सीरिया पर बातचीत जारी, 'शांति की उम्मीद' बढ़ी

जेनेवा
Image caption जॉन केरी और सर्गेई लैवरॉव जेनेवा में

सीरिया के रासायनिक हथियारों को अंतरराष्ट्रीय निगरानी में रखने के बारे में अमरीका और रूस के विदेश मंत्रियों के बीच जेनेवा में एक अहम बैठक हो रही है. अमरीकी विदेश मंत्री जॉन केरी और रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लैवरॉव ने उम्मीद ज़ाहिर की है कि रूस के सुझावों पर अमल कर सीरिया पर सैन्य कार्रवाई से बचा जा सकता है.

बैठक से ठीक पहले एक संवाददाता सम्मेलन में रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लैवरॉव ने कहा कि सीरिया के रासायनिक हथियारों की समस्या सुलझा लेने के बाद अमरीका की तरफ़ से सीरिया पर हमले की कोई ज़रूरत नहीं रहेगी.

लैवरॉव की राय से थोड़ा अलग हटते हुए अमरीकी विदेश मंत्री जॉन केरी ने कहा कि बल प्रयोग की धमकी के कारण ही सीरिया अपने रासायनिक हथियारों को अंतरराष्ट्रीय बिरादरी के हवाले करने के लिए तैयार हुआ है लेकिन उन्होंने आशंका जताई कि अगर कूटनीतिक प्रयास असफल हुए तो बल प्रयोग करना आवश्यक हो जाएगा.

Image caption शांति वार्ता के बीच सीरिया में हिंसा का दौर जारी है.

जेनेवा स्थित बीबीसी संवाददाता जेम्स रॉबिंस के अनुसार अमरीका और रूस के विदेश मंत्रियों के बीच जारी बातचीत बहुत अहमियत रखती है जिसका उद्देश्य सीरिया में पिछले ढाई साल से जारी युद्ध को समाप्त करना और राष्ट्रपति बशर अल-असद से उनके रासायनिक हथियारों को ले लेना है.

'प्रस्ताव मुश्किल'

बातचीत से पहले अमरीकी दल कह चुका है कि सीरिया के रासायनिक हथियारों के मुद्दे पर रूस ने जो प्रस्ताव दिए हैं वो अमल करने के लायक़ तो हैं लेकिन बहुत मुश्किल है.

रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लैवरॉव ने कहा, ''मुझे पूरा विश्वास है कि सीरिया में शांति बहाल करने का मौक़ा हमारे पास है, जिसे हाथ से जाने नहीं दिया जाना चाहिए.''

इससे पहले संयुक्त राष्ट्र ने इस बात की पुष्टि कर दी कि सीरिया ने रासायनिक हथियारों के कंवेन्शन में शामिल होने से संबंधित दस्तावेज़ उसे सौंप दिए हैं.

इस कंवेन्शन के तहत रासायनिक हथियारों की पैदावार और उनका इस्तेमाल ग़ैर-क़ानूनी है. इस कंवेन्शन में शामिल होने वाले देश अपने पास मौजूद सभी रासायनिक हथियारों की घोषणा करते हैं और फिर उन्हें नष्ट कर दिया जाता है.

रासायनिक हमले

Image caption रासायनिक हमले में 1419 लोग मारे गए थे.

अमरीका का आरोप है कि सीरियाई सेना ने 21 अगस्त को रासायनिक हथियारों का इस्तेमाल किया था जिसमें 1419 लोग मारे गए थे, लेकिन सीरिया इन आरोपों से इनकार करता रहा है.

इससे पहले सीरियाई राष्ट्रपति बशर अल-असद ने एक रूसी टीवी चैनल से बातचीत के दौरान कहा था कि सीरिया अपने रासायनिक हथियारों को अंतरराष्ट्रीय निगरानी में दे देगा.

सीरियाई रासायनिक हथियारों को अंतरराष्ट्रीय निगरानी में लाने का सुझाव रूस ने दिया था जिसका सीरिया ने स्वागत किया था.

रूसी प्रस्ताव के कारण ही अमरीका ने सीरिया पर हमले की योजना को स्थगित कर कूटनीति को मौक़ा देने का फ़ैसला किया था.

सीरिया में 2011 से शुरू हुए सरकार विरोधी हिंसक आंदोलन में अब तक एक लाख से ज़्यादा लोग मारे जा चुके हैं.

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