"क्या आपने गोलियों से छलनी कपड़े देखे है"

अमरीका में बंदूक
Image caption अमरीका में बंदूक रखने की संवैधानिक आज़ादी है

ओक क्रीक, न्यू टाउन, औरोरा, कोलंबाइन--इन अमरीकी शहरों के नाम आपने सुन रखे हैं लेकिन शायद ये याद न हो कि क्यों सुने थे ?

अमरीका में लोगों को अच्छी तरह याद है कि इन शहरों के नाम अख़बारों और टीवी पर क्यों आए थे. अब इस फ़ेहरिस्त में वाशिंगटन के नेवीयार्ड का नाम भी जुड़ गया है.

अमरीकी नेवी यार्ड में गोलीबारी

जब भी कोई सरफिरा या दुनिया से नाराज़ इंसान कभी स्कूली बच्चों पर तो कभी गुरूद्वारे में शीश झुकाने आए लोगों पर, कभी अपने ही सहपाठियों पर तो कभी फ़िल्म देख रहे दर्शकों पर गोली बरसाता है तो ये नाम एक बार फिर धूल की परतों से बाहर निकल आते हैं. लेकिन फिर उसी तेज़ी से दफ़न भी हो जाते हैं.

बंदूक पर रोक लगाने की बहस तेज़ होती है फिर गर्म तवे पर पानी के छींटे की तरह ग़ायब. बंदूक रखने के हक़ के लिए जब रैली निकलती है तो ज़्यादा लोग जुटते हैं, जब उसका शिकार बने बेगुनाहों को याद करने के लिए कोई सभा होती है तो लोग वहां नज़रें बचाकर स्मार्टफ़ोन पर ईमेल चेक कर रहे होते हैं.

चालीस बार प्रस्ताव

Image caption अमरीका के स्कूल में हुई गोलीबारी के बाद देश के राष्ट्रपति बराक ओबमा की आँखें नम हो गईं थीं

जिस क़ानून से लाखों अमरीकी स्वास्थ्य सुविधाओं के दायरे में आ गए हैं, उसे ख़त्म करने के लिए रिपबलिकन सांसद चालीस बार अमरीकी संसद में प्रस्ताव ला चुके हैं. बंदूक पर रोक लगाने की बात हो तो यही लोग बगलें झांकने लगते हैं.

आई-फ़ोन का नया मॉडल खरीदने के लिए रात भर कतार लगती है. कुछ लोग घंटों खड़े होने से बचने के लिए अपनी जगह बेघरों और भिखारियों को पैसे देकर कतार में खड़ा कर जाते हैं.

लेकिन बंदूक खरीदनी हो तो तेल-साबुन की तरह खरीद सकते हैं. आख़िर संविधान ने इसकी आज़ादी दे रखी है. इस आज़ादी को बरक़रार रखनेवालों की दलील होती है-- गोली बंदूक नहीं चलाती, आदमी चलाता है.

नेवीयार्ड में हुई गोलीबारी को मुश्किल से एक हफ़्ता हुआ है. लगता है मानो महीने गुज़र गए.

बंदूक की बहस

Image caption 'बंदूक की बहस को एक बार फिर दफ़न करने का वक़्त आ गया है'

जिनके अपने छिन गए, बस उन्हीं की आंखें नम रहती हैं. "क्या आपने देखा है जब कपड़े गोलियों से छिद जाते हैं तो कैसे दिखते हैं? आप कल्पना नहीं कर पाएंगे. मैने अपनी बहन के गोलियों से छलनी कपड़ों को उसके बिस्तर पर बिछा रखा है. उसे पांच गोलियां लगी थीं...एक बिल्कुल दिल के अंदर."

लेकिन सैंडी हुक स्कूल में बीस मासूम बच्चों के साथ मारी गई टीचर विक्टोरिया की बहन की ये गुहार अमरीका के दिल को नहीं चीर पा रही है.

अभी वहां मिस अमरीका के रंग और फ़िगर पर बहस हो रही है, नए आई-फ़ोन के कैमरे का विश्लेषण हो रहा है. बंदूक की बहस को एक बार फिर दफ़न करने का वक़्त आ गया है.

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