सीरिया पर सैन्य हमले से तेल के दाम और बढ़ेंगे?

अमरीका और यूरोप में राजनेता सीरिया पर सैन्य हमले को लेकर विचार विमर्श में लगे हैं.

सीरिया में पहले से फैली अनिश्चितता और हमले के बाद मध्य-पूर्व में और उथल पुथल होने की जो आशंका जताई जा रही है उसका असर वित्तीय बाज़ारों पर नज़र आ रहा है.

हाल के दिनों में तेल के दाम पिछले छह महीनों में सबसे अधिक ऊंचे स्तर पर पहुंच गए हैं. पिछले हफ़्ते एक बैरल कच्चे तेल की क़ीमत छह प्रतिशत बढ़ कर 117 डॉलर पर पहुँच गई थी.

जून तक तेल की क़ीमत अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में 100 डॉलर से भी कम थी.

बैंक सोसाइटी जनरल के विश्लेषकों का कहना है कि अगर हवाई हमला हुआ तो तेल के दाम 125 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकते हैं.

अगर सैन्य हमले ने क्षेत्र में तेल के उत्पादन को प्रभावित किया तो क़ीमतें 150 डॉलर प्रति बैरल तक चली जाएंगी.

यह दर अब तक की सबसे ऊँची क़ीमत 147 डॉलर प्रति बैरल से भी अधिक होगी जो साल 2008 की मंदी के समय देखी गई थी.

अमरीकी बैंक मेरिल लिंच ने तेल की क़ीमतों के 120 से 130 डॉलर प्रति बैरल तक पहुँचने की बात की है.

तेल उत्पादन

Image caption अमरीका के राष्ट्रपति बराक ओबामा दमिश्क में हुए रासायनिक हमले के कारण सीरिया में सैन्य हस्तक्षेप चाहते हैं.

ये सब इस तथ्य के बावजूद है कि तेल के उत्पादन में सीरिया का योगदान न के बराबर है.

सीरिया के संकट के पहले सीरिया विदेशी ख़रीददारों को लगभग 150, 000 बैरल तेल प्रतिदिन निर्यात करता था. इसका ज़्यादातर हिस्सा यूरोपीय देशों को निर्यात होता था.

अगर इसकी तुलना एक उदाहरण के तौर पर सउदी अरब से की जाए तो वह प्रति दिन एक करोड़ बैरल तेल निर्यात करता है. विश्व में प्रति दिन नौ करोड़ 20 लाख बैरल तेल की खपत होती है.

साल 2011 के अंत में राष्ट्रपति बशर अल असद के शासन पर आर्थिक प्रतिबंध लगाए जाने के बाद वहां से निर्यात रूक गया है. सीरिया अब करीब 50,000 बैरल तेल का प्रतिदिन उत्पादन करता है.

यह सारा तेल देश में ही रिफाइन किया जाता है.

'संघर्ष सीमा पार'

Image caption भारत जैसे मुल्क तेल के लिए मध्य-पूर्व से आयात पर निर्भर हैं.

निवेशकों की चिंता यह है कि सीरिया में पश्चिम के किसी भी हस्तक्षेप से पड़ोसी देशों में भी अस्थिरता फैलेगी.

प्रभावित होने वाले देशों में सीरिया के पड़ोसी इराक़ को गिना जा रहा है. इराक़ प्रति दिन तीन करोड़ बैरल तेल का उत्पादन करता है. यह वैश्विक खपत का तीन प्रतिशत है.

सीरियाः रसायनिक हमले पर तुरंत कार्रवाई की माँग

इराक में इस बात को लेकर चिंता है कि सीरिया से लगती उसकी लंबी सीमा पर असर पड़ेगा.

इराक के चरमपंथी गुट - खासतौर पर अल-क़ायदा से जुड़े संगठन, सीरिया के उत्तरी इलाक़े में सक्रिय हैं.

अस्पष्टता

Image caption ईरान ने सीरिया पर सैन्य हमले के खिलाफ चेतावनी दी है

अब इस बात को लेकर भी अस्पष्टता है कि अगर सीरिया पर सैन्य हमला किया जाता है तो ईरान की क्या प्रतिक्रिया होगी.

बढ़ते अंतर्राष्ट्रीय दबाव के बाद भी पिछले दो सालों में ईरान असद सरकार का घोर समर्थक रहा है.

ईरान ने सीरिया पर सैन्य हमले के खिलाफ चेतावनी दी है. ईरान के नेता अली खमनेई ने कहा है कि पश्चिम का हमला क्षेत्र को बर्बाद कर देगा.

सीरिया पर हमले से ईरान की दो करोड़ सात लाख बैरल प्रति दिन की तेल आपूर्ति पर असर पड़ सकता है. साथ ही होर्मूज़ की खाड़ी का रास्ता भी बाधित हो सकता है.

यह भी अनिश्चित है कि इस क़दम का क्षेत्र के बाकी बड़े तेल उत्पादक देशों पर क्या असर पड़ेगा. सउदी अरब ने सीरिया में विद्रोहियों का पक्ष लिया है.

विश्लेषकों का कहना है कि हमले की घोषणा से पहले ही तेल के दाम बढ़ रहे हैं. इसमें लीबिया में तेल उत्पादन में आ रही बाधा भी एक कारण है.

इस समय मंदी से उबर रहे अमरीका और यूरोप में भी तेल की माँग बढ़ गई है. चीन में भी तेल की माँग में बढ़ोत्तरी हुई है.

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