै हैं. बान की मून ने कहा है कि यूएन ने दोनों ही पक्षों के सामने इस हमले पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है.

इस बीच रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने ब्रिटेन के प्रधानमंत्री डेविड कैमरन से फ़ोन पर बातचीत कर उन्हे जानकारी दी है कि सीरिया में ऐसे कोई सुबूत नहीं मिले हैं जिनसे ये साबित हो कि वहां कोई रासायनिक हमला हुआ है. लेकिन ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कार्यालय के मुताबिक़ कैमरन ने पुतिन से कहा है कि वहां मिले सारे सुबूत इस बात की ओर इशारा करते हैं कि सीरयाई सरकार ने ही रासायनिक हथियारों का इस्तेमाल किया है. कैमरन ने कहा है कि केवल सीरियाई सरकार ये हमला करने में सक्षम थी.

उन्होने कहा है कि संयुक्त राष्ट्र के दल को घटनास्थल पर जाने से रोकना ये दिखाता है कि सरकार कुछ छिपाना चाहती थी.

सीरिया के राष्ट्रपति बशर अल-असद ने अमरीकी सैन्य दख़ल के ख़िलाफ़ चेतावनी देते हुए कहा कि इसका अंत विफलता के साथ होगा.

वैश्विक स्तर पर प्रतिक्रिया

रूसी अख़बार इज़वेस्तिया को दिए साक्षात्कार में बशर अल-असद कहा कि सीरिया को पश्चिम की कठपुतली बनाने का सपना सच नहीं होगा.

अमरीका ने कहा कि इस बात में काफ़ी कम संदेह है कि सीरिया के सुरक्षा बलों ने रासायनिक हथियारों का इस्तेमाल किया है, जिसमे ख़बरों के मुताबिक़ तीन सौ से ज़्यादा लोगो मारे गए थे.

एक साल पहले अमरीका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने कहा था कि सीरिया की सरकार का रासायनिक हथियारों का इस्तेमाल करना लक्ष्मण रेखा को पार करना होगा, अगर ऐसा हुआ तो अमरीका को सैन्य कार्रवाई करनी पड़ सकती है.

अमरीका ने भूमध्य सागर में सैन्य बेड़ा उतार दिया है. अमरीका, ब्रिटेन और अन्य सहयोगी देशों के सैन्य अधिकारी जार्डन में मिल रहे हैं.

ब्रिटेन के विदेश मंत्री विलियम हेग ने बीबीसी को बताया कि बड़ी मानवीय ज़रूरत की स्थिति में संयुक्त राष्ट्र की अनुमति के बिना सीरिया के ख़िलाफ़ क़दम उठाए जायेंगे.

सीरिया के ख़िलाफ़ कार्रवाई

Image caption अमरीका ने नौसैनिक बेड़ा भूमध्य सागर में भेजा

तुर्की के विदेश मंत्री अहमत दाउतालू का कहना है कि तीस से अधिक देशों ने इस मुद्दे पर विचार किया कि संयुक्त राष्ट्र के अनुमति न देने की स्थिति में सीरिया के ख़िलाफ़ कोई क़दम कैसे उठाया जाए?

उन्होनें मिलीयत अख़बार से कहा कि तुर्की, असद सरकार के ख़िलाफ़ किसी भी समूह का हिस्सा बनने को तैयार है, चाहे उसे संयुक्त राष्ट्र का समर्थन मिले या न मिले.

संदिग्ध रासायनिक हमला पूर्वी दमिश्क़ के घाउटा क्षेत्र में हुआ.

यह इलाक़ा विद्रोहियों के नियंत्रण में है, जो बशर अल-असद को सत्ता से हटाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं.

संयुक्त राष्ट्र के पर्यवेक्षकोंको घटना स्थल की जाँच करने के लिए सरकार और विद्रोहियों के नियंत्रण वाले क्षेत्रों से होकर गुज़रना होगा.

रासायनिक हमले की जाँच

Image caption सीरिया में जारी संघर्ष से बच्चे भी प्रभावित हुए हैं

संयुक्त राष्ट्र के बीस सदस्यों का जाँच दल 18 अगस्त से सीरिया में है, ये दल तीन कथित रासायिनक हमलों की जाँच करेगा.

संवाददाताओं का कहना है कि उनकी जाँच रासायनिक हथियारों के कथित इस्तेमाल तक सीमित रहेगी. दल को इस बात की जाँच नहीं करनी है कि रासायनिक हथियारों का इस्तेमाल किसने किया?

हालांकि अभी इस बात के संकेत नहीं मिले हैं कि जाँच दल के उद्देश्य में कोई बदलाव हुआ है. जाँच दल प्रयोगशाला में परीक्षण के लिए मिट्टी, रक्त, पेशाब और टिश्यू के नमूने लेगा.

सीरिया के बारे में पहले से माना जाता रहा है कि उसके पास ख़तरनाक मस्टर्ड गैस और सरीन नर्व गैस के भंडार हैं.

सीरिया उन सात देशों में शामिल है जो 1997 के रासायनिक हथियारों पर प्रतिबंध लगाने के समझौते वाले देशों में शामिल नहीं है.

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