उत्तरी श्रीलंका में ऐतिहासिक मतदान

श्रीलंका में  चुनाव
Image caption मत डाल चुके मतदाताओं के उँगलियों के नाखून पर न छूटने वाली स्याही के निशान देखे जा सकते हैं

श्रीलंका में उत्तरी क्षेत्र में पहली अर्ध-स्वायत्त परिषद के चुनाव के लिए मतदान हो रहा है.

चार साल पहले तमिल विद्रोहियों की हार के बाद इस इलाक़े में पहली बार चुनाव हो रहे हैं.

दशकों पहले तमिल बाहुल्य उत्तरी क्षेत्र में इस तरह की परिषद के गठन का वायदा किया गया था. श्रीलंका के केवल इसी क्षेत्र को कभी अपनी परिषद हासिल नहीं हुई.

जाफ़ना में एक मतदान केंद्र पर मौजूद बीबीसी संवाददाता चार्ल्स हेवीलैंड ने बताया कि मतदान शुरू होने से पहले सभी उम्र के लोग मतदान केंद्र के बाहर क़तार में खड़े हुए हैं.

चुनाव प्रचार के दौरान इनमें सैन्य हस्तक्षेप के आरोप लगे लेकिन अधिकारी इसका पूरी तरह से खंडन कर रहे हैं.

चुनावी ध्रुवीकरण

एक वृद्ध महिला ने बीबीसी को बताया, "हम तमिलों के लिए एक व्यवस्था चाहते हैं. इसलिए हम इस बार वोट डालने आए हैं. हम कई सालों से इंतज़ार कर रहे हैं. अब हमें शांति चाहिए."

लेकिन हमारे संवाददाता ने बताया कि कुछ गड़बड़ियों की ख़बरें मिल रहीं हैं.

श्रीलंका के इस इलाक़े में तमिल टाईगर्स और सिंहली बहुल सेना के बीच लगभग 26 सालों तक गृहयुद्ध चला था.

वर्ष 2009 में तमिल टाईगर्स पराजित हुए. इसमें ख़ूनी और हिंसक संघर्ष हुआ.

बीबीसी संवाददाता ने बताया कि उत्तरी इलाक़ों में कड़वाहट और हिंसा का माहौल है और चुनावों में ध्रुवीकरण हो रहा है.

38 प्रांतीय परिषदों के लिए हो रहे चुनाव में तमिल नेशनल गठबंधन को बहुमत मिलने की उम्मीद है.

तमिल नेशनल गठबंधन पहले तमिल टाईगर्स के प्रभाव में था लेकिन अब वो एकीकृत श्रीलंका में ज़्यादा शक्तियाँ चाहते हैं.

Image caption 38 प्रांतीय परिषदों के लिए हो रहे चुनाव में तमिल नेशनल अलाइंस को बहुमत मिलने की उम्मीद है

इनके मुख्य प्रतिद्वंद्वी यूनाइटेड पीपल्स फ़्रीडम अलाएंस का कहना है कि श्रीलंका के राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे को युद्ध ख़त्म करने और क्षेत्र में विकास करने का श्रेय मिलना चाहिए.

मानवाधिकार उल्लंघन

युद्ध के आख़िरी चरण में सरकार पर लगे युद्ध अपराधों के आरोपों को ज़ोरदार तरीक़े से सरकार नकारती रही है. श्रीलंका की सरकार का कहना है कि वह कथित मानवाधिकारों के उल्लंघन के मामलों की जांच कर रही है.

इन चुनावों पर कड़ी निगरानी की जा रही है. राजधानी कोलंबो में नवंबर में राष्ट्रमंडल देशों का सम्मेलन होना है.

इस महीने की शुरुआत में संयुक्त राष्ट्र की मानवाधिकार आयुक्त नवी पिल्लई ने श्रीलंका के दौरे के बाद कहा था कि देश में तेज़ी से तानाशाही बढ़ रही है और लोकतंत्र को नज़रअंदाज़ किया जा रहा है और क़ानून का राज कम हो रहा है.

लेकिन श्रीलंकाई सरकार ने उनके वक्तव्य को "पूर्वाग्रह" बताया था.

संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट के अनुसार श्रीलंका में गृह युद्ध के दौरान लगभग 40 हज़ार लोग मारे गए. श्रीलंका की सरकार इस आंकड़े को नौ हज़ार बताती है.

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