'जैक द रिपर' का ख़ुफ़िया मिशन क्या था?

  • 6 सितंबर 2013
लंदन
Image caption 'जैक द रिपर'. नशे में धुत्त वेश्याओं को ही अपना शिकार बनाता था.

आज हम 125 साल पीछे जाएंगे. विक्टोरियन इंग्लैंड में जहां एक सीरियल किलर अपने मिशन पर है.

'जैक द रिपर'. एक बेहद ख़ौफ़नाक हत्यारा जो केवल नशे में धुत्त वेश्याओं को ही अपना शिकार बनाता था. कौन था वो? और क्यों करता था वेश्याओं की हत्या.

बीबीसी विटनेस कार्यक्रम के आधार पर साइमन व्हॉट्स बता रहे हैं, 'जैक द रिपर' की सच्ची कहानी.

सितंबर 1888. लंदन के अख़बार में एक सनसनीखेज़ ख़त छपा. कहा जाता है कि वह ख़त लंदन के पूर्वी इलाक़े में घूम रहे एक ख़तरनाक हत्यारे ने लिखा था.

सनसनीखेज़ ख़त

अख़बार में छपे ख़त में उसने अपनी पहली हत्या के बारे में वीभत्स तरीक़े से जानकारी दी थी. उसने यह भी बताया कि वह और हत्याएं करने वाला है.

अख़बार में छपे इस सनसनीखेज़ ख़त के बारे में पुख़्ता जानकारी नहीं थी कि इसे उस सीरियल किलर ने ही लिखा है. मगर इस ख़त ने उस हत्यारे को एक पहचान, एक नाम दे दिया. 'जैक द रिपर'.

जैक द रिपर ने पाँच हत्याएं की. सब की जान वह एक ख़ास तरीक़े से लेता था. उन पांचों के गर्दन किसी तेज़ धार वाले हथियार से रेते गए थे.

लंदन का व्हाइट चैपल इलाक़ा वेश्याओं का गढ़ माना जाता था. जैक ने इसी इलाक़े में ज्यादातर हत्याओं को अंजाम दिया.

31 अगस्त, 1988. जैक ने अपना पहला शिकार किया. वह मेरी एन निकोलस थी. मेरी निकोलस का शव सुबह-सुबह दो कारोबारियों को मिला.

एक कारोबारी ने बताया, "हम वहां गए. देखा एक औरत ज़मीन पर पड़ी हुई है. पहली नज़र में पता नहीं चल रहा था कि वह नशे में धुत्त होकर पड़ी है, या मर गई है. मेरे साथी ने टार्च दिखाई. उसका गला रेता हुआ था."

नशे में धुत्त वेश्याएं

इस हत्या को बस एक ही सप्ताह गुज़रा था कि एक और वेश्या, ऐनी चैपमेन, की हत्या हो गई. हत्या लगभग एक ही तरीक़े से की गई थी.

'द स्टार', 8 सितंबर 1888. अख़बार में ख़बर आई, "लंदन ख़ूनी साए के गिरफ़्त में है. वह अनाम वहशी, आधा दानव, आधा इंसान, अभी तक फ़रार है. रोज़ सड़कों पर ख़तरनाक इरादों के साथ निकलता है, बेबस और कमज़ोर वर्ग के लोगों को अपना शिकार बनाता है. वह ख़ून के नशे में है. बचो, उसे और शिकार चाहिए."

लंदन का पूर्वी इलाक़ा व्हाइट चैपल अशांत हो उठा. हत्यारे को ढूंढ़ने में पुलिस ने अपनी सारी ताक़त झोंक दी.

पुलिस ने इलाक़े में रहने वाली लगभग सौ वेश्याओं से पूछताछ की.

वेश्याओं ने एक ऐसे शख़्स के बारे में बताया जो जबरन वसूली का गोरखधंधा चलाता था.

कहीं वह यहूदी तो नहीं था

दुर्भाग्य से वे उसका सही सही हुलिया नहीं बता पा रही थीं. उन्होंने बताया कि वह चमड़े का ऐप्रन हमेशा पहने रहता है.

पुलिस को डर था कि चमड़े का ऐप्रन पहनने वाला वह आदमी कहीं कोई यहूदी न हो. उसे गिरफ़्तार किए जाने पर दंगों के भड़क उठने का डर था.

मगर राहत की बात है कि यह आशंका ग़लत साबित हुई.

सितंबर के अंत में अपने ख़तरनाक इरादों के साथ रिपर एक बार फिर सामने आया. इस बार उसने दो औरतों को अपना शिकार बनाया.

एक अक्तूबर, 1888. 'द स्टार' ने फिर ख़बर छापी. 'सफ़ेद चैपल वापस आ गया है. इस बार उसने दो शिकार किए."

रानी विक्टोरिया

Image caption रानी विक्टोरिया भी घटना स्थल पर जाने से खुद को न रोक सकीं.

ये हत्याएं रात के एक बजे हुईं. इस बार भी गला रेत कर हत्या की गई थी.

दोहरे हत्या की इस वारदात ने लंदन ही नहीं दुनिया भर में सनसनी फैला दी. ब्रिटेन ही नहीं, दुनिया भर में यह ख़बर हेडलाइन बनी.

लंदन के पूर्वी इलाक़े, व्हाइट चैपल, में घटना स्थल को देश भर से हज़ारों लोग वहां आए. यहां तक कि रानी विक्टोरिया भी यहां आने से ख़ुद को न रोक सकीं.

रानी विक्टोरिया चाहती थीं कि यहां बड़ी संख्या में जासूसों को लगाया जाए. उन्होंने कई तरह के सवाल उठाए.

पूर्वी इलाक़े में सावधानी बरतते हुए पुलिस की गश्त बढ़ा दी गई. चप्पे चप्पे पर जासूस लगाए गए. हत्यारे ने अपने क़दम कुछ दिन के लिए रोक दिए.

सवाल अब भी जिंदा हैं

मगर एक ही महीने बाद ही उसे अंदाज़ा हो गया कि अब शिकार पर निकलने में कोई ख़तरा नहीं है.

मेरी केली. मेरी रिपर की सबसे कम उम्र की शिकार साबित हुई. 25 साल उम्र थी उसकी. वह अकेली शिकार थी, जिसे घर के भीतर मारा गया.

उसकी मकान मालकिन ने बताया कि उसकी हालत देखकर लगता था कि यह काम किसी इंसान का नहीं, बल्कि किसी हैवान का है.

भले इसके बाद 'जैक द रिपर' ने हत्याएं करनी बंद कर दी मगर वह विक्टोरिया युग के इंग्लैंड को याद दिलाता रहा.

रिपर की कहानी इसलिए भी लोगों को रोमांचित करती है कि उसके बारे में अभी भी रहस्य बना हुआ है. जितने भी महत्वपूर्ण सुबूत थे उन्हें नष्ट कर दिया गया.

सवाल अब भी ज़िंदा है कि कौन था, वो हत्यारा? क्या वह कोई पूर्वी प्रवासी था, या एक सामंत था?

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