सीरिया संकटः बातचीत का दूसरा दौर

Image caption बातचीत से सीरिया संकट के हल होने की उम्मीद बरकरार है.

सीरिया के रासायनिक हथियारों को लेकर अमरीका और रूस के विदेश मंत्रियों के बीच दूसरे दौर की बातचीत शुरू हो गई है.

अमरीकी अधिकारियों ने कहा कि गुरुवार को हुई बैठक करीब एक घंटे तक चली. बातचीतशुक्रवार को भी जारी रहेगी.

जेनेवा में बीबीसी के प्रतिनिधि पॉल एडम्स ने कहा, ''ऐसा लगता है कि दोनों देशों के बीच असहमतियों की खाई अभी भी चौड़ी है.''

शुक्रवार को हो रही बैठक में संयुक्त राष्ट्र और अरब लीग के दूत लकदर ब्राहिमी भी बातचीत की प्रगति देखने के लिए शामिल होने वाले हैं.

गुरुवार को रूस के विदेश मंत्री सरगेई लावरोव अमरीका के विदेश जॉन केरी ने कहा था कि उन्हें उम्मीद है कि सीरिया के रासायनिक हथियारों को अंतरराष्ट्रीय नियंत्रण में लाने की योजना अमरीकी सैन्य कार्रवाई को टाल सकेगी.

सोमवार को रूस ने रासायनिक हथियारों के बढ़ते संकट से निपटने के लिए अपने प्रस्ताव की घोषणा की थी जबकि अमरीकी कांग्रेस में सैन्य कार्रवाई के ओबामा के प्रस्ताव पर बहस की तैयारी हो रही थी.

आवेदन

संयुक्त राष्ट्र ने इस बात की पुष्टि की है कि रासायनिक हथियार संधि में शामिल होने के लिए सीरिया की तरफ से उसे आवेदन मिल चुका है, जोकि रूस के प्रस्ताव का केंद्रीय मुद्दा था.

सीरिया के राष्ट्रपति बशर अल-असद ने कहा है कि तीस दिन बाद से संयुक्त राष्ट्र को रासायनिक हथियारों के जखीरे के संबंधित आंकड़े मिलने शुरू हो जाएंगे.

हालांकि केरी ने यह कहते हुए इसे खारिज कर दिया कि इस तरह की मानक कार्रवाइयों का कोई मतलब नहीं है जबकि रासायनिक हथियार का इस्तेमाल किया जा चुका है.

21 अगस्त को राजधानी दमिश्क के घोटा इलाके में हुए रासायनिक हमलों में सैकड़ों लोगों की मौत के लिए अमरीका सीरियाई सरकार को जिम्मेदार मानता है.

संधि पर राजी

एक रूसी टीवी चैनल को दिए साक्षात्कार में असद ने कहा है कि रूस का प्रस्ताव एकपक्षीय नहीं होना चाहिए.

बाद में संयुक्त राष्ट्र में सीरियाई दूत बशर जाफरी ने कहा कि सीरिया अब इस संधि में पूरी तरह शामिल हो गया है.

संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून ने सीरिया के निवेदन का स्वागत किया है. हालांकि संयुक्त राष्ट्र ने इसके स्वीकार किए जाने को लेकर कोई तत्काल प्रतिक्रिया नहीं दी है.

राजनीतिक प्रेक्षकों का कहना है कि यह संभव है कि निवेदन में कुछ मुद्दों को छोड़ दिया गया हो और उसे सीरिया के वापस पास भेजा जाए.

यह कोई खेल नहीं

गुरुवार की बैठक के पहले केरी ने कहा था कि दुनिया देखना चाहेगी कि असद सरकार रासायनिक हथियारों को त्यागने के अपने वादे पर कायम रहती है या नहीं.

उन्होंने कहा, ''यह कोई खेल नहीं है. इसे वास्तविकता के धरातल पर उतरना होगा, इसे ब्योरेवार होना होगा, इसे प्रमाणिक और विश्वसनीय होना होगा. इसे नियत समय में लागू करना होगा और अंततः यदि ऐसा नहीं होता है तो इसके परिणाम भी अवश्यंभावी होंगे.''

लावरोव ने कहा है कि सीरिया में रासायनिक हथियारों के मुद्दे का समाधान अमरीकी सैन्य कार्रवाई को गैर-जरूरी बना देगा.

अमरीका और रूस ने जेनेवा में बड़ी संख्या में अपने राजदूत और हथियार विशेषज्ञों को भेजा है.

रूस का रुख

हालांकि, माना जा रहा है कि रूस किसी भी तरह की सैन्य कार्रवाई या रासायनिक हमले के लिए सीरियाई सरकार को जिम्मेदार ठहराने वाले किसी प्रस्ताव को स्वीकार नहीं करेगा.

रूस ने पहले ही संयुक्त राष्ट्र चार्टर के छठे अध्याय को लागू किये जाने से संबंधित आरजी प्रस्ताव को खारिज कर दिया है, जिसके तहत वादे से पीछे हटने की हालत में सीरिया पर सैन्य कार्रवाई की अनुमति होती.

चीन और रूस पहले ही असद सरकार की भर्त्सना वाले तीन आरजी प्रस्तावों पर वीटो लगा चुके हैं.

असद सरकार के खिलाफ 2011 से शुरू हुए प्रदर्शनों में अबतक एक लाख लोग मारे जा चुके हैं.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए यहां क्लिक करें. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं)

संबंधित समाचार