कुछ बख़्शीश तो देते जाइए, हुजूर!

Image caption कुछ देशों में टिप देना सामान्य शिष्टाचार का हिस्सा माना जाता है, जबकि कई जगह इसे ज़रुरी नहीं माना जाता.

आपके मन में अक्सर यह सवाल उठता होगा कि टिप देनी चाहिए या नहीं? सांस्कृतिक रूप से भारत में बख़्शीश याचना भाव से माँगी जाती है, न कि अधिकार भाव से. यहाँ टिप देने का रिवाज तो है, लेकिन कई बार देने वाले की मर्जी पर निर्भर करता है कि वह टिप देना चाहता है या नहीं.

अमरीका में बख्शीश को लेकर बदलते नज़रिए पर हाल में पूछे गए सवाल पर कई पाठकों ने हमें अपनी कहानियाँ बताई हैं.

कुछ देशों में टिप वहाँ की संस्कृति का हिस्सा है जबकि कुछ जगह लोग इसे ज़रूरी नहीं मानते हैं. ऐसे में विदेश यात्रा के दौरान अक्सर लोगों को असहज स्थिति से दो-चार होना पड़ता है. पेश है ऐसी ही असहज स्थिति से गुजरने वाले कुछ लोगों की दास्तान...

1. केनेथ मैकलियॉड, ज़ियामेन, चीन:

मैं चीन में रहता हूँ और वहीं काम करता हूँ. पिछले साल एक चीनी मेज़बान ने हमें दावत पर बुलाया. वेट्रस की सेवाएँ बेहतरीन थीं और एक अमरीकी ने उसे टिप देने की कोशिश की, जिसे लेने से उसने इनकार कर दिया.

हालांकि उसने ज़बरदस्ती वो टिप उसकी जेब में डाल दी. वेट्रस के मैनेजर ने जब देखा कि उसकी जेब में बख्शीश डाली गई है तो वह वेट्रस के पास आया और उसने वेट्रस को बर्खास्त कर दिया.

साथ ही मैनेजर ने वेट्रस की जेब से धन निकालकर उस अमरीकी को वापस करने की कोशिश की.

अमरीकी ने उसे वापस लेने से इनकार कर दिया और कहासुनी शुरू हो गई. यह हमारे चीनी मेज़बान को शर्मिंदा करने के लिए काफी था. मैं उसे एक किनारे ले गया और उसे बताया कि वह हमारे मेज़बान और चीनी लोगों का अपमान कर रहा है.

वह नहीं समझ सका कि चीन में टिप देना अपमानजनक क्यों है. उसने इतना ही कहा, “अरे! हम अमरीका में हमेशा ही ऐसा करते हैं.”

2. जॉन, कोलंबस (ओहायो) अमरीका:

Image caption चीन में टिप देने की परंपरा नहीं है, जबकि अमरीका में इसे अनिवार्य माना जाता है.

एक बार मैंने कुल बिल का 80 प्रतिशत टिप के तौर पर दिया. खाने का बिल 25 डॉलर था, और उसके अलावा मेरे पास केवल 20 डॉलर बचे थे. मैं फुटकर नहीं ले सकता था क्योंकि टेबल पर और कोई नहीं था. और मुझे कर्मचारी से यह कहना ठीक नहीं लगा कि इसमें से पाँच ले लो और बाकी मुझे वापस कर दो. इसलिए मैंने उसे एक छोटा नोट लिखकर कहा कि अपने भगवान को धन्यवाद दो क्योंकि इससे ज्यादा तुम्हें मुझसे नहीं मिल सकता था.

3. गिल डेनिस, पेरिस, फ्रांस:

दक्षिणी फ्रांस के पाउ कैसिनो के रेस्ट्रांट में मैंने सात अन्य लोगों के साथ खाना खाया.

बिल के साथ मैंने बिल के साथ 20 यूरो का नोट टिप के तौर पर जोड़ दिया. तभी सात हाथ उस धन पर टूट पड़े. उन्होंने कहा कि वेटर को प्रति व्यक्ति एक यूरो से अधिक टिप लेने का हक़ नहीं है. मैंने बहुत शर्मिंदगी महसूस की.

4.मार्गेन, हांग-कांग:

Image caption कुछ देशों में सरकारें टिप पर भी टैक्स लेती है.

हांग-कांग में मैंने एक टैक्सी ली. किराया 50.30 हांगकांग डॉलर था और मैंने उसे 100 हांग-कांग डॉलर का नोट दिया. ड्राईवर ने बदले में मुझे 50 हांग-कांग डॉलर थमा दिये. उसकी टैक्सी में यात्रा करने के लिए मुझे 0.30 डॉलर बतौर टिप मिले थे.

5. लियो मार्टोराना:

मैंने टिप देना बंद कर दिया है, बल्कि अब मैं एक छोटा लिफाफा देता हूँ, जिस पर लिखा रहता है कि, “आपके लिए कुछ खास.”

इससे किसी तरह की शर्मिंदगी से बचा जा सकता है और वेटर को एक थैक्यू कार्ड मिलता है. इस कार्ड में अब मैं यह भी जोड़ने वाला हूँ कि, “आपकी सेवा प्रभावशाली थी.”

6. निक, मॉन्ट्रियल, कनाडा:

मैं क्यूबैक में रहता हूँ और यहाँ पर सरकार यह मानकर चलती है कि रेस्ट्रांट या बार कर्मचारी को कुल बिक्री पर 15 प्रतिशत टिप मिलती है और उन्हें इस रॉशि पर टैक्स देना पड़ता है, चाहें उसे इतनी टिप मिले या नहीं.

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