अमरीकी सेना के मनोचिकित्सक को सज़ा-ए-मौत

निदाल हसन का रेखाचित्र

अमरीका की एक सैन्य अदालत ने सेना के एक पूर्व मनोचिकित्सक को ज़हर का इंजेक्शन देकर मौत देने की सज़ा सुनाई है.

इस मनोचिकित्सक पर टेक्सास सैन्य ठिकाने पर 13 जवानों की हत्या और 32 को ज़ख़्मी करने का आरोप है.

मेजर निदाल हसन को नवंबर 2009 के अंतिम हफ्ते में फ़ोर्ट हुड में हुई गोलीबारी के लिए दोषी ठहराया गया था.

वर्जीनिया में पैदा हुए निदाल हसन ने अपने बचाव में कहा कि उन्होंने अफ़ग़ानिस्तान में तैनात होने वाले सैनिकों से तालिबानी चरमपंथियों को बचाने के लिए गोलीबारी की.

जूरी ने बुधवार को दो घंटे तक विचार-विमर्श के बाद सज़ा सुनाई.

अपील की प्रक्रिया

सैन्य न्यायालयों में अपील की लंबी प्रक्रिया की वजह से मेजर हसन को सज़ा-ए-मौत देने में कई साल या दशकों तक का समय लग सकता है.

राष्ट्रपति की ओर से मंजूरी मिलने के बाद ही उन्हें सज़ा-ए-मौत दी जाएगी.

बुधवार को सज़ा सुनाए जाने से पहले अभियोजक कर्नल माइक मुलिगन ने जूरी के सदस्यों से मौत की सज़ा देने की मांग की.

उन्होंने कहा, '' वह कभी शहीद नहीं होंगे, मेजर हसन एक अपराधी हैं. वह एक नृशंस हत्यारे हैं.''

इस मुकदमे में मेजर हसन ने अपना बचाव खुद किया, उन्होंने ज़्यादा कुछ बोलने से इनकार करते हुए केवल इतना कहा,'' मेरे पास कोई निर्णायक बयान नहीं है.''

गोलीबारी की घटना

Image caption निदाल की गोलीबारी में मारे गए माइकल कहिल के परिजन

13 सदस्सीय जूरी मेजर हसन को मौत की सज़ा देने को लेकर एकमत थी. अगर जूरी के सदस्य इस पर एकमत नहीं होते तो मेजर हसन को उम्रक़ैद की सज़ा मिलती.

अमरीका में 1961 के बाद से किसी सैनिक को सज़ा-ए-मौत नहीं दी गई है.

मेजर हसन ने फोर्ट हुड सैन्य ठिकाने पर गोलीबारी की थी जहाँ विदेश में तैनाती से पहले सैनिकों का मूल्यांकन किया जा रहा था.

हमले के लिए उन्होंने काफी सावधानी से तैयारी की. उन्होंने कुल 146 गोलियां चलाईं.

फ़ायरिंग तब खत्म हुई जब एक पुलिस अधिकारी ने उन्हें गोली मार दी. गोली लगने से उन्हें कमर से निचले हिस्से में लकवा मार गया था और अब वो एक ह्वीलचेयर के सहारे चलते हैं.

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