भारत में क्या था नोकिया की सफलता का राज़?

  • 4 सितंबर 2013
नोकिया

पिछले कुछ सालों से नोकिया को लगातार घाटा उठाना पड़ रहा है और अब आख़िरकार इसके बिक जाने की घोषणा की गई है.

कंप्यूटर क्षेत्र की दिग्गज कंपनी माइक्रोसॉफ्ट ने नोकिया को 7.2 अरब डॉलर में खरीदने का फैसला किया है.

ये सौदा 2014 में पूरा होगा जब नोकिया के लगभग 32 हजार कर्मचारियों को माइक्रोसॉफ्ट में स्थानांतरित कर दिया जाएगा.

पर एक ज़माना वो भी था जब नोकिया को भारत में मोबाइल का पर्याय माना जाता था.

भारतीय उपभोक्ताओं को मोबाइल से रूबरू कराने वाली इस कंपनी ने 1995 में भारतीय बाज़ार में प्रवेश किया था और लगभग डेढ दशक तक भारतीय मोबाइल हैंडसेट बाज़ार में अपना दबदबा बनाए रखा.

यूरोप के एक छोटे से देश फ़िनलैंड की कंपनी नोकिया ने भारतीय उपभोक्ताओं को ध्यान में रखकर मोबाइल में बदलाव किए और यही उसकी सफलता का राज़ था.

नोकिया को खरीदेगी माइक्रोसॉफ़्ट

तकनीकी विशेषज्ञ प्रशांतो कुमार रॉय का कहना है," नोकिया ने भारतीय उपभोक्ताओं की ज़रूरतों के मुताबिक़ अपनी रणनीति बनाई और लंबे समय तक उन्हें रिझाने में सफल रही. भारतीय मोबाइल बाज़ार में कई क्रांतिकारी चीज़ें शुरू करने का श्रेय नोकिया को ही जाता है."

निर्माण इकाई

नोकिया भारत में अपनी निर्माण इकाई शुरू करने वाली पहली कंपनी थी.

साथ ही कंपनी ने भारतीय उपभोक्ताओं की ज़रूरतों को समझते हुए बेहद सस्ते, टॉर्च वाले और लाइफ टूल वाले फ़ोन बनाए.

नोकिया ने साल 2006 में चेन्नई के पास श्रीपेरुबंदूर में अपनी निर्माण इकाई स्थापित की. कंपनी इसमें अब तक 25 करोड़ डॉलर का निवेश कर चुकी है.

इस इकाई में बनने वाले 50 प्रतिशत से अधिक फ़ोन 59 देशों को निर्यात किए जाते हैं.

सस्ते फ़ोन

नोकिया ने भारतीय उपभोक्ता की जेब के हिसाब से फ़ोन बनाए. यही वजह थी कि लोगों ने उन्हें हाथों-हाथ लिया.

साल 2000 में कंपनी ने नोकिया 3210 मॉडल भारतीय बाज़ार में उतारा जिसका मेन्यू हिन्दी में था.

इसी तरह कंपनी ने 2003 में नोकिया 1100 उतारा जो विशेष तौर पर भारतीय उपभोक्ताओं के लिए बनाया गया पहला फ़ोन था.

इस फ़ोन में टॉर्च थी जिसका ज़ादू भारतीय उपभोक्ताओं के सिर चढ़ कर बोला था.

लाइफ टूल

नोकिया ने विशेष तौर पर किसानों को मौसम और बाज़ार की जानकारी देने के लिए लाइफ टूल विकसित किया.

तकनीकी विशेषज्ञ प्रशांतो कुमार रॉय कहते हैं कि लाइफ टूल की तकनीक बेहद आसान है. इसके लिए स्मार्टफ़ोन की ज़रूरत नहीं है.

यह टूल 1000 रुपए क़ीमत वाले फ़ोन में भी उपलब्ध है और कोई अनपढ़ आदमी भी इसका आसानी से इस्तेमाल कर सकता है. यह काफ़ी सफल रहा.

नोकिया के लिए भारतीय बाज़ार की अहमियत को इस बात से समझा जा सकता है कि कंपनी की कुल वैश्विक बिक्री का 12 प्रतिशत हिस्सा भारत से आता है.

Image caption नोकिया ने भारतीय बाज़ार में बेहद सस्ते फ़ोन उतारे थे.

गिरावट

कंपनी की साल 2009 में भारतीय बाज़ार में भागीदारी क़रीब 54 प्रतिशत थी.

लेकिन उसके बाद इसमें गिरावट आती रही और बीते साल दक्षिण कोरियाई कंपनी सैमसंग ने इसके पछाड़ कर नंबर एक का तमगा हासिल कर लिया.

वॉइस एंड डेटा के 18वें सालाना सर्वेक्षण के मुताबिक़ बीते वित्त वर्ष में सैमसंग की भारतीय मोबाइल बाज़ार में हिस्सेदारी बढ़कर 31.5 प्रतिशत पहुंच गई जबकि नोकिया 27.2 फ़ीसदी के साथ दूसरे स्थान पर फिसल गई.

नोकिया की लूमिया सिरीज़ के फ़ोन भारतीय उपभोक्ताओं को रिझाने में नाकाम रहे जिसकी वजह से भारतीय बाज़ार में उसकी हिस्सेदारी कम हो गई.

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