एक शहर जो ज़िंदगी की कहानी कहता है...

  • 18 सितंबर 2013
अफ्रीकी देश घाना का एकरा शहर.

पश्चिमी अफ्रीकी देश घाना में तरक्क़ी की रफ्तार इस क्षेत्र के अन्य देशों के लिए जलन का कारण हो सकती है. घाना में तेल के कुएं मिलने के बाद आर्थिक प्रगति की रफ्तार और तेज़ हो गई है.

घाना को पश्चिमी अफ्रीका का दरवाज़ा भी कहा जाता है. गहमागहमी और ज़िंदगी से भरपूर इस शहर में तकरीबन 20 लाख लोग मौसम की शिद्दत से बेख़बर बस काम में मशगूल रहते हैं.

घाना में तेज़ी से हो रही आर्थिक प्रगति क्षेत्र के अन्य देशों के लिए एक मिसाल है और इस तरक्की का केंद्र बिंदु है 'अकरा' शहर. ये मेरा शहर है.

वीडियो देखिएः मेरा शहर अकरा

ऊंचाइयों की तरफ ये सफर कोका, सोना और हाल में मिले तेल की वजह से है लेकिन आज भी समाज में ज़्य़ादातर लोगों को बेहतर जिंदगी की तलाश है.

शहर में अक्सर कई विकलांग लोग भीख मांगते हुए दिख जाते हैं लेकिन हर रविवार को टैक्सियों का एक अड्डा इनके लिए खेल के मैदान में तब्दील हो जाता है. ये 'रोलम पोल' का खेल है.

ये कमज़ोर दिल वालों के लिए नहीं है. सख्त जान होना इस खेल के लिए बेहद ज़रूरी है. खिलाड़ी पहिये लगी गाड़ियों पर पूरे मैदान में भागते हैं और गेंद को हाथों से खेला जाता है.

'रोला बॉलर' अब्दुर रहमान कहते हैं, "यहां एक होने का अहसास बड़ी शिद्दत से होता है. ज़िंदगी हो या मौत सब साथ-साथ होता है."

तराशे गए ताबूत

घाना के लोग सब कुछ अलग अंदाज़ से करते हैं. वे दुनिया से कूच कर जाने को भी रंगों से भरते हैं.

शहर के हर कोने में हाथों से तराशे गए ताबूत बनाए जाते हैं. चाहे मरने वाला किसान हो या मछुआरा उसका ताबूत उसके जिंदगी की कहानी कहता है.

मछलियाँ, झोपड़ी और यहां तक कि कोल्ड ड्रिंक की शक्ल में बनाए गए ताबूत यहां खासतौर पर तैयार किए जाते हैं.

ताबूत तैयार करने का काम करने वाले 'पाए जो' कहलाते हैं. ये ताबूत अकरा की खासियत हैं जो और कहीं नहीं बनाए जाते.

अगर ऐसे ताबूत आपको ब्रिटेन या अमरीका में दिखें तो आप यक़ीन कर लें कि ये अकरा की देखा देखी में बनाए गए हैं.

ऐसे ताबूत यहां बहुत पसंद किए जाते हैं और हर कोई चाहता है कि उन्हें इसी तरह के ताबूत में दफ़न किया जाए.

बॉक्सिंग

जुमे की शाम ये शहर जाग उठता है और बॉक्सिंग यहाँ खास तौर पर पसंद किया जाता है. बाक्सिंग के बड़े-बड़े नाम यहां पले बढ़े हैं.

ये देश चैम्पियन पैदा करने के लिए मशहूर रहा है. बॉक्सिंग के लिए कड़ी प्रैक्टिस की जाती है. खेल में शामिल होने वाले सुबह से ही कसरत शुरू कर देते हैं जो दोपहर तक जारी रहती है.

बक़ौम के इलाके में जवान बॉक्सर यहां मौजूद दर्जनों जिम में अंतरराष्ट्रीय बाक्सिंग प्रतियोगिता जीतने के ख्वाब देखते हैं. यहां सुविधाएं चाहे बुनियादी हों लेकिन कोचिंग कहीं से कम नहीं.

बॉक्सिंग कोच एमिलि टाइसन कहते हैं, "अकरा खासतौर पर बॉक्सिंग में अहम मुक़ाम रखता है क्योंकि हम हर जगह लड़ना पसंद करते हैं और हमारे मुक्केबाज़ों का अंदाज़ आक्रामक है.

वो कहते हैं, "आक्रामकता के साथ एक खास अंदाज़ भी है. अगर हमें उचित मदद मिले तो हम पांच साल में यहां अंतरराष्ट्रीय स्तर के बॉक्सर पैदा कर पाएंगे. हमारा भविष्य बहुत उज्ज्वल है."

आर्थिक प्रगति के साथ-साथ अगर किस्मत ने भी साथ दिया तो यहां हर शख्स बेहतर जिंदगी की उम्मीद कर सकता है जो शायद किसी मोड़ पर सबका इंतज़ार कर रही है. अकरा मेरा शहर है.

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