ब्रिटेन के लिए आर-पार की लड़ाई

ब्रिटेन की संसद में सीरिया के मुद्दे पर प्रस्ताव गिर जाने के बाद ब्रितानी विदेश नीति के मद्देनजर आर-पार की लड़ाई नजर आ रही है.

एक ओर जहां अमरीका और ब्रिटेन के बीच गठबंधन को लेकर सवाल है, वहीं दूसरी ओर 'हाउस ऑफ़ कॉमन्स' में बिना बहुमत सीरिया के खिलाफ युद्ध की प्रधानमंत्री केमरन की क्षमता को लेकर अटकलें लगाई जा रही हैं.

यह स्पष्ट है कि सीरिया के खिलाफ अमरीकी अभियान में शामिल न होने के ब्रिटिश सरकार के इस फैसले से पहले भी कई खास मौकों पर इस तरह की स्थिति देखने को मिली है.

इससे पहले पूर्व प्रधानमंत्री हेराल्ड विल्सन का अपनी सेना वियतनाम भेजने से साफ इनकार करना और जॉन मेजर का 1992 में सोमालिया में हस्तक्षेप का फैसला शामिल था. पहले भी कई महत्वपूर्ण मौकों पर सरकारी विभागों या कैबिनेट सदस्यों के बीच मतभेद रहे हैं.

जहां तक मुझे याद पड़ता है सोमालिया में सेना तैनात करने के मसले पर एक ओर जहां रक्षा मंत्रालय इस फैसले के एकदम खिलाफ था वहीं विदेश मंत्रालय ने इस पर काफी सकारात्मक रुख अपनाया था.

नई बात नहीं है

आखिरकार विल्सन और मेजर दोनों की सरकारों को ही अलग-अलग विशेषज्ञों ओर पक्षों की राय सुनने के बाद राजनीतिक फैसले करने पड़े. खासतौर पर विल्सन का यह निर्णय महत्वपूर्ण था, क्योंकि इससे अमरीका और ब्रिटेन के संबंधों को काफी आघात पहुंचा था.

अमरीका को सैनिक समर्थन दे पाने में ब्रितानी प्रधानमंत्री डेविड केमरन की असमर्थतता को देखते हुए आज की स्थिति काफी अलग है. वहीं ब्रिटेन की जनता और विशेषज्ञों को सैन्य कार्रवाई के लिए मनाने में केमरन की असफलता दर्शाती है कि सीरिया के खिलाफ कार्रवाई ब्रिटेन के हित में नहीं है.

दूसरी ओर यह खासतौर पर उनके 2010 के चुनावी एजेंडे के मद्देनजर एक विडम्बना है, जिसके तहत देश के फायदे-नुकसान पर विचार किए बगैर अमरीका के साथ खड़े होने पर जोर दिया जाता रहा है.

वहीं पिछले दो वर्षों के दौरान मेंने पाया कि ब्रितानी सेना, विदेश विभाग और खुफिया सेवाएं सीरिया में सीधे हस्तक्षेप का विरोध करने पर एकमत हैं या फिर इससे होने वाली व्यावहारिक कठिनाइयों की चर्चा करते रहे हैं.

पिछले बुधवार को सेना के एक बड़े अधिकारी ने बातचीत में प्रस्तावित हवाई हमलों को मामूली और बचकाना करार दिया था. उनका कहना था कि यह हमला इस इलाके में कोई खासा असर छोड़ पाने में नाकाम सिद्ध होगा और इससे अवांछित नतीजे निकल सकते हैं.

शाही विशेषाधिकार

विदेश मंत्री विलियम हेग के कुछ मौकों पर समर्थन के बावजूद डाउनिंग स्ट्रीट सीरिया में सैन्य हस्तक्षेप के मुद्दे का राग अलाप रहा है. उनके इस दृढ़ निश्चय और देश भर में बन रही उनकी घटिया छवि के बावजूद न तो इस मामले के विशेषज्ञ और न ही आम जनता युद्ध में शामिल होने की पक्षधर है.

हेराल्ड या मेजर को यह बात अच्छी तरह से समझ आ गई थी कि अमरीकी नेतृत्व वाली लड़ाई से छुटकारा पाने में विशेषज्ञों की सलाह या आम जनता की राय मददगार होगी. केमरन ने इसके खिलाफ जाने की कोशिश की.

इसके पहले कई ऐसे मौके रहे हैं जबकि ब्रिटिश प्रधानमंत्री जनता के विरोध या मतभेद होने के बावजूद सैन्य कार्रवाई में सफल रहे हैं. संसद में बहुमत पाए बगैर युद्ध में शामिल होने का फैसला डाउनिंग स्ट्रीट का विशेषाधिकार होने के साथ-साथ संवैधानिक मसला भी है. पूर्व प्रधामंत्री टोनी ब्लेयर इराक में सैनिक कार्रवाई के पक्ष में बहुमत के महत्व से वाकिफ थे.

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