सीरिया के वजह से अमरीका और ब्रिटेन में तनाव?

अमरीकी नागरिक
Image caption अमरीकी नागरिक सीरिया में सैन्य हस्तक्षेप के पक्ष में नहीं हैं

ब्रिटेन की संसद ने सीरिया में सैन्य हस्तक्षेप के विरोध में मतदान किया है. इससे अमरीका में ओबामा प्रशासन सकते में है.

ब्रिटेन लगभग हर अंतर्राष्ट्रीय फ़ैसले में अमरीका का साथ देता है.

सीरिया में सैन्य हस्तक्षेप को लेकर अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा का साथ न दे पाने पर ब्रिटेन और अमरीका के रिश्तों में खटास आ सकती है.

मतदान से पहले ओबामा प्रशासन को पूरा विश्वास था कि प्रधानमंत्री डेविड कैमरन के सामने संसद में चुनौतियाँ आ सकती है और ब्रिटेन किसी भी कार्रवाई में इतनी जल्दी साथ नहीं देगा.

लेकिन अब यह पूरी तरह से स्पष्ट हो चुका है कि आमतौर पर अमरीका का कहना आसानी से मान लेने वाला ब्रिटेन सीरिया में सैन्य हस्तक्षेप में भाग नहीं लेगा.

एक वरिष्ठ अमरीकी प्रशासनिक अधिकारी ने बीबीसी को बताया कि वे ब्रिटेन से परामर्श जारी रखेंगे. अमरीका ब्रिटेन को अपने क़रीबी सहयोगियों और दोस्तों में से एक मानता है.

लेकिन अमरीकी अधिकारी ने यह भी कहा, " राष्ट्रपति ओबामा का फ़ैसला अमरीका के हित में होगा. उनका मानना है कि इस समय अमरीका के सबसे ज़रूरी हित दाँव पर हैं और जिन देशों ने रासायनिक हथियारों के प्रयोग के अंतरराष्ट्रीय क़ानून तोड़े हैं उन्हें ज़िम्मेदार ठहराए जाने की ज़रुरत है.

'शर्मिंदा ब्रितानी अधिकारी'

उन्होंने कहा, "दूसरे शब्दों में अमरीका इस फ़ैसले पर अकेला ही आगे बढ़ सकता है."

ब्रिटेन के इस कदम से राष्ट्रपति बराक ओबामा का अपनी जनता को समझाने के प्रयास पर भी फ़र्क पड़ेगा. आखिरी जनमत संग्रह में केवल नौ प्रतिशत लोगों ने सीरिया में सैन्य हस्तक्षेप के लिए समर्थन किया था

अमरीकी प्रशासनिक अधिकारी ने कहा, "राष्ट्रपति ओबामा ने हमेशा ज़्यादा से ज़्यादा अंतर्राष्ट्रीय समर्थन चाहा है."

उन्होंने बताया, "मेरा मानना है कि अब फ़्रांस, तुर्की और अन्य देशों की भूमिका पर नए सिरे से गौर किया जाएगा."

साथ ही एक अमरीकी प्रशासनिक अधिकारी ने बीबीसी से कहा, "मेरा ख़्याल है कि वाशिंगटन में बहुत से ब्रितानी अधिकारी शर्मिंदा होंगे और अपने अमरीकी समकक्षों को यह दोबारा भरोसा दिलाने की कोशिश कर रहे होंगे कि यह केवल एक वाकया है और इससे हमारे ख़ास रिश्तों पर कोई फ़र्क नहीं पड़ेगा."

अगर ब्रिटेन साथ में बना नहीं रह सकता है तो इससे अमरीका में कोई पूछ सकता है कि दोनो देशों के बीच रिश्तों में "ख़ास क्या है"?

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