'संगीत के क्षेत्र में भी नहीं महिलाओं की राह आसान'

न्यूयॉर्क

न जाने कितनी ही बच्चियां संगीत सीखती हैं लेकिन शायद ही उनमें से कोई संगीत के क्षेत्र में शीर्ष पर पहुंचती है. कहीं इसके पीछे लैंगिक भेदभाव तो नहीं?

पिछले 118 साल में यह पहला मौक़ा है कि कोई महिला संगीत संयोजक बनने जा रही है. वह पहली महिला संगीत संयोजक हैं, मरीन ओलसॉप.

मरीन ओलसॉप कहती हैं, "हम आज भी लैंगिक भेदभाव पर बात कर रहे हैं, यह कितनी ऊबा देने वाली बात है. मगर यह मौका कई मायनों में खास है. समाज में महिलाओं के आगे बढ़ने, नेतृत्व करने के मसले पर फिर से गहमागहमी शुरू हो गई है."

56 साल की मरीन ओलसॉप न्यूयॉर्क की रहने वाली हैं. छह साल पहले उन्होंने जाने माने आर्केस्ट्रा (बाल्टीमोर) का संगीत संयोजन किया था.

अब वे 'द लास्ट नाइट ऑफ द प्रॉम्स' को संयोजित करने वाली पहली महिला बनने जा रही हैं.

ग़ैरबराबरी का दर्जा

'द लास्ट नाइट ऑफ द प्रॉम्स' ब्रितानी शास्त्रीय संगीत के इतिहास में सबसे बड़ी और महत्वपूर्ण नाइट है.

वे बताती हैं, "इसमें कोई शक नहीं कि मुझे अपनी इस उपलब्धि पर काफी गर्व महसूस हो रहा है. बेहद रोमांचित भी हूं लेकिन संतुष्ट नहीं. मैं चाहती हूं कि आज मैं पहली महिला संगीत संयोजक बनी हूं, तो कल दूसरी बने, फिर तीसरी, सौवीं और यह सिलसिला आगे बढ़ता जाए."

शास्त्रीय संगीत के क्षेत्र में महिलाओं के शीर्ष पर आने से यह दीवार टूटी तो है लेकिन ओलसॉप इस मसले को समाज में औरतों की गैरबराबरी के व्यापक फलक से जोड़ कर देखती हैं.

असहज कर देने वाली इस सच्चाई के बारे में कई किताबों और लेखों में भी जिक्र किया गया.

लैंगिक भेदभाव

Image caption अपनी प्रतिभा के दम पर मरीन ओलसॉप ने खुद ही अपना रास्ता बनाया.

आम जीवन में की जा रही कई जमीनी कोशिशों के बावजूद लैंगिक बराबरी हासिल करने के लिए अभी भी लंबा रास्ता तय करना बाकी है.

क्या ओलसॉप को भी अपने क्षेत्र में महिलाओं के प्रति किन्हीं पूर्वाग्रहों से गुजरना पड़ा है? किसी तरह का लैंगिक भेदभाव या नापसंदगी?

ओलसॉप बताती हैं, "महिलाएं जिन दुश्वारियों को झेल रही हैं, उनके बारे में लोग बातें करना भी वर्जित समझते हैं, अच्छा है कि 'द लास्ट नाइट' के बहाने इस विषय पर लोगों का ध्यान जा रहा है."

वे कहती हैं, "इसे पूर्वाग्रह माना जाए या कुछ और लेकिन लोग इन बातों से असहज महसूस करते हैं. इसलिए इस पर सोचते ही नहीं. यहां तक कि मैं भी किसी महिला को हवाई जहाज उड़ाते हुए देखती हूं तो मुझे इसे स्वीकारने में दिक्कत होती है. क्योंकि मैं उन्हें इस रूप में देखने की अभ्यस्त नहीं हूं."

वे आगे कहती हैं, "हमने मान लिया है कि समाज में बराबरी हासिल कर ली गई है और हमें इस पर बहुत ज्यादा गर्व है. मगर जब अपने आस पास देखते हैं तो महसूस होता है कि महिलाओं को आज भी वह दर्जा नहीं मिला जो उन्हें अब तक मिल जाना चाहिए था."

ख़ुद अपनी राह चुनी

ओलसॉप ने जब पढ़ाई खत्म करने के बाद यह करियर चुना तब आज के मुकाबले अवसर बहुत कम थे.

वे बताती हैं कि एक महिला होने के कारण कई कई बार उन्हें खारिज कर दिया गया.

ओलसॉप बताती हैं, "तब मेरे पास बस एक विकल्प बचा था, कि मैं खुद की आर्केस्ट्रा कंपनी शुरू करूं."

लियोनार्दो बर्नस्टीन की एक शागिर्द के रूप में अपनी प्रतिभा के बल पर ओलसॉप ने खुद अपने लिए रास्ता बनाया.

कुछ अप्रिय अनुभव भी हुए. जैसे कि जब उन्हें पहली बार संगीत निर्देशक बनाया गया तो बाल्टीमोर सिंफनी की ओर से भारी विरोध प्रदर्शन हुए. लेकिन वे उनके विरोध का आभार मानती हैं.

ग़लती करने की आज़ादी

Image caption क्षेत्र में पुरुषों के वर्चस्व के कारण महिलाओं को पूर्वाग्रह का भी सामना करना पड़ता है.

उन्होंने अपनी कड़ी मेहनत और प्रतिभा से आर्केस्ट्रा का आर्थिक कायापलट कर डाला.

इसके बाद एक दूरदर्शी और महत्वाकांक्षी सामाजिक शिक्षा परियोजना, 'ऑर्किड्स' की शुरुआत कर अपने सभी आलोचकों का मुंह बंद कर दिया.

भविष्य में महिलाओं के इस क्षेत्र में करियर बनाने के प्रति ओलसॉप काफी चिंतित हैं.

ओलसॉप कहती हैं, "अभी साल 2013 है, और शास्त्रीय संगीत के क्षेत्र में केवल एक महिला संयोजक हैं. इसलिए मेरे जैसे लोगों, जिन्हें ऐसे मौके मिले हैं, की ये जिम्मेदारी बनती है कि अब केवल मरीन ओलसॉप की बात न हो बल्कि और भी महिलाओं के नाम आए."

इसके लिए उन्होंने युवा महिला संगीत संयोजकों के लिए बेहद सफल फेलोशिप की शुरुआत की है.

उनका मानना ही कि सफल होने के लिए सबसे जरूरी है कि आप गलतियां करें और उससे सीखें. वे चाहती हैं कि ऐसा माहौल बने जहां महिलाओं को गलतियां करने की आज़ादी हो.

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