किचन से सीधे मशीनों तक कूड़ा

सांगो, दक्षिण कोरिया, स्मार्ट सिटी

क्या आपने किसी ऐसे शहर के बारे में सुना है, जहां पग-पग पर अत्याधुनिक तकनीक हो. न कहीं कूड़ा दिखे, न पानी बर्बाद हो, कूड़े से ऊर्जा बने, उससे शहर जगमगाए. ऐसी ही स्मार्ट सिटी है दक्षिण कोरिया का सांगो.

सांगो शहर के डीएनए में ही स्मार्ट टैक्नॉलाजी है. ये दुनियाभर में हाईटेक राजधानियों के रूप में शुमार सियोल से सटा है. इसे कुछ लोग ''सिटी इन बॉक्स'' भी कहते हैं.

सांगो के साथ चुनौती यह भी है कि इसे दक्षिण कोरिया के उन शहरों से कहीं ज्यादा स्मार्ट सिटी बनाया जाए, जहां कोरियाई फिलहाल रह रहे हैं.

मसलन सियोल भी बेहद आधुनिक शहर है. हाईस्पीड वाई-फाई सुविधायुक्त अंडरग्राउंड रेलवे स्टेशन. यहां तेज भागती ट्रेनों से न केवल ईमेल भेज सकते हैं बल्कि आसानी से वीडियो देख सकते हैं. रेलवे स्टेशनों के निकास द्वारों पर इलैक्ट्रॉनिक पैनल लगातार संपर्क बसों के बारे में बताते हैं. सैमसंग जैसी कंपनियां मोबाइल के ज़रिए घरों को जोड़ने की डिवाइस पर काम कर रही हैं.

ऐसे में सांगो किस तरह से अलग है?

सीधे किचन से कूड़ा निकासी

तकनीक के मोर्चे पर सांगो में बेहद अत्याधुनिक मशीनों का इस्तेमाल होता है. सेंसर्स के साथ शहर को ऐसे डिज़ाइन किया गया है कि वो तापमान, ऊर्जा के इस्तेमाल और ट्रैफिक दबाव पर नजर रखें. ये सेंसर्स बस के बारे में अलर्ट करेंगे और किसी भी समस्या के बारे में सीधे स्थानीय अधिकारियों को सूचित करेंगे.

पर्यावरण के मद्देनजर तमाम नई चीजें डिज़ाइन की गई हैं. मसलन, इलैक्ट्रिक कारों के चार्जिंग स्टेशंस, पानी का खास रिसाइक्लिंग सिस्टम, जो साफ़ पानी को ऑफिसों के फ्लश टॉयलेट में इस्तेमाल होने से बचाएगा.

यहां का डिस्पोज़ल सिस्टम खासा असरदार है- सड़कों पर कूड़ा-करकट ढोते ट्रक नहीं दिखेंगे और न फ्लैटों के ब्लॉक के आसपास कूड़ेदान. यहां कूड़ा सीधे घरों के किचन से खींच लिया जाता है और वह ज़मीन के नीचे बिछे सुरंगों के जाल में पहुंचता है. जहां कूड़े को स्वचालित मशीनें छांटती हैं और पर्यावरणीय तौर पर साफ़ करती हैं.

भविष्य में घरों से निकलने वाले कूड़े से ऊर्जा उत्पादन भी हो सकेगा. हालांकि सांगो में तमाम नई तकनीक पर पूरी तरह काम शुरू नहीं हुआ है क्योंकि शहर अभी आधे से कम भर पाया है. 20 फ़ीसदी से कम कॉमर्शियल ऑफिसों को ही लिया गया है. सड़कें, कैफ़े और शॉपिंग सेंटर्स खाली दिखते हैं.

पार्क के चारों ओर बसा

इस शहर को एक केंद्रीय पार्क के चारों ओर प्लान किया गया है. यानी हर बाशिंदा चहलकदमी करते हुए काम के बीच में यहां आ सके.

ट्रांसलेटर ली तीन साल पहले सियोल से यहां आईं. वह कहती हैं, ''मुझे पार्क से घूमते हुए अपनी नौकरी पर जाने में 15 मिनट लगते हैं. मैं लंच के बाद सहयोगियों के साथ पार्क घूमने आती हूं. यह यहां के जीवन का मुख्य अंग बन गया है.''

यहां फ़्लैट्स बिक रहे हैं. नए आवासीय क्षेत्रों में निर्माण जारी है. वैसे अभी सांगो कॉर्पोरेट मार्केट को आकर्षित करता नहीं दिखता. एक नये शहर को बसा पाना भी एक चुनौती ही है.

दक्षिण कोरिया इतनी तेज़ी से बदल रहा है कि कौन जानता है कि तब तक सांगो कैसा होगा और कैसा महसूस करेगा.

(क्या आपने बीबीसी हिन्दी का नया एंड्रॉएड मोबाइल ऐप देखा? डाउनलोड करने के लिए यहां क्लिक करें. आप ख़बरें पढ़ने और अपनी राय देने के लिए हमारे फेसबुक पन्ने पर भी आ सकते हैं और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

संबंधित समाचार