53 घंटे ख़तरनाक शार्कों के बीच

डायना नियाड, ख़तरनाक शार्कों के बीच

अमरीकी तैराक डायना नियाड ने आख़िर वह कारनामा कर दिखाया है, जिसे आज तक कोई नहीं कर सका था. डायना ने क्यूबा से अमरीका की दूरी तैरकर पूरी की और वह भी ख़तरनाक शार्कों से बचाव वाले पिंजरे के बिना.

ऐसा करने वाली वह दुनिया की पहली तैराक हैं.

64 साल की डायना ने शनिवार सुबह क्यूबा के हवाना से अपनी यात्रा शुरू की और लगातार 53 घंटे तैरते हुए वे सोमवार दोपहर बाद अमरीकी प्रांत फ्लोरिडा के की वेस्ट पहुंची.

डायना की 110 मील चौड़े और शार्कों तथा ज़हरीली जैलीफिश से भरे फ्लोरिडा जलडमरूमध्य को पार करने की यह पांचवीं कोशिश थी, जिसमें वह कामयाब रहीं.

इससे पहले उन्होंने एक बार 1978 में, दो बार 2011 में और एक बार 2012 में फ्लोरिडा जलडमरूमध्य पार करने का प्रयास किया था, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली थी.

उनकी अगवानी के लिए सैकड़ों लोग तट पर जमा थे. वे डायना की हौसला अफ़ज़ाई कर रहे थे और ज़ोर-ज़ोर से भोंपू बजा रहे थे.

संदेश

अपना अभियान पूरा करने के बाद डायना ने कहा, "मैं तीन संदेश देना चाहती हूं. पहला यह कि हमें कभी हार नहीं माननी चाहिए. दूसरा यह कि अपने सपने पूरे करने के लिए उम्र आड़े नहीं आती और तीसरा यह कि यह भले ही एकल खेल लगता है लेकिन यह एक टीम प्रयास है."

डायना ने अपने इस अभियान में बॉडीसूट, दस्तानों और जूतों के अलावा जेलीफिश के डंक से बचने के लिए स्पेशल सिलिकॉन मास्क भी पहना था. पिछली बार जेलीफिश के काटने के कारण वह अपना अभियान पूरा नहीं कर पाई थीं.

उन्होंने माना कि इस तमाम तामझाम से उनकी रफ़्तार धीमी हो गई थी लेकिन इस किट ने अपना मक़सद पूरा किया.

शार्कों को दूर रखने के लिए डायना की सपोर्ट टीम ने ऐसे उपकरणों की मदद ली, जिससे उनके आसपास विद्युतीय क्षेत्र पैदा किया जा सके.

बधाई

राष्ट्रपति बराक ओबामा ने डायना को उनकी इस कामयाबी पर बधाई देते हुए ट्वीट किया, "अपने सपने पूरा करने का प्रयास कभी मत छोड़ना."

डायना के साथ नावों पर सवार उनके सपोर्ट स्टाफ़ के 35 लोग भी थे. उनके अभियान की पल-पल की जानकारी वेबसाइट पर पोस्ट की जा रही थी.

जब वह तट से कुछ मील दूर थीं, तो उन्हें बोलने और सांस लेने में दिक्कत हो रही थी, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें रोकना मुनासिब नहीं समझा.

डायना की सपोर्ट टीम ने उन्हें ख़तरनाक बवंडरों, बहाव, शिपिंग लेन, रीफ़ और जैलीफिश से बचाने से लिए सर्वश्रेष्ठ रास्ता चुना.

तैराकी के नियमों के मुताबिक़ उन्हें सपोर्ट नाव पकड़ने की अनुमति नहीं थी. उनकी टीम ने उन्हें बराबर ऊर्जावान बनाए रखने के लिए भोजन और पानी दिया.

इससे पहले अगस्त 2012 में डायना को अपना अभियान 41 घंटे बाद बीच में ही छोड़ देना पड़ा था क्योंकि तेज़ हवा और जैलीफिश के डंक के कारण उनके लिए तैरना मुश्किल हो गया था.

प्रयास

डायना ने सबसे पहले 1978 में शार्कों से बचाव वाले बाड़े के साथ यह अभियान पूरा करने की कोशिश की थी.

साल 2011 में उन्होंने शार्क पिंजरे के बिना प्रयास किया था, लेकिन कंधे में दर्द और दमे के अटैक के कारण उन्हें बीच में ही अपना अभियान रोकना पड़ा था.

उसी साल बाद में जैलीफिश के डंक के कारण उनका तीसरा प्रयास भी नाकाम रहा था.

ऑस्ट्रेलिया की सूसी मरोनी ने 1997 में 22 साल की उम्र में शार्क पिंजरे के साथ फ्लोरिडा जलडमरूमध्य पार किया था.

यह पिंजरा ख़तरनाक जानवरों से बचाव के साथ-साथ तैरने में भी सहायक है. समुद्र की लहरों पर पिंजरे के सहारे मरोनी ने 25 घंटे में ही यह दूरी पार कर ली थी.

इस साल जून में ऑस्ट्रेलिया के तैराक क्लो मैककार्डेल ने शार्क पिंजरे के बिना फ्लोरिडा जलडमरूमध्य पार करने का प्रयास किया था, लेकिन जैलीफिश के काटने के कारण उन्हें अपना अभियान बीच में ही छोड़ना पड़ा.

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